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बिना नक्शा के भवनों को बचाने डिप्टी मेयर और पार्षद जाएंगे कोर्ट

Ranchi: विगत कुछ दिनों से रांची में जिला प्रशासन एवं नगर निगम के द्वारा अतिक्रमण हटाने का काम चलाया जा रहा है. वैसे भवन जो पूर्व में बने हुए है, जिसका नक्शा नहीं बना है उन्हें भी नोटिस दिया जा रहा है, जिससे जनता भय के माहौल में जी रही है. उच्च न्यायालय द्वारा नदी, नालों को अतिक्रमण मुक्त करने को कहा गया है. लेकिन माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की आड़ में प्रशासन द्वारा शहर में पूर्व में बने मकान जिसका नक्शा पास नहीं है, उसे तोड़ने हेतु नोटिस जारी किया जा रहा है. यह बातें गुरुवार को रांची नगर निगम में डिप्टी मेयर की अध्यक्षता में पार्षदों के साथ बैठक में कहीं गई.

साथ ही कहा गया कि शहर में कई ऐसे मकान है जो की भूई हरी जमीन, खास महल जमीन व आदिवासी जमीन पर बना हैं जिसका नक्शा पास नहीं किया जा सकता. ऐसे लगभग 1 लाख 80 हजार मकान है.

क्या सरकार शहर के 1 लाख 80 हजार घर तोड़ पाएगी. ऐसे में इस तरह का भय का माहौल बनाना उचित नहीं हैं. इसे लेकर पीआईएल के माध्यम से डिप्टी मेयर और पार्षद हाई कोर्ट जाएंगे.

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भवन तोड़ने हेतु दिए जा रहे नोटिस पर समीक्षा की गयी, जिसमें निर्णय लिया गया कि पीआईएल के माध्यम से भवनों को रेगुलराइज कराने के लिए कोर्ट की शरण में जाएंगे. साथ ही शहर के कई स्वयंसेवी संस्था, सामाजिक संस्था के साथ बुद्धिजीवी वर्ग पीटीशनर बनेंगे. डिप्टी मेयर ने कहा कि पिछले कई वर्षों से वे नगर विकास विभाग से पूर्व में बने भवनों को रेगुलराइज कराने हेतु प्रयासरत है. जिसके लिए पत्राचार भी कई बार किया गया है.

कुछ दिनों पहले मुख्य सचिव व प्रधान सचिव, नगर विकास विभाग से भी मिल कर पत्राचार किया गया है. सरकार की ओर से अब तक पूर्व में बने भवनों को रेगुलराइज कराने हेतु किसी तरह की गाइडलाईन नहीं आने के कारण जनप्रतिनिधि कोर्ट की शरण में जाने को बाध्य है.

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