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उप मुख्यमंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा को नहीं है 4214.33  करोड़ के अनुदान का ऑडिट नहीं होने की जानकारी

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Ranchi:  झारखंड में पंचायतों के सशक्तिकरण के लिए मिले 14वें वित्त आयोग के अनुदान की राशि का सरकार ऑडिट नहीं करा रही है. राज्य के उप मुख्यमंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा को भी इसकी जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि ऑडिट तो लगातार हो रही है. उन्होंने कहा कि वित्त आयोग से 4214.33 करोड़ रुपये मिले हैं. जिसका 2014-15 से लगातार अंकेक्षण भी कराना है.

उन्होंने कहा कि अगर अंकेक्षण नहीं हो रहा है, तो इसकी जानकारी लेकर कार्रवाई की जायेगी. न्यूजविंग संवाददाता ने बताया कि नौ महीने से अंकेक्षण करनेवाले फर्म का चयन ही पंचायती राज विभाग की तरफ से नहीं किया गया है. तीन महीने से अधिक समय तक निविदा को अंतिम रूप नहीं दिये जाने से उसे रद्द करने की औपचारिकताएं की जानी चाहिए.

निविदा रद्द कर पुनर्निविदा आमंत्रित करने की प्रक्रिया भी शुरू करना जरूरी है. इसे विभागीय मंत्री ने गंभीरता से लेते हुए विभागीय सचिव से रिपोर्ट मांगने की बातें कहीं.

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वित्त आयोग से 2019-20 तक मिलने हैं 6046.73 करोड़

14वें वित्त आयोग से झारखंड को 2019-20 तक कुल 6046.73 करोड़ रुपये मिलने हैं. अब तक 4214.33 करोड़ रुपये राज्य को मिल चुके हैं. 14वें वित्त आयोग का कार्यकाल डेढ़ साल में समाप्त हो जायेगा. झारखंड को 2014-15 में 652.83 करोड़, 2016-17 में 1022.53 करोड़, 2017-18 में 1178.63 करोड़, 2018-19 में 1360.62 करोड़ रुपये मिले हैं.

2019-20 में 1832.12 करोड़ और मिलेंगे. वित्त आयोग के अनुदान में 90 प्रतिशत सहायता मूल अनुदान के रूप में दी जाती है, जबकि 10 फीसदी राशि परफारमेंस के आधार पर राज्यों को दी जाती है.

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