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पेयजल और स्वच्छता विभाग में 10 साल से अधिक समय से जमे हैं एक अधिकारी

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  • अवर सचिव के पद पर विभाग में आये थे अब बन गये हैं संयुक्त सचिव
  • विभाग में पदस्थापना, ट्रांसफर पोस्टिंग और आरोप के मामले का करते हैं निष्पादन
  • तीन वर्ष से अधिक एक जगह पर नहीं रह सकते हैं कोई भी राज्य प्रशासनिक सेवा वर्ग के एक अधिकारी

Ranchi: राज्य प्रशासनिक सेवा संवर्ग के अधिकारी अभय नंदन अंबष्ट 10 सालों से अधिक समय से एक जगह पर पदस्थापित हैं. श्री अंबष्ट ने पेयजल और स्वच्छता विभाग में अवर सचिव के पद पर योगदान दिया था. यहीं पर उन्हें उप सचिव के पद पर प्रोन्नति मिली और अब ये संयुक्त सचिव हैं. तत्कालीन विभागीय सचिव सुधीर प्रसाद के समय इनकी पोस्टिंग विभाग में हुई थी. कार्मिक प्रशासनिक और राजभाषा सुधार विभाग के नियमों के हिसाब से राज्य प्रशासनिक सेवा संवर्ग के कोई अधिकारी तीन वर्ष से अधिक समय तक किसी पद पर नहीं रह सकता है.

अभय नंदन अंबष्ट, संयुक्त सचिव, पेयजल व स्वच्छता विभाग

तीन वर्षों या उससे पहले होता है राज्य लोक सेवा आयोग के अधिकारी का तबादला 

राज्य सरकार की तरफ से वर्षों से एक ही पद पर जमे कई अधिकारियों का तबादला दो वर्ष पहले किया गया था. लेकिन अभय अंबष्ट अब भी पेयजल और स्वच्छता विभाग में काबिज हैं और महत्वपूर्ण संचिकाओं का कामकाज भी देख रहे हैं. यहां यह बताते चलें कि राज्य सचिवालय सेवा संवर्ग के कर्मचारी और अधिकारी एक जगह पर रह सकते हैं, पर झारखंड लोक सेवा आयोग और बिहार लोक सेवा आयोग के अधिकारियों का तबादला तीन वर्ष में किया जाता रहा है.

स्थापना, ट्रांसफर-पोस्टिंग और आरोप की संचिकाएं निष्पादित करते हैं अंबष्ट

विभाग में अभय नंदन अंबष्ट स्थापना, ट्रांसफर-पोस्टिंग और आरोपों से संबंधित संचिकाओं को देखते हैं. आरोप से संबंधित संचिका में इनके हस्ताक्षर से ही राजपत्रित अधिकारी (कार्यपालक अभियंता और इससे ऊपर) और अराजपत्रित अधिकारी (कनीय अभियंता और सहायक अभियंता) का निलंबन, विभागीय कार्यवाही संचालित करने तथा निलंबन मुक्त करने की कार्रवाई की जाती है. इसलिए संयुक्त सचिव का पद इन सभी कार्यवाहियों के लिए काफी आवश्यक है.

लंबे अरसे से विभाग में रहने से बनी है पकड़

सूत्रों का कहना है कि लंबे अरसे से एक ही विभाग में बने रहने से इनकी पकड़ बनी हुई है. विभाग में राजपत्रित स्तर के अभियंताओं के सारे कार्यकलापों की जानकारी भी इन्हें रहती है. इतना ही नहीं, विभागीय मंत्री और सचिव से भी इनके रिश्ते काफी मधुर बताये जाते हैं. इनके द्वारा बढ़ायी गयी संचिका पर अमूमन ज्यादा आपत्ति नहीं की जाती है.

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