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बार संचालकों से लॉकडाउन अवधि का भी एकमुश्त लाइसेंस शुल्क मांग रहा विभाग, चैंबर बोला- कुछ तो सहानुभूति दिखाइये

  • चैंबर ने उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के सचिव को लिखा पत्र
  • बार संचालकों के सात महीने का एकमुश्त लाइसेंस शुल्क छोड़ने का किया आग्रह

Ranchi : झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से उत्पाद और मद्य निषेध सचिव विनय कुमार चौबे को पत्र लिखा गया है. इसमें एक नवंबर से कंटेनमेंट जोन के बाहर स्थित होटल, रेस्तरां और बार के आरंभ होने के साथ ही संचालकों को एकमुश्त बार लाइसेंस शुल्क जमा करने के सरकारी आदेश का जिक्र है. पत्र में बार लाइसेंस शुल्क के रूप में एकमुश्त राशि जमा करने के बोझ से उत्पन्न होनेवाली कठिनाइयों के समाधान का भी जिक्र किया गया है.

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महासचिव धीरज तनेजा ने कहा कि बार लाइसेंसधारियों को मौखिक रूप से पूरे एक वित्तीय वर्ष का लाइसेंस शुल्क जमा करने की बात कही गयी है. इससे बार संचालक अपना व्यापार आरंभ करने में खुद को असमर्थ महसूस कर रहे हैं. 22 मार्च से लॉकडाउन के बाद 31 अक्टूबर 2020 तक सरकार के आदेश से ही ये व्यापार बंद रहे हैं. ऐसे में जिन्होंने पूर्व में वित्तीय वर्ष 2020-21 का लाइसेंस शुल्क जमा नहीं कराया है, उन्हें लॉकडाउन की अवधि (एक अप्रैल से अक्टूबर 2020 तक) का भी शुल्क जमा कराने की बात करने से व्यापारी चिंतित हैं.

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सहानुभूतिपूर्वक चिंतन करे सरकार

चैंबर ने अपने पत्र में कहा है कि सरकार के आदेश से ही पिछले छह माह से बंद रहे बार के संचालकों द्वारा इस अवधि में भी बिना किसी व्यापार के दुकान का किराया, अपने कर्मचारियों का वेतन, बिजली बिल खर्च सहित अन्य दैनिक खर्चों का वहन किया गया है. ऐसे में व्यापार आरंभ करने के साथ ही एकमुश्त लाइसेंस शुल्क का भुगतान करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है. इस पर सरकार को सहानुभूतिपूर्वक चिंतन करने की आवश्यकता है.

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एक नवंबर 2020 से 31 मार्च 2021 तक का ही लाइसेंस शुल्क लेने का आग्रह

तनेजा ने कहा कि लॉकडाउन के बाद अर्थव्यवस्था को गति देने के उद्देश्य से केंद्र और राज्य सरकार की ओर से हर क्षेत्र में व्यापार और उद्योग जगत को प्रोत्साहित किया जा रहा है. ऐसे में बार संचालकों को भी प्रोत्साहन देने पर विचार करना हितकर होगा. पत्र में आग्रह किया गया है कि जिन बार लाइसेंसधारियों ने वित्तीय वर्ष 2020-21 का लाइसेंस शुल्क जमा नहीं कराया है, उनसे से केवल एक नवंबर 2020 से 31 मार्च 2021 तक का ही लाइसेंस शुल्क लेने का निर्देश जारी करें. साथ ही जिन लाइसेंसधारियों ने वित्तीय वर्ष 2020-21 का शुल्क पूर्व में ही विभाग में जमा करा दिया है, उनके लॉकडाउन की अवधि (दो त्रैमासिक अवधि) के शुल्क का समायोजन अगले वित्तीय वर्ष 2021-22 के लाइसेंस नवीनीकरण के दौरान करने की व्यवस्था की जाये. सरकार के इस प्रयास से बार संचालकों को पुनः व्यापार आरंभ करने में सुविधा होगी तथा वे निर्बाध रूप से सरकार को राजस्व भी दे पायेंगे.

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