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आयुर्वेद के डॉक्टरों को दांतों के इलाज से रोकने के लिये डेंटल एसोसिएशन ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

Ranchi: आयुर्वेद डॉक्टरों को दांतों का इलाज करने की अनुमति दी गई है. सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन रेगुलेशन में संशोधन करते हुए उन्हें यह अधिकार दिया गया है. अब इस रेगुलेशन को सुप्रीम कोर्ट में इंडियन डेंटल एसोसिएशन के डॉ विवेक कुमार द्वारा चुनौती दी गई है.

जिसमें उन्होंने कहा है कि सेंट्रल काउंसिल फॉर इंडियन मेडिसीन 2020 में एक संशोधन किया गया है, जिसके तहत आयुर्वेद डॉक्टरों को दांतों का इलाज करने की अनुमति दी गई है. लेकिन विनियमन से पहले दांतों का इलाज केवल डेंटिस्ट ही करते थे.

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अब डेंटिस्ट्स के अधिकारों की रक्षा के लिए आइडीए के एग्जीक्यूटिव मेंबर डॉ विवेक से आइडीए झारखंड के चेयरमैन और सेक्रेटरी ने गुहार लगाई है.

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एसोसिएशन को जगी उम्मीद

डॉ विवेक कुमार ने अपनी याचिका में इस तथ्य को सामने रखा है कि डेंटिस्ट को डेंटल ट्रीटमेंट करन के लिए 5 साल की पढ़ाई और ट्रेनिंग करनी पड़ती है. ऐसे में आयुर्वेद डॉक्टरों को डेंटल ट्रीटमेंट करने की अनुमति देने से मरीजों पर विनाशकारी प्रभाव डाल सकता है. वहीं डेंटिस्ट्स के अधिकारों का हनन भी होगा.

जिससे कि देशभर के डेंटिस्ट मायूस हो गए है. वहीं उनका दर्द सुनने वाला भी कोई नहीं है. यह देखते हुए ही सुप्रीम कोर्ट करा दरवाजा खटखटाया है.

इंडियन डेंटल एसोसिएशन झारखंड के चेयरमैन डॉ सुशील कुमार ने कहा कि अब एक उम्मीद जगी है कि डॉ विवेक के नेतृत्व में उन्हें न्याय मिलेगा.

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