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ग्रामीण कस्बों में कोरोना जांच का दायरा बढ़ाने की उठी मांग, सीएम ने कहा- एक्शन ले रही सरकार, डीएमएफटी फंड का भी होगा उपयोग

एडिशनल पीएचसी, सीएचसी, रेफरल अस्पताल को दुरूस्त करने की उठी मांग

Ranchi. कोरोना की दूसरी लहर से निपटने में सभी जिलों में डीएमएफटी फंड का भी उपयोग किया जाना है. सीएम हेमंत सोरेन ने बुधवार को एक बार फिर सभी डीसी को इससे संबधित निर्देश जारी किये हैं. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के सांसदों और विधायकों के साथ कोविड-19 को लेकर विचार विमर्श करते हुए उन्होंने कहा कि दूसरी लहर में चुनौती बड़ी है. ऐसे में इस मद से फंड का भी उपयोग हो.

इसके अलावा उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जांच का दायरा बढ़ाये जाने पर भी काम हो रहा है. जनप्रतिनिधियों से मिले सुझावों के आधार पर कोरोना चैलेंज से निपटने में मदद मिल रही है. कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, सांसद अन्नपूर्णा देवी, सुनील सिंह, सीपी चौधरी, विधायक बाबूलाल मरांडी, अनूप जयमंगल सिंह, जेपी भाई पटेल, मनीष जायसवाल, ममता देवी, अंबा प्रसाद, उमाशंकर अकेला, सरफराज अहमद, बिनोद सिंह, बिरंची नारायण, मथुरा प्रसाद महतो, पूर्णिमा नीरज सिंह, नीरा यादव, ढूलू महतो समेत कई विधायकों ने अपने अपने सुझाव और क्षेत्र की समस्याओं को रखा.

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गावों में जांच कैंप और ईलाज की सुविधा बढ़ेः

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य में मरीजों की रिकवरी रेट बढ़ी है. यह एक अच्छा संकेत है. लोग होम आइसोलेशन में तेजी से ठीक हो रहे हैं. पर शहरों के अलावे गांवों में अब भी जांच नहीं हो रही है. इससे वास्तविक संक्रमितों की संख्या का पता नहीं चल पाता. गांवों में जांच और चिकित्सा सुविधा बढ़ाने की आवश्यकता है. भय और जागरूकता की कमी के कारण लोग जांच के लिए अस्पताल नही जा रहे हैं.

ऐसे जगहों में कैम्प लगाकर जांच और इलाज किये जाने की आवश्यकता है. सरफराज अहमद ने सीएम से आग्रह किया कि जिन परिवारों के पास राशन कार्ड नहीं है, उन्हें भी राशन मुहैया कराया जाये. कार्ड के लिए जिन लोगों ने ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन कराया है या जिन्होंने नहीं कराया है, उन्हें भी मिले. साथ ही लॉकडाउन के लिये और कठोरता दिखाने की भी अपील की.

मोबाइल वैन का हो प्रयोगः

बिरंची नारायण ने सुझाव दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में टेस्टिंग की व्यवस्था और बेहतर हो. इसके लिये मोबाइल वैन चलाया जाये. बोकारो में आरटीपीसीआर लैब स्थापित होने से जांच का दायरा बढ़ेगा. लैब की स्थापना के लिये अब तक सकारात्मक पहल नहीं हो सकी है. सदर अस्पताल में तकनीशियन का अभाव है. बोकारो को फिलहाल 25 वेंटिलेटर की सुविधा मिले. डीसी को अधिकार मिले कि वह अस्पतालों की जरूरतों के मुताबिक मैनपावर (पारा मेडिकल स्टाफ) लिये जाने की व्यवस्था करे.

18 वर्ष से अधिक लोगों के लिये टीकाकरण सेंटरों की संख्या बढ़ायी जाये. इससे अफरा तफरी नहीं मचेगी. बोकारो में ऑक्सीजन सिलेंडर के लिये रेगुलेटर और अन्य सामग्रियों की कमी को दूर करें. जिले के मेडिकल कॉलेज को जल्दी से जल्दी फाइनल किये जाने से डॉक्टर, पारा मेडिकल स्टाफ औऱ अन्य कर्मियों का संकट दूर होगा.

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ग्रामीण क्षेत्र में समस्य़ाएं बढ़ी हैः

मथुरा प्रसाद महतो सहित कई विधायकों ने चिंता जताते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में समस्य़ाएं बढ़ी हैं. प्रखंड स्तर के डॉक्टरों को जिला स्तर पर बुला लिया गया है, उन्हें वापस प्रखंडों में भेजा जाये. प्रखंडों में ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था हो ताकि जिला मुख्यालय पर लोड ना पड़े. उमाशंकर अकेला ने सदर अस्पताल, हजारीबाग में बदतर स्थिति का जिक्र किया. कहा कि टेक्निकली दक्ष अटेंडेंट को रखें. अस्पताल में व्याप्त मिसमैनेजमेंट को लेकर सुपरिटेंडेट, डीसी, सिविल सर्जन से भी कई बार कहा गया है पर सुधार नहीं है. ऑक्सीजन प्लांट सदर और दूसरे अस्पताल में लगे. सिटी स्कैन के मशीन की कमी को दूर किया जाये.

गर्भवती महिलाओं के लिये स्पेशल प्रोविजनः

नीरा यादव ने कहा कि दूसरी लहर के शुरूआती दौर में जो समस्याएं दिख रही थीं, वे अब कम हुई हैं. अब रिकवरी रेट बढ़ा है. जिले में डॉक्टर से ऑनलाइन सेवा की अधिक से अधिक व्यवस्था हो. प्राइवेट के लैब टेक्निशियन, डॉक्टरों का लाभ कोरोना जांच, वेंटिलेटर इंस्टॉलेशन में लिया जाये. गर्भवती महिलाओं को समस्या आ रही है. ऐसे समय में वे बेसहारा महसूस कर रही हैं. उनके लिये विशेष पहल हो. जिले के टास्क फोर्स को मजबूत करें. सिविल सर्जन प्रभार में हैं.

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रेगुलर किया जाये. ऑक्सीजन प्लांट लगाने में सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा जाये. विनोद सिंह ने ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना जांच का दायरा बढाये जाने की वकालत की. साथ ही कहा कि समय पर जांच और रिपोर्ट का मिलना जरूरी है. इसके कारण समस्या बढ़ रही.

आयुष्मान कार्ड के तहत भी ईलाज का प्रावधान श्रमिकों, गरीबों के लिये हो. अस्पतालों में कार्यरत अनुबंध कर्मियों का भुगतान 3-4 महीने से नहीं हुआ है. शव वाहन के अलावा कई एंबूलेंस यूं ही पड़े हैं. इसके लिये ड्राइवर की व्यवस्था हो. अनुमंडल में स्थाई एसडीओ हो. लोगों को एक माह का राशन नहीं मिल सका है. किसानों को धान बेचने पर भुगतान नहीं हुआ है. इन्हें ठीक किया जाये.

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ग्रामीण चिकित्सा कर्मियों का लें लाभः

अमर कुमार बाउरी ने कहा कि अभी के समय को देखते हुए ग्रामीण स्तर पर चिकित्सा सुविधा दे रहे लोगों के बारे में सकारात्मक स्तर पर सोचना चाहिये. उन्हें झोलाछाप कहा जाता है पर इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य कमियों को देखते हुए उनसे भी गांवों में राहत मिल रही है. वेदांता बोकारो में कोविड हॉस्पिटल बनाना चाह रहा. चंदन कियारी में ही वह इसके लिये पहल करे.

इससे जिला मुख्यालय पर भार कम पड़ेगा. अनिवार्य तौर पर लोगों को वैक्सीनेशन कराये जाने पर जोर दिया. साथ ही कोरोना पीडित और हैदराबाद में ईलाजरत विधायक इंद्रजीत महतो के बेहतर स्वास्थ्य लाभ के लिये सीएम को ध्यान देने की अपील की. पूर्णिमा नीरज सिंह ने पीएमसीएच में ऑक्सीजन प्लांट जल्दी से तैयार करने का आग्रह किया. साथ ही बेड की उपलब्धता के मामले में जिला प्रशासन से स्पष्ट सूचना जनप्रतिनिधियों को भी दिये जाने को कहा.

झरिया में 5 कोविड सेंटर में 38 डॉक्टर, 100 नर्सिंग स्टाफ के ही होने पर चिंता जतायी. फ्रंट लाइन वारियर के तौर पर 20 डॉक्टरों के जान गंवाने और इंश्योरेंस का लाभ नहीं मिल पाने का मसला भी उठाया. अस्पतालों में 2-3 दिन तक डॉक्टरों द्वारा मरीजों को नहीं देखने की भी शिकायत दर्ज की. बगैर रजिस्ट्रेशन के भी टीकाकरण करने का आग्रह किया. उनके अलावा अपर्णा सेन गुप्ता, ममता देवी, लंबोदर महतो, जेपी पटेल, मनीष जायसवाल, अंबा प्रसाद, अनूप जयमंगल सिंह और अन्य ने भी अहम सुझाव दिये.

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