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हो भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग, गृहमंत्री से मिले राज्य के प्रतिनिधि

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New Delhi: हो महासभा का एक प्रतिनिधिमंडल गुरूवार को केंद्रीय गृहमंत्री से दिल्ली में उनके कार्यालय में मिला. इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने हो भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की. साथ ही संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज एवं जानकारी भी दी. प्रतिनिधिमंडल से गृहमंत्री ने झारखंड, ओडिशा, बंगाल, असम और अन्य राज्यों के आदिवासी द्वारा बोली जाने वाली भाषा का वर्तमान स्थिति की जानकारी ली.  उन्होंने हो भाषा को 8वीं अनूसूची में शामिल होने के फायदों के बारे भी जानकारी ली. उन्होंने यह आशवस्त किया कि शुक्रवार को प्रधानमंत्री से वार्ता करेंगे और जानकारी देंगे. इसकी जानकारी देते हुए उपाध्यक्ष भूषण पाठ पिंगुवा ने कहा कि गृहमंत्री से मुकलात हुई है. इस दौरान उनके समक्ष हो भाषा समेत राज्य के अन्य भाषों की जानकारी दी गयी.

संसद मार्ग में किया था प्रदर्शन

इसके पूर्व महासभा की ओर से तीन और चार दिसंबर को संसद मार्ग में प्रदर्शन किया गया था. जिसमें बिहार, झारखंड, उड़ीसा, बंगाल के हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए थे. पिंगुवा ने कहा कि महासभा की ओर से आयोजित प्रदर्शन के बाद ही गृहमंत्री से मुलाकात संभव हो पायी. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के युवाओं में उत्साह देखा जा रहा है. ऐसे आयोजनों में युवा बढ़चढ़ कर शामिल हो रहे हैं.

मौके पर ये लोग थे उपस्थित

मौके पर केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धमेंद्र प्रधान, चम्पुवा के पूर्व विधायक धनुर्जय सिद्दु, सुरा बिरुली, भूषण पाट पिंगुवा, लक्ष्मीधर तियू, इपिल सामद, रवि बिरूली, विक्रम मुंडा, दश्मति चातार, सुरेन चातार एवं मनीष बिरूवा शामिल थे।

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