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आदिवासी संगठनों ने की कोचांग घटना की सीबीआइ जांच की वकालत

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  • राष्ट्रीय अनुसूचि जनजाति आयोग के अध्यक्ष नंद कुमार साइ के समक्ष आदिवासी संगठन गोलबंद
  • सामुदायिक जमीन को जबरन लैंड बैंक में शामिल कराया जा रहा है
  • पेशा कानून का हो रहा है उल्लंघन, सरकारी अफसर ग्रामसभा की कर रहे अनदेखी
  • पत्थलगड़ी को लेकर सरकार कर रही है दमनात्मक कार्रवाई
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Ranchi: प्रदेश के आदिवासी संगठनों ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष नंद कुमार साई के समक्ष खुलकर अपनी बातों को रखा. मंगलवार को होटल बीएनआर में आयोजित कार्यक्रम में आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि कोचांग दुष्कर्म की घटना का सीबीआई जांच होनी चाहिये. ग्रामीणों ने कहा कि खूंटी में हुए पत्थलगड़ी के मामले को सरकार दूसरा रंग देने की कोशिश में है. कहा, पत्थलगड़ी हमारी परंपरा है और हम अपने संवैधानिक अधिकारों को पत्थरों पर लिखने का काम कर रहे थे. लेकिन प्रशासन ने इसे दबाने के लिए कई तरह के हथकंडों का इस्तेमाल किया.

आदिवासियों पर प्रशासन ने गोली भी चलायी

पत्थलगड़ी को लेकर प्रशासन ने आदिवासियों पर गोली भी चलाई. निर्दोष ग्रामीणों को जेल में डाला गया. गर्भवती महिलाओं को मारा गया. कई गांवों के ग्रामप्रधानों को जेल में डाला गया. बाद में जिला प्रशासन ने स्कूलों और सामुदायिक भवनों में पुलिस पोस्ट बना दिया गया. इस पोस्ट में रहने वाले पुलिस कर्मियों द्वारा ग्रामीणों के साथ अमानवीय बर्ताव किया गया.

आयोग के अध्यक्ष को मांग पत्र भी सौंपा

ग्रामीणों ने कार्यक्रम के दौरान आयोग के अध्यक्ष को मांग पत्र भी सौंपा. मांग पत्र के जरीये कहा गया है कि पांचवीं अनुसूचि का पालन नहीं हो रहा है. पांचवीं अनुसूचित के क्षेत्रों के लिए बने कानून का सरकार द्वारा उल्लंघन किया जा रहा है. सामुदायिक जमीन को लैंड बैंक में जबरन शामिल किया जा रहा है. पेशा कानून के तहत राज्य में नियम नहीं बनाये गये हैं. सरकारी अफसरों द्वारा ग्राम सभा की अनदेखी की जा रही है.

एचइसी के विस्थापितों का भी मामला उठा

कार्यक्रम में एचइसी के विस्थापितों का भी मामला उठा. इसमें विस्थापितों ने जांच रिपोर्ट आयोग के अध्यक्ष के समक्ष रखी. लोहरा समाज को आरक्षण नहीं मिलने में हो रही परेशानियों से अवगत कराया गया.  आदिवासियों की जमीन पर भू माफिया द्वारा किये जा रहे कब्जे से भी अवगत कराया गया.

छात्रवृत्ति की राशि में कटौती का मामला

प्रतिनिधियों ने आदिवासी छात्रावास के खस्ताहाल एवं छात्रवृति के राशि में कि गयी कटौती की ओर भी आयोग के सदस्यों का ध्यान आकृष्ट कराया. संजय महली एवं अन्य के द्वारा 21 अप्रैल को हुए भारत बंद के दैरान छात्रों पर हुए मुकदमे एवं पुलिस जवानों द्वारा बालिका छात्रवास में घुसकर अपशब्द कहे जाने और छात्राओं की पिटायी के मामले को रखा. इस पर आयोग के अध्यक्ष नंद कुमार साइं ने राज्य के वरीय अफसरों के समक्ष इन मामलों को रखने की बात कही.

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