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छठी जेपीएससी मुख्य परीक्षा स्थगित करने को लेकर छात्रों ने किया प्रदर्शन, संशोधित रिजल्ट जारी करने की मांग

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Ranchi : 28 जनवरी से होनेवाली छठी जेपीएससी मुख्य परीक्षा स्थगित करने की मांग को लेकर शनिवार को सैकड़ों की संख्या में छात्रों ने जेपीएससी कार्यालय का घेराव किया. आंदोलन करनेवाले छात्रों की मांग है कि छठी जेपीएससी परीक्षा में आरक्षण का पालन नहीं किया गया है. प्रारंभिक परीक्षा होने के बाद विज्ञापन में इतनी छेड़छाड़ हुई है कि आज छात्रों का भविष्य अंधकार में है. छात्रों की मांग है कि तत्काल मुख्य परीक्षा पर रोक लगाते हुए पुनः संशोधित रिजल्ट निकाला जाये. आक्रोशित छात्रों का कहना है कि जेपीएससी के अधिकारियों ने सभी पदों को बेच दिया है. यही कारण है कि आनन-फानन में मुख्य परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी कर परीक्षा ली जा रही है, ताकि जेपीएससी  के अधिकारी उन पदों पर अपने लोगों को भर्ती कर दें. छात्रों ने घोषणा की है कि रविवार को साढ़े तीन बजे शहीद चौक पर छात्र एकत्रित होंगे और जेपीएससी के खिलाफ पुतला दहन और एडमिट कार्ड जलाकर अपना आक्रोश प्रकट करेंगे.

विवादों में है छठी जेपीएससी परीक्षा, विधानसभा में भी उठा है मुद्दा

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विदित हो छठी जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा शुरू से ही विवाद में फंसी हुई है. करीब 16 महीने पहले भी आरक्षण को लेकर छात्रों का आंदोलन हुआ था. लेकिन, मांग नहीं माने जाने के कारण छात्र लगातार आंदोलनरत हैं. शुक्रवार को बजट सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक सुखदेव भगत, जेएमएम विधायक कुणाल षाडंगी ने जेपीएससी मुद्दे को लेकर हंगामा किया था. जेएमएम विधायक ने कहा था कि सोमवार को इस मुद्दे पर विधानसभा में कार्य स्थगन प्रस्ताव लाया जायेगा. वहीं, सोमवार 21 जनवरी को हाई कोर्ट में भी छठी जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को लेकर सुनवाई होनी है. प्रारंभिक परीक्षा होने के बाद जहां पहली बार रिजल्ट निकला, तो करीब 5200 छात्र पास थे. फिर दूसरी बार निकाले गये रिजल्ट में लगभग 1000 और छात्रों को पास कर दिया गया. उसके बाद तीसरी बार करीब 36000 छात्रों को पास कर दिया गया था, जिससे ये छात्र नाराज चल रहे हैं.

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अमर बाउरी कमिटी रिपोर्ट की हो रही है अवहेलना

छात्रों का कहना है कि परीक्षा में आरक्षण नियम का पालन करने के लिए सरकार ने मंत्री अमर बाउरी की अध्यक्षता में छह सदस्यीय एक उच्चस्तरीय कमिटी बनायी गयी थी. समिति ने कई राज्यों का दौरा कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी, लेकिन आज तक वह रिपोर्ट सदन तक न आ पायी और न ही इसकी जानकारी किसी को दी गयी. छात्रों का कहना है कि यह रिपोर्ट छात्रों के पक्ष में थी, जिसे दबा दिया गया और सरकार ने कोर्ट को गुमराह कर रिजल्ट जारी कर 35 हजार को पास कर दिया.

अभ्यर्थियों ने दिये ये तर्क

  • जेपीएससी ने अपने विज्ञापन (Adv. No. -23/2016) के 12 नंबर प्वॉइंट में यह स्पष्ट कहा है कि प्रारंभिक परीक्षा के आधार पर कोटिवार रिक्तियों की संख्या के 15 गुणा उम्मीदवारों का मुख्य परीक्षा के लिए चयन (Shortlisting) किया जायेगा.
  • राज्य गठन होने के 18 साल में सिर्फ पांच जेपीएससी परीक्षा हुई है और सभी परीक्षा परिणाम से संबंधित मामले कोर्ट में लंबित हैं और सीबीआई जांच भी हो रही है. ठीक उसी तरह छठी जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में एक ही प्रारंभिक परीक्षा का तीन बार रिजल्ट जारी किया गया है. विज्ञापन के अनुसार आयोग 15 गुणा ही रिजल्ट जारी कर सकता है, लेकिन आयोग ने 106 गुणा रिजल्ट जारी कर दिया.
  • झारखंड सरकार ने संकल्प (5562, dt, 19-4-17) पारित कर प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को संशोधित करवा दिया. सरकार के संकल्प के अनुरूप 11 अगस्त 2017 को जेपीएससी ने दूसरी बार प्रारंभिक परीक्षा का अतिरिक्त रिजल्ट जारी किया.
  • दिनांक 24-1-2018 को कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग जेपीएससी को एक पत्र (पत्रांक 731 दिनांक 24-1-2018) जारी कर कहता है कि उसने ST, SC, OBC के वैसे अभ्यार्थी, जिन्होंने अवसर एवं उम्र सीमा का लाभ नहीं लिया, उन्हें आरक्षण प्रदान नहीं किया. उसने कोटिवार रिक्तियों के 15 गुणा उम्मीदवारों का चयन मुख्य परीक्षा के लिए नहीं किया तथा चूंकि आरक्षण के संबंध में कई मामले कोर्ट में लंबित हैं, इसलिए वह 29 जनवरी 2018 से होनेवाली मुख्य परीक्षा को स्थगित करे.
  • यह स्पष्ट है कि 29 जनवरी 2018 से होनेवाली मुख्य परीक्षा आरक्षण के नियम तथा 15 गुणा रिजल्ट की शर्तों का पालन न करने के कारण रोकी गयी थी, लेकिन मुख्य परीक्षा रोके जाने के बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग संकल्प (संख्या 1153 dt 12-2-2018) जारी कर कहता है कि संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता प्रारंभिक परीक्षा में जो भी अभ्यर्थी अपनी श्रेणी में निर्धारित न्यूनतम अर्हतांक प्राप्त किये हैं, उन्हें संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा 2016 की मुख्य परीक्षा के लिए चयनित समझा जायेगा. अतः 34,556 अभ्यर्थियों को पास कर दिया गया. परंतु, यहां जब 15 गुणा रिजल्ट और आरक्षण का प्रश्न हल ही नहीं हुआ, तो फिर क्यों 29 जनवरी 2018 से होनेवाली मुख्य परीक्षा को रोककर 15 गुणा रिजल्ट को बढ़ाकर 106 गुणा किया गया?
  • झारखंड उच्च न्यायालय ने Deb Kumar Versus State of Jharkhand & JPSC & Ors W.P.(S) No 1864 of 2017 में यह स्पष्ट आदेश दिया है कि जेपीएससी संशोधित रिजल्ट जारी करे. आदेश इस प्रकार है- “Para 11. In the circumstances, I hereby direct respondents – Jharkhand Public Service Commission to take steps for publication of amended result in terms of Notification. It is made clear that this is a serious issue as it relates to fate of thousands of aspirants who have appeared in the examination conducted by JPSC and as such it is expected that State as well as JPSC shall take immediate steps so that amended results, in terms of Judgment of the Hon’ble Apex Court and Notification issued by the State, may be published as early as possible, preferably within a period of six weeks from the date of receipt of a copy of this order.” लेकिन, जेपीएससी बार-बार अतिरिक्त रिजल्ट जारी कर रहा है और विज्ञापन के विरुद्ध 15 गुणा से अधिक 106 गुणा परिणाम जारी कर दिया.
  • सुप्रीम कोर्ट का यह स्पष्ट आदेश है कि परीक्षा की प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद बीच में विज्ञापन में कोई संशोधन नहीं लाया जा सकता है. अर्थात खेल के नियम बीच में बदले नहीं जा सकते हैं, लेकिन यहां सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना करती नजर आती है. (Civil Appeal Nos 4255-58 of 2014 Bishnu Biswas & Ors. Versus Union of India & Ors. & Civil Appeal Nos. 2634-36 of 2013 Tej Prakash Pathak & Ors. Versus Rajasthan High Court & Ors.) इसी को ध्यान में रखकर जब सरकार ने पूर्व में प्रकाशित विज्ञापन संख्या 1/2015 में बदलाव लाया, तब उसने छठी सिविल सेवा परीक्षा की अधियाचना को वापस ले लिया.

सरकार और जेपीएससी से की ये मांगें

  • छात्र नेता शशि पन्ना ने सरकार और जेपीएससी से मांग की है कि उपर्युक्त बिंदुओं के आलोक में झारखंड के सभी छात्र निवेदन करते हैं कि 28 जनवरी 2019 से होनेवाली छठी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा पर अविलंब रोक लगायी जाये.
  • झारखंड लोक सेवा आयोग छठी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का संशोधित परिणाम जारी किया जाये.
  • आरक्षण नीति का पालन करते हुए और विज्ञापन के अनुसार सिर्फ 15 गुणा रिजल्ट जारी किया जाये, इसके अलावा कोई भी अतिरिक्त रिजल्ट मंजूर नहीं होगा. किसी भी कीमत पर नियम के विरुद्ध 35 हज़ार रिजल्ट को नहीं माना जायेगा.
  • यदि यह संभव नहीं है, तो छठी जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को रद्द कर पुनः विज्ञापन निकालकर परीक्षा ली जाये.
  • यूपीएससी और अन्य राज्यों की तर्ज पर जेपीएससी में भी सभी चरणों पर आरक्षण दिया जाये.

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