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किसान सभा की मांग :  कृषि विधेयकों पर असहमति जताते हुए राज्य सरकार राष्ट्रपति को लिखे आग्रह पत्र

विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर ले राज्य सरकार निर्णय, संसदीय प्रणाली को बताया धत्ता

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Ranchi :  तीन कृषि विधेयक किसानों के लिए काला कानून हैं. पहले से ही राज्य की जमीन में निजी कंपनियों की आंख लगी हुई है. इन कानूनों के बाद राज्य के किसान अपनी जमीन से अधिकार खो देंगे. ऐसे में राज्य सरकार को चाहिये की राष्ट्रपति को इस संबध में असहमति जताते हुए पत्र लिखें.

उक्त बातें अखिल भारतीय किसान सभा के संयोजक महेंद्र पाठक ने कहीं. उन्होंने कहा कि तीनों विधेयकों के विरोध में मुख्यमंत्री विधानसभा का विशेष सत्र बुलायें. किसानों के कानूनों का विधानसभा से असहमति जताते हुए राष्ट्रपति से आग्रह किया जाये कि जल जंगल जमीन की रक्षा कर सकें.

महेंद्र ने कहा कि जिस तरह केंद्र सरकार ने तीनों कानून बगैर किसी बहस और मतदान के राज्यसभा में पास कराया, ये संसद को शर्मसार करने वाली प्रक्रिया है. संसदीय प्रणाली को धता बता दिया गया. उन्होंने कहा कि अगर ये तीनों विधेयक कानून बन जाते है तो किसानों का दुर्भाग्य होगा.

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भाजपा शासित प्रदेशों से नहीं ली गयी सहमति

पाठक ने कहा कि कानून बनने के बाद राज्य सरकारों को इसे लागू करना होगा. केंद्र सरकार ने अब तक इस पर किसी राज्य सरकार से सहमति नहीं ली है. इतना ही नहीं भाजपा शासित प्रदेशों से भी सहमति नहीं ली गयी है. अगर यह कानून समाप्त होता है तो किसानों के कई तरह के कानून समाप्त हो जायेंगे.

कांट्रैक्ट फार्मिंग शुरू होगी. न्यूनतम समर्थन मूल्य भी समाप्त हो जाएगा. आवश्यक वस्तु के दायरे आने वाले खाद्यान्नों की बड़ी कंपनियां जमाखोरी करने लगेगी. एक तो झारखंड में किसानों की खेती 5 एकड़ 2 एकड़ से भी कम है. वहीं सिंचाई आदि की भी व्यवस्था नहीं है. ऐस में किसानों के हित में जरूरी है, राज्य सरकार यह निर्णय ले.

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