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दिल्ली हाई कोर्ट ने हॉकी इंडिया को किया भंग, जानें क्यों

New Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर हॉकी इंडिया को भंग कर दिया है. दरअसल राष्ट्रीय खेल संहिता का उल्लंघन के मामले में दायर एक याचिका पर कोर्ट ने बुधवार को अपना फैसला सुनाया. दायर याचिका में कहा गया था कि हॉकी इंडिया ने आजीवन सदस्य, आजीवन अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पदों को सृजित करके खेल संहिता का उल्लंघन किया, क्योंकि नियमों के तहत इन पदों का सृजन नहीं किया जा सकता है.

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दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशानुसार तीन सदस्यीय कमिटी का गठन किया गया है जिसमें सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस अनिल दवे, पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एस वाई कुरैशी व हॉकी के दिग्गज खिलाड़ी और पूर्व कप्तान जफर इकबाल शामिल है. यह टीम हॉकी इंडिया के संविधान में बदलाव के पश्चात चुनाव कराएगी. चुनाव कराने में करीब पांच महीने का वक्त लग सकता है. साथ ही आजीवन सदस्यत की हैसियत से नरिंदर ध्रुव बत्रा के द्वारा जो भी सुविधाएं ली गई उसके एवज में खर्च हुए पैसे वसूलने का आदेश दिया है. जिससे संबंधित फाइल हॉकी इंडिया के नई कमिटी को सौंपने को कहा है.

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बता दें कि एडवोकेट वंशदीप डालमिया के जरिये दायर की गई याचिका में नरिंदर ध्रुव बत्रा की आजीवन सदस्यता और इलेना नोर्मन की सीईओ के रूप में नियुक्ति रद्द करने की मांग भी की गई थी.याचिका में कहा गया कि खेल संहिता और राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) के लिए आदर्श चुनाव दिशानिर्देशों के तहत किसी खास अवधि के लिए सात पदाधिकारियों और पांच अतिरिक्त सदस्यों को ही चुना जा सकता है और हॉकी इंडिया ने जो तीन पद सृजित किए हैं, वे इसके अनुरूप नहीं हैं.

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Sanjeevani

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