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JSAB और JSOB से मिली डिग्री मान्य नहीं, FIR दर्ज कराने की तैयारी में झारखंड सरकार

Ranchi: माध्यमिक शिक्षा विभाग (झारखंड सरकार) ने झारखंड स्टेट एकेडमिक बोर्ड (JSAB) और झारखंड स्टेट ओपन बोर्ड (JSOB) की भूमिका को संदिग्ध माना है. इसे देखते दोनों के खिलाफ एक्शन लेने की तैयारी में है. जल्द ही इन दोनों के खिलाफ अवैध तरीके से स्टूडेंट्स को डिग्रियां दिये जाने को लेकर प्राथमिकी दर्ज की जायेगी. निदेशालय ने इस संबंध में सभी स्टुडेंट्स और अन्य लोगों से सावधानी बरतने को कहा है. माध्यमिक शिक्षा निदेशक सुनील कुमार के मुताबिक झारखंड स्टेट ओपन बोर्ड और झारखंड स्टेट एकेडमिक बोर्ड फर्जी संस्थान हैं. इनके द्वारा प्रदत्त डिग्री किसी भी नियोजन के लिये लिये वैध और वांछनीय नहीं है.

 

केंद्र ने भी माना है अवैध

माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के मुताबिक JSOB और JSAB को मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने मान्यता नहीं दी है. राज्य सरकार (झारखंड) के स्तर से भी किसी तरह की मान्यता नहीं मिली है. बावजूद इसके दोनों संस्थाओं की ओर से फर्जी तरीके से स्टूडेंट्स को मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट की परीक्षा आयोजित कर रिजल्ट जारी किया जा रहा है. साथ ही डिग्री प्रदान की जा रही है. सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी संस्थाओं के मामले (एसएलपी सं-8148 2020 साहिर सोहेल एवं अन्य बनाम डॉ एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी यूनिवर्सिटी, यूपी एवं अन्य के मामले) में 7 सितंबर 2020 को एक आदेश पारित करते इन दोनों फर्जी संस्थानों की वेबसाइट बंद करने और संस्थान संचालकों के खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई करने का आदेश दिया था. ऐसे में अब दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की तैयारी की जा रही है.

 

अब भी जारी है गोरखधंधा

Sanjeevani

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (झारखंड) के मुताबिक झारखंड में स्कूली स्तर की सभी परीक्षाओं (मैट्रिक, इंटर, मदरसा एवं संस्कृत स्कूल) के आयोजन हेतु झारखंड अधिविद्य परिषद एक्ट 2002 के तहत ही मात्र एक परीक्षा आयोजक संस्थान झारखंड अधिविद्य परिषद, रांची संचालित है. इसके अलावा राज्य सरकार से इन परीक्षाओं के संचालन करने हेतु अन्य परीक्षा बोर्ड अथवा किसी परिषद् को राज्य सरकार ने मान्यता नहीं दी है. वर्तमान में JSOB और JSAB द्वारा फर्जी तरीके से स्टूडेंट्स को मैट्रिक एवं इंटर का सर्टिफिकेट दिया जा रहा है. विभिन्न सरकारी संस्थानों में नियोजन के क्रम में इनके प्रमाण पत्र की वैधता स्पष्ट करने को विभाग को चिट्ठी भेजी जा रही है. इसे देखते अब दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किये जाने की तैयारी है.

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