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लातेहार में सूकर शेड निर्माण की 28 योजनाओं में कुल 41.95 लाख रुपये का हुआ गबन :  जेम्स हेरेंज

जो परिवार नहीं पालते हैं सूकर, योजना उनके नाम पर शुरू कर राशि का किया जा रहा गबन

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Ranchi  : मनरेगा में मची लूट को लेकर कई मामले समाने आते रहे हैं. लातेहार सूकर शेड का मॉडल प्राक्कलन 62,750 रुपये राज्य भर के लिए है, लेकिन लातेहार में सूकर शेड के लिए निर्धारित मॉडल प्राक्कलन को दरकिनार करते हुए दो लाख 62 हजार रुपये की योजना को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी गयी. यह राशि राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रशासनिक स्वीकृति राशि से भी दोगुनी है. रांची के अशोक नगर स्थित होटल जलसा इन में मंगलवार को झारखंड मनरेगा वॉच द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस की गयी, जिसमें राज्स में मनरेगा योजनाओं में सरकारी राशि के गबन के मामले को सामने लाया गया.

मनरेगा लूट का मामला लातेहार जिला के मनिका प्रखंड की बड़काडीह पंचायत में शेड निर्माण का है. प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मनरेगा वॉच के जेम्स हेरेंज ने बताया कि स्थलीय जांच रिपोर्ट के अनुसार मनरेगा से निर्माणाधीन कुल 28 शेड की योजनाओं में कुल 41 लाख 95 हजार 220 रुपये सरकारी राशि का गबन किया गया है. इसमें सात लाख 52 हजार 856 रुपये मजदूर मद एवं 34 लाख 42 हजार 364 रुपये सामग्री मद की राशि सम्मिलित है. हेरेंज ने बताया कि दो योजनाएं ऐसी हैं. जो धरातल पर हैं ही नहीं, लेकिन उसकी राशि भी मजदूरी एवं सामग्री मद में निकासी कर ली गयी है. सूकर शेड गैरकानूनी तरीके से बगैर ग्रामसभा एवं पंचायत कार्यकारिणी समिति द्वारा पारित किये ठेकेदारों एवं प्रखंडकर्मियों की मिलीभगत से मिलकर प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति प्रदान की गयी, जबकि झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग ने सूकर शेड का मॉडल प्राक्कलन 62,750 रुपये ही पूरे राज्य के लिए निर्धारित किया है.

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जिला प्रशासन को है जानकारी, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं

जेम्स हेरेंज ने बताया कि तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी शंकराचार्य समद ने राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मॉडल प्राक्कलन को दरकिनार करते हुए दो लाख 62 हजार की योजना को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की. लाभुकों द्वारा दिये गये बयान के अनुसार ऐसी योजनाएं, जिनमें दीवार का कार्य पूर्ण किया जा चुका है, उनमें अधिकतम 10 मजदूरों ने एक सप्ताह कार्य किया था. इसका मतलब यह हुआ कि मजदूरी मद में मात्र 10,080 रुपये ही वास्तविक खर्च हुए हैं. योजनाओं के मस्टर रॉल वास्तविक मनरेगा श्रमिकों का नहीं करके फर्जी मजदूरों के नाम से जुलाई से अक्टूबर 2017 में संधारित किया गया है. जबकि, इस मौसम में सभी मजदूर अपने कृषि कार्यों में व्यस्त रहते हैं. जिला प्रशासन को पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है.

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कांग्रेस ने बनाया था कानून, इसलिए भाजपा सरकार चुपचाप देख रही लूट का तमाशा : प्रो ज्यां द्रेज

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रो. ज्यां द्रेज ने कहा कि राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना की सरकार द्वारा लगातार समीक्षा व निगरानी की जा रही है, जो योजना लागू करने के लिए जरूरी भी है. यह योजना केंद्र सरकार की प्राथमिकता में है, लेकिन इसकी तुलना में मनरेगा की निगरानी व मॉनिटरिंग नहीं हो रही है, क्योंकि यह कांग्रेस सरकार द्वारा बनाया गया कानून था. उन्होंने कहा कि इसलिए मनरेगा में लूट मची हुई है और भाजपा सरकार चुपचाप बैठे तमाशा देख रही है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में भोजन का अधिकार अभियान के राज्य संयोजक अशर्फीनंद प्रसाद, जिला परिषद सदस्य जारी सरोज हेंब्रोम, झारखंड मनरेगा वॉच से मिथिलेश कुमार सहित कई लोग मौजूद थे.

SP Deoghar

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