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#Deepawali: जानें क्यों मनाते हैं रोशनी का पर्व दीवाली, क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त

NewsWing Desk:  हिन्दू पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दीपावली का त्योहार मनाया जाता है.  इस वर्ष हिन्दूओं के बड़े त्योहारों में से एक दीपावली 27 अक्टूबर (रविवार) को मनायी जा रही है. दीपावली की धूम पूरे देश में देखने को मिलती है. इसे रोशनी और दीपों का पर्व भी कहा जाता है. दरअसल, दीवाली के दिन लोग अपने घरों को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाते हैं. और घर में पूजा के बाद दीये जलाते हैं.

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क्यों मनायी जाती है दीवाली

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दीवाली का इंतजार हर बड़े-छोटे को रहता है. यह त्योहार पांच दिनों तक चलता है. दीपावली का यह त्योहार धनतेरस से शुरू होकर नरक चतुर्दशी, दिवाली, गोवर्धन पूजा के बाद भाई दूज तक चलता है.

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माना जाता है कि भगवान राम लंकापति रावण का वध कर अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 सालों का वनवास पूरा कर कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को अयोध्या वापस लौटे थे और उनके स्वागत में पूरे अयोध्या वासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था. तभी से दीपों का त्योहार दीपावली मनाया जाने लगा.

मान्यता ये भी है कि इसी दिन समुद्र मंथन से धन की देवी लक्ष्मी की उत्पत्ति हुई थी. इसलिए दीवाली वाले दिन माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. दिवाली के दिन लोग मां लक्ष्मी को अपने घर बुलाने के लिए शाम को अपने घरों को दीपक, लाइट्स और रंगोली से सजाते हैं.

हालांकि, दीवाली की तैयारी कई दिनों पहले से शुरू हो जाती है. लोग अपने घरों की साफ-सफाई, रंग-पुताई में काफी पहले से जुट जाते हैं. दीवाली वाले दिन घर को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाते हैं. शाम को दीये जलाकर अपने घर को रोशन करते हैं.

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लक्ष्‍मी पूजन का शुभ मुहूर्त

कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दीवाली मनायी जाती है. और माता लक्ष्मी की पूजा होती है. अमावस्‍या तिथि की शुरूआत 27 अक्‍टूबर 2019 को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से हो रही है. जो 28 अक्‍टूबर 2019 को सुबह 09 बजकर 08 मिनट तक है. और लक्ष्‍मी पूजा का मुहूर्त  27 अक्‍टूबर 2019 को शाम 06 बजकर 42 मिनट से रात 08 बजकर 12 मिनट तक है.

इस बीच ही घर में माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करें. धनतेरस के दिन माता लक्ष्‍मी और भगवान गणेश की नई मूर्ति खरीदकर दीपावली की रात उसका पूजन किया जाता है.

लक्ष्मी जी को वस्त्र (लाल कपड़ा) सप्तधान्य, गुलाल, लौंग, अगरबत्ती, हल्दी, अर्घ्य पात्र, फूलों की माला और खुले फूल अर्पित करें. विधि-विधान से माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करें.

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