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डिक्लेयरेशन ऑफ फ्रेंडशिप को भारतीय धर्मगुरुओं का समर्थन, 2020 में होगा सम्मेलन

भारत के कई प्रतिष्ठित धर्मगुरू एलिजा बोर्ड ऑफ वर्ल्ड रिलिजियस लीडर्स के सदस्य हैं

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 London : घृणा और असहिष्णुता का मुकाबला करके दुनिया में शांति लाने के लिए मित्रता की घोषणा (डिक्लेयरेशन ऑफ फ्रेंडशिप) की नयी अवधारणा का भारत के धर्मगुरूओं ने भी समर्थन किया है. हेग स्थित पीस पैलेस, कार्नेगी फाउंडेशन और एलिजा इंटरफेथ इंस्टीट्यूट ने घोषणापत्र की रूपरेखा तैयार की. एक आधिकारिक बयान के अनुसार दुनियाभर से हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध, सिख, ईसाई और यहूदी समेत विविध धर्मों के प्रतिष्ठित नेता जून 2020 में पीस पैलेस में आयोजित एक बड़े सम्मेलन में दस्तावेज पर दस्तखत करेंगे. बयान में कहा गया कि घोषणापत्र का उद्देश्य विविध धर्मों के सदस्यों के बीच दोस्ती को बढ़ावा देकर विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच विभाजन, नफरत और असहिष्णुता का मुकाबला करना है.

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भारत सरकार इस शांति की पहल के लिए सहयोग कर रही है

पीस पैलेस के निदेशक एरिक डि बैड ने कहा, हम बहुत आभारी हैं कि भारत सरकार भी इस शांति की पहल को यथासंभव व्यापक और समावेशी बनाने के लिए हमारे साथ सहयोग कर रही है. उन्होंने घोषणापत्र का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया को जटिल बताते हुए कहा कि इसमें एलिजा इंटरफेथ इंस्टीट्यूट, एम्सटर्डम में वीयू विश्वविद्यालय और कार्नेगी फाउंडेशन एवं अन्य संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा समर्थन वाली संवाद प्रक्रिया शामिल रही. एलिजा इंटरफेथ इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ एलन गोशेन गॉटस्टीन ने कहा कि भारत के कई प्रतिष्ठित धर्मगुरू एलिजा बोर्ड ऑफ वर्ल्ड रिलिजियस लीडर्स के सदस्य हैं.उन्होंने कहा कि इनमें श्रीश्री रविशंकर, अम्मा अमृतानंदमयी, योगगुरू स्वामी रामदेव, स्वामी चिदानंद (मुनिजी) आदि शामिल हैं.

 

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