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अयोध्या में विवादित ढांचा को गिराए जाने के मामले में फैसला 30 सितंबर को

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Lucknow : अयोध्या में विवादित ढांचे को गिराए जाने के मामले में 30 सितंबर को फैसला आने की उम्मीद है. मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत इस दिन अपना फैसला सुना सकती है. गौरतलब है कि अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा विध्वंस किया गया था. घटना के 28 साल के बाद इस मामले में फैसला आ रहा है. इस मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित 32 अभियुक्तों के भाग्य का फैसला होगा.

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17 आरोपियों की हुई मौत

इस बहुचर्चित मामले में अलग अलग तारीखों पर कुल 49 प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. बाद में केस की जांच सीबीआई के हाथों सौंपी गयी. सीबीआई ने मामले की जांच के बाद 4 अक्टूबर 1993 को 40 अभियुक्तों के खिलाफ पहला आरोपपत्र दाखिल किया. तकरीबन ढाई साल बाद 9 अन्य अभियुक्तों के खिलाफ 10 जनवरी 1996 को एक और अतिरिक्त आरोपपत्र दाखिल किया गया. सीबीआई ने कुल 49 अभियुक्तों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया. इस मामले में सुनवाई के दौरान 28 साल में 17 आरोपियों की मृत्यु हो गई.

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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार 30 सितंबर को इस मामले में फैसला सुनाने के लिए अंतिम तारीख तय की गयी है. इससे पूर्व अलग अलग कारणों से यह मामला लंबा खिंचता गया था.

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6 दिसंबर 1992 को दर्ज हुई थी पहली प्राथमिकी

विवादित ढांचे को गिराये जाने के मामले में पहली प्राथमिकी घटना के ही दिन 6 दिसंबर 1992 को श्रीराम जन्मभूमि सदर फैजाबाद पुलिस थाने के थानाध्यक्ष प्रियंबदा नाथ शुक्ल ने दर्ज कराया था. इसके बाद दूसरी प्राथमिकी भी राम जन्मभूमि पुलिस चौकी के प्रभारी गंगा प्रसाद तिवारी की थी. फिर अलग अलग तारीखों पर कुल 49 प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. बाद में केस की जांच सीबीआई के हाथों सौंपी गयी.

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