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गलत प्रमाण पत्र देकर पार्षद बननेवालों के भाग्य का फैसला अब नगर विकास विभाग करेगा

राज्य निर्वाचन आयोग से सिर्फ राय लेगी सरकार

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Ranchi: राज्य के स्थानीय निकायों, नगर निगम, नगर परिषद में गलत प्रमाण पत्र देकर जन प्रतिनिधि बननेवालों के भाग्य का फैसला अब नगर विकास विभाग की तरफ से किया जायेगा. सरकार की तरफ से इस संबंध में झारखंड नगरपालिका निर्वाचन एवं चुनाव याचिका (संसोधन) नियमावली-2018 पारित किया गया है. यह संशोधन झारखंड नगरपालिका अधिनियम-2011 के नियमों में बदलाव से संबंधित है. पुराने नियम को समाप्त करते हुए राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारों को सीमित कर दिया गया है. ऐसे मामलों पर विभाग का निर्णय ही अंतिम और मान्य होगा.

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जानबूझ कर गलत सूचना देनेवालों पर विभाग के स्तर पर होगी

कार्रवाई

जानबूझ कर स्थानीय निकायों में जन प्रतिनिधि का नामांकन पत्र भरते समय गलत सूचना देनेवाले अब सरकार की नजर में नहीं बच पायेंगे. अब उम्मीदवारों के दस्तावेजों को संभाल कर भी रखे जायेंगे. सरकार की तरफ से यह स्पष्ट किया गया है कि, ऐसा पाया गया है कि कई बार निर्वाचित जन प्रतिनिधि द्वारा नामांकन पत्र और शपथ पत्र में गलत जाति, वर्ग संबंधी प्रमाण पत्र दिया जाता है, जो तथ्यों से परे रहता है. ऐसी सूचना को जानबूझ कर दी गयी सूचना माना जायेगा. ऐसे जन प्रतिनिधि यदि चुनाव में निर्वाचित हो जाते हैं, तो अब उनकी सुनवाई राज्य निर्वाचन आयोग के जरिये नहीं होगी. इनके सभी मामलों पर नगर विकास और आवास विभाग की तरफ से सुनवाई की जायेगी.

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निर्वाचित सदस्यों की अयोग्यता पर विभाग का फैसला अंतिम होगा

स्थानीय निकायों के निर्वाचित सदस्यों की अयोग्यता पर विभाग का फैसला अंतिम माना जायेगा. सदस्यों के नामांकन के समय दिये गये दस्तावेजों की जांच और अन्य मामलों की सुनवाई अयोग्यता (निरर्हरता) के आधार पर की जायेगी.  सरकार निरर्हता मामले में निर्वाचन आयोग से सिर्फ राय लेगी. पूर्व में ऐसे मामलों पर राज्य निर्वाचन आयोग को व्यवहार न्यायालय के तहत शक्तियां दी गयी थीं. जिससे अयोग्यता से संबंधित सुनवाई की जाती थी. विभाग शिकायती मामले के हर बिंदू पर समीक्षा कर अपना निर्णय लेगा. झारखंड नगर पालिका निर्वाचन और चुनाव याचिका नियमावली के  नियम को विलोपित कर दिया गया है. सरकार की तरफ से इस संबंध में मंत्रिमंडल की बैठक में भी स्वीकृति ले ली गयी है.

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