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#Economy : भारतीयों पर कर्ज का बोझ 7 साल में हुआ दोगुना, NPA के मामले भी बढ़े

New Delhi: आर्थिक सुस्ती के कारण देश में नौकरियों का संकट तो बना ही है, भारतीयों पर कर्ज को बोझ भी दोगुना हो गया है. बीते सात सालों में हर भारतीय पर ऋण का बोझ करीब दोगुना हो गया है.

वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने मंगलवार को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2012 में प्रत्येक नागरिक पर औसतन 37,802 रुपये का कर्ज था, जो वित्त वर्ष 2019 में बढ़कर 73,637 रुपये हो गया है.

क्यों हुआ ऐसा

ठाकुर ने कहा कि सरकार और बैंकों की ओर से क्रेडिट ग्रोथ बढ़ाने को लेकर किये गये उपायों के चलते ऐसा हुआ है.

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि आंशिक ऋण गारंटी स्कीम, वन टाइम रिस्ट्रक्चरिंग स्कीम समेत कई योजनाओं के चलते लोन की ग्रोथ बढ़ी है.

इसके अलावा 45 लाख रुपये तक के घर की खरीद पर लिये गये लोन के ब्याज में छूट की स्कीम से भी ऋण लेने में इजाफा हुआ है.

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एनपीए के मामले भी बढ़े

हालांकि इस स्थिति के चलते एक तरफ बैंकों के कारोबार में विस्तार हुआ है तो दूसरी तरफ एनपीए के मामले भी तेजी से बढ़े हैं.

आरबीआइ के मुताबिक नियमों से परे जाकर लोन देने, विलफुल डिफॉल्ट, लोन फ्रॉड, भ्रष्टाचार और आर्थिक सुस्ती के चलते एनपीए के मामले लगातार बढ़े हैं.

2015 में बैंकों की ओर से शुरू किये गये एसेट्स क्वॉलिटी रिव्यू के चलते एनपीए के मामले बड़ी संख्या में उजागर हुए हैं.

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बढ़ सकता है एनपीए

आर्थिक जानकारों का कहना है कि जिस तरह से बीते कुछ सालों में कर्ज बढ़ा है और आर्थिक ग्रोथ कम हुई है, उससे एनपीए के मामले आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं.

अब तक कॉरपोरेट लोन के मामलों में ही एनपीए की स्थिति थी, लेकिन आर्थिक अनिश्चितता के चलते छोटे कर्जों के फंसने का भी खतरा पैदा हो गया है.

गौरतलब है कि सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी तीन लाख रुपये तक के लोन की सुविधा किसानों को दी है. ऐसे में आने वाले दिनों भारतीयों पर कर्ज के इस औसत में और अधिक वृद्धि देखने को मिल सकती है.

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