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राशि आवंटन होने के बावजूद डीडीसी लातेहार नहीं कर रहे मृतक मनरेगा मजदूरों के आश्रितों को भुगतान

मनरेगा मजदूरो की मौत पर मुआवजा देने का झारखंड सरकार ने 2011 में लिया है संकल्प

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Pravin kumar

Ranchi: राज्य में मनरेगा योजना में घोटले के कई मामले समाने आते रहे हैं. लेकिन मनरेगा मजदूरो की असामयिक मृत्यु पर मुआवजा का प्रावधान होते हुए भी मुआवजा नहीं मिलना, सरकारी अधिकारीयों की श्रमिकों के प्रति संवेदनहीनता को दर्शता है. मामला लातेहार जिला का है. यहां मनरेगा मजदूर पंकज कुजूर और मिखाएल हेम्ब्रम की असामयिक मृत्यु के बाद डीडीसी लातेहार के द्वारा आश्रितों को अनुग्रह राशि नही दी जा रही है.

क्या है मामला

लातेहार जिला के मनिका प्रखंड के मनरेगा मजदूर पंकज कुजूर की हत्या फरवरी 2018 में कर दी गयी थी. वहीं, जिले के बरबडीह प्रखंड के मिखाएल हेम्ब्रम की मौत मनरेगा योजना के तहत कुआ निर्माण के दैरान कुंआ में गिरने से हो गयी थी. यह हादसा मई 2018 में हुआ था. इन दोनो मनरेगा मजदूरों के आश्रितों को आजतक राज्य सरकार के द्वारा लिये गये संकल्प की राशि का भूगतान नही किया गया है. जबकि इस संबंध में पंकज कुजूर की आश्रित चिंता देवी एवं मिखाएल हेम्ब्रम की आश्रित जुलिया बागे की ओर से जिला स्तर पर कई बार पत्रचार भी किया जा चुका है.

पंकज कुजूर के आश्रित के लिए आवंटित राशि का विभागीय पत्र.

क्या है मनरेगा मजदूरों की मौत पर राज्य सरकार का संकल्प

झारखंड सरकार की ओर से मनरेगा श्रमिकों की मौत को लेकर 2011 में संकल्प लिया गया था. इसके अनुसार अगर किसी मनरेगा मजदूर ने 15 दिन भी कार्य किया है और उसकी असामयिक मौत हुई है, तो उसके आश्रित को अनुग्रह राशि का भुगतान किया जाना है. इसके तहत स्वभाविक मृत्यु पर 30000 मुआवजा एवं आकस्मिक मृत्यु पर 75000 मुआवजा आश्रितों को देने का संकल्प लिया गया है. लेकिन इन दोनों मृतक मजदूरों के आश्रितों के द्वारा मांग किये जाने के बावजूद राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है.

पंकज कुजूर की अनुग्रह राशि जिले को भेजी जा चुकी है 

पंकज कुजूर की आश्रित चिंता देवी को अनुग्रह राशि देने के लिए जिला को आवंटन आदेश संख्या एन 03आ दिनांक 14 जून, 2018 के माध्यम से 75000 की राशि दी जा चुकी है. आश्रित को भुगतान नही होने के कारण जिले के द्वारा उपयोगिता प्रमाण पत्र विभाग को उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है. डीडीसी लातेहार सह जिला कार्यक्रम समन्वयक की ओर से मनरेगा श्रमिक स्व. मिखाएल हेम्ब्रम के आश्रित के द्वारा राशि की मांग के बाद भी विभाग को प्रस्ताव नहीं भेजा गया है. मिखाएल हेम्ब्रम की आश्रित जुलिसा बागे के द्वारा जिला से  अनुग्रह राशि की मांग की जा चुकी है.

क्या कहते हैं राज्य संयोजक नरेगा वॉच जेम्स हेरेंज 

सरकारी अधिकारियों का रवैया श्रमिकों के प्रति असंवेदनशील है. जिले के दो श्रमिकों के आश्रितों द्वारा अनुग्रह राशि की मांग करने के बाद भी डीडीसी लातेहार के द्वारा मुआवजा राशि का अब तक भुगतान नहीं किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है. अधिकारी के रवैये से राज्य सरकार के संकल्प की भी धज्जियां उड़ रहा हैं. मनरेगा श्रमिकों की आकस्मिक मृत्यु पर सरकार की ओर से मुआवजा देने का प्रावधान है.

क्या कहते हैं जिम्मेवार

इस बारे में डीडीसी ने कहा कि मामले को मैं देखती हूं. पूछे जाने पर कहा कि अभी तक मामले की जानकारी उनको नहीं है. जानकारी लेकर तुरंत कार्यवाही की जायेगी.

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