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रांची के नगड़ी प्रखंड में डीबीटी योजना वापस, अब पूर्व की भांति बंटेगा राशन

राज्य सरकार के अनुरोध को केंद्र ने माना

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Ranchi/Delhi: राजधानी रांची के नगड़ी प्रखंड में मॉडल के रुप में शुरु की गई डीबीटी योजना वापस ले ली गई है. राज्य सरकार ने इसे बंद करने को लेकर केन्द्र से अनुरोध किया था, जिसे केन्द्र सरकार ने मान लिया है.

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शुरु से विवादों में रही डीबीटी योजना

नगड़ी में शुरु की गई डीबीटी योजना शुरु से विवादों में रही. अक्टूबर 2017 में अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज की अगुवाई में नगड़ी में सर्वे किया गया, इसमें 92 फीसदी लोगों ने कहा कि वे डीबीटी योजना को वापस लिए जाने के पक्ष में हैं. कई लोगों ने शिकायत की कि डीबीटी के तहत मिलने वाले पैसे नके खाते में जमा नहीं हो रहे. कई परिवारों ने आरोप लगाया था कि उन्हें बैंक से राशि निकलवाने के लिए चार-चार बार बैंक जाना पड़ता है.

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बुजुर्गों को बैंक की लाइन में खड़े होने में परेशानी

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कई लोगों ने कहा कि उन्हे बैंक में लाइन लगाकर पैसे निकालने में भारी परेशानी होती है. सर्वे में शामिल औसतन ग्रामीणों आरोप लगाया था कि पिछले चार महीने में डीबीटी की चार किश्तों में केवल दो ही किश्त मिल पाये हैं. ज्यादातर ग्रामीणों को डीबीटी राशि लाने के लिए साढ़े चार किलोमीटर की दूरी तय करने पड़ते हैं और इस दौरान उन्हें 15 घंटे का वक्त लगता है. उनका ज्यादातर वक्त प्रज्ञा केंद्र, राशन दुकानों और बैंकों में भटकना पड़ता है. कई ग्रामीणों का आरोप है कि कि डीबीटी का पैसा आया है कि नहीं और अगर आया तो किस खाते में है.

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भूखमरी से हुई मौतों को लेकर भी उठा विवाद

राज्य में कथित तौर पर भूखमरी से हुई मौतों की वजह भी डीबीटी को ही बताया गया. विपक्ष का आरोप है कि जनवितरण प्रणाली की दुकानों से अनाज लेने वाले लोग गरीब तबके से हैं. ज्यादातर लोग बहुत पढ़े लिखे भी नहीं हैं. ऐसे में कभी अंगूठे का निशान नहीं मिलता, तो कभी बैंकों में लिखा-पढ़ी का चक्कर..ज्यादातर लोग पहले की तरह सीधे पैसे देकर अनाज लेने के पक्ष में दिखे.

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