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राफेल डील : दैसॉ एविएशन ने कहा, हम पाक-साफ, जांच को तैयार, रिलायंस को सिर्फ 850 करोड़ के ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट

रिलायंस डिफेंस के जॉइंट वेंचर को 30 हजार करोड़ रुपये के ऑफसेट्स दिये जाने का आरोप गलत 

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paris : राफेल डील को लेकर दैसॉ एविएशन किसी भी तरह की जांच कराने को तैयार है. यह बात दैसॉ एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने कही है.  एरिक ट्रैपियर ने कहा कि  रिलायंस ग्रुप के साथ साल 2012 से उनकी कंपनी दैसॉ एविएशन का रिश्ता है. हम राफेल डील में किसी भी जांच को तैयार है. इस क्रम में कंपनी के सीईओ ने दावा किया कि इस डील में कोई भी करप्शन नहीं हुआ है. कहा कि भारत या फ्रांस में कोई भी जांच होने पर यह बात वह साबित कर देंगे.  बता दें कि ट्रैपियर ने इकनॉमिक टाइम्स को दिये अपने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा कि एनडीए सरकार ने जिस रेट पर डील की, वह उस कीमत से 9 प्रतिशत कम है, जिस पर 2014 से पहले चर्चा की गयी थी.  कहा कि रिलायंस डिफेंस को इस डील के लिए केवल 850 करोड़ रुपये के ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट मिलेंगे. बताया कि अंबानी फैमिली के साथ दैसॉ की बातचीत  2012 से होती रही है.  बता दें कि वे उस अग्रीमेंट का जिक्र कर रहे थे, जो दैसॉ ने 126 लड़ाकू विमानों की पहली वाली डील में ऑफसेट दायित्व पूरे करने के लिए मुकेश अंबानी ग्रुप के साथ किया था.  

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  दसॉ कंपनी ने ऑफसेट्स के लिए 30 कंपनियों के साथ करार कर लिया है

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इस क्रम में ट्रैपियर ने कहा कि रिलायंस के साथ हमारी पार्टनरशिप है, इसकी शुरुआत 2011 में हुई;  कंपनी के अनुसार रिलायंस कंपनी को फसिलिटीज देने और इस देश के बारे में बताने में सक्षम लगी, क्योंकि भारत में कारखाना लगाना इतना आसान नहीं होता. दसॉ के साथ रिलायंस डिफेंस के जॉइंट वेंचर को 30 हजार करोड़ रुपये के ऑफसेट्स दिये जाने के आरोप पर ट्रैपियर ने कहा कि यह आंकड़ा गलत है और इस कंपनी के लिए 850 करोड़ रुपये के काम की योजना बनाई गयी है. उन्होंने कहा, अभी इस जेवी में हमने 70 करोड़ रुपये का कैपिटल इन्वेस्टमेंट किया है.  जेवी में 51 प्रतिशत हिस्सा रिलायंस का है, लिहाजा मैंने इस 70 करोड़ का 9 प्रतिशत निवेश किया है.  काम करने के साथ धीरे-धीरे इस जेवी में हम पूंजी बढ़ाते जायेंगे.  योजना इस आंकड़े को 850 करोड़ रुपये तक ले जाने की है. 

इसका मतलब पांच साल में इस 850 करोड़ रुपये में कंपनी का निवेश इसके 49 प्रतिशत के बराबर होगा.  यानी लगभग 425 करोड़ रुपये. ट्रैपियर ने कहा कि दसॉ कंपनी ने ऑफसेट्स के लिए 30 कंपनियों के साथ करार कर लिया है.  इन आरोपों को खारिज किया कि भारतीय पक्ष ने उन पर ऑफसेट वर्क रिलायंस को देने के लिए कहा था.  कहा कि फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के विवादित बयान पर स्पष्टीकरण आ चुका है.  ट्रैपियर ने कहा,ओलांद ने यह कहते हुए खुद साफ किया है कि दोनों पार्टनर्स ने खुद एक-दूसरे को चुना है.   

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