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दंगल #Twitter काः लोग क्यों कह रहे हैं #PMCaresFund_का_हिसाब_दो

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NewsWing Desk : यहां आपको ऐसे-ऐसे वीडियो, फोटो या मीम्स मिलेंगे कि कभी आप मायूस होंगे तो कभी आप खुद को मुस्कुराने से रोक नहीं पायेंगे. हंसते-हंसते लोट-पोट भी हो सकते हैं.

देश-दुनिया और हमारे आसपास क्या कुछ चल रहा होता है. हम न्यूज पोर्टल, टीवी और अखबार के माध्यम से जान जाते हैं. पर Twitter पर क्या चल रहा है. 9 मई को #Twitter पर लोग प्रधानमंत्री से हिसाब मांग रहे हैं. वह भी विवादस्पद पीएम केयर फंड का. इसके लिए 8 मई की रात ही एक हैशटैग #PMCaresFund_का_हिसाब_दो चल रहा है. इंडिया ट्रेंड में यह पहले नंबर पर है. शाम 5.30 बजे तक इस हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए 1.14 लाख  लोगों ने प्रधानमंत्री से हिसाब मांग दिया है. मतलब 1.14 लोगों ने ट्विट किया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार देश के बहुत बड़े तबके के निशाने पर हैं. ट्विटर पर लगातार दूसरे दिन वह यूजर्स के निशाने पर हैं. पहले ट्विटर पर उनके खिलाफ चलने वाला अभियान घंटे-दो घंटे में औंधे मुंह गिर जाता था. पर, लगता है इस बार मामला कुछ ज्यादा ही बिगड़ चला है. कोरोना काल में लिये गये फैसलों ने मोदी की छवि को नुकसान पहुंचाया है.

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खैर, छोड़िये ट्विटरबाजों को मोदी जी की छवि से क्या लेना-देना. हम अब बात करते हैं #PMCaresFund_का_हिसाब_दो की

कौन क्या लिखकर या बोलकर कैसे हिसाब मांग रहा है, उन धुरंधरों की. जानिये, वह क्या-क्या कह रहे हैं, लिख रहे हैं, अपने लोकप्रिय प्रधानमंत्री के बारे में. इससे पाठकों को लोगों के गुस्से की वजह का भी अंदाजा लगाना आसान हो जायेगा.

गीता वी नाम की यूजर लिखती हैः एक ब्लैक होल, जिसे पीएम केयर फंड कहा जाता है. दान एकत्र करने का नया कोष एक अपारदर्शी, नकली है. सीएसआर फंड्स का उपयोग स्थानीय उपयोग के लिए किया जाता है. विदेशी योगदान स्वीकार करता है. कोई जानकारी साझा नहीं करता है. CAG को ऑडिट से रोकता है. गीता वी ने न्यूज लॉंड्री नामक वेबसाइट पर प्रकाशित एक खबर को भी साझा किया है.

हसिबा अमीन नाम की महिला सीधे-सीधे प्रधानमंत्री को सवालों के घेरे में खड़ा करती हुई लिखती हैं कितना धन एकत्रित किया गया है ? पैसा कहां खर्च हो रहा है ? कोई पारदर्शिता क्यों नहीं है ? सरकार क्या छिपाने की कोशिश कर रही है ? इन्होंने एक दूसरे ट्विट में लिखा हैः इस देश के लोगों से फंड इकट्ठा किया गया है. हमें यह जानने का अधिकार है कि हमारा पैसा कहां खर्च हो रहा है. लोगों को इस तरह अंधेरे में नहीं रखा जा सकता है.

 

लक्ष्मण नाम के सज्जन लिखते हैं: कुछ तो गड़बड़ है, जो फंड बिहार में ट्रांसफर हुए हैं. नीचे की छवि सब कुछ दर्शाएगी.

 

 

 

कर्नाटक के श्रीवात्सा लिखते हैं : पीएम केयर वास्तव में पीएम स्कैम है. RTI नहीं. कैग ऑडिट नहीं. ट्रस्ट के रूप में भाजपा नेता. नागरिक यह नहीं पूछ सकते हैं कि कितना पैसा एकत्र किया गया है और उसका खर्च कितना है! लॉन्च होने के 40 दिन, अभी तक कोई खर्च नहीं हुआ. अब इसका उपयोग नहीं किया गया तो क्या होगा ? मतलब,  पीएम केयर = भाजपा को दान देना.


शमा मोहम्मद नाम की यूजर लिखती हैः मजदूर प्रवासियों से टिकटों की पूरी कीमत ली जा रही है. विदेश में रहने वाले भारतीय लौटने के लिए 20,000 रुपये से 1 लाख रुपये का भुगतान कर रहे हैं. लोगों से # Covid_19 टेस्ट के लिए 4,500 रुपये लिए जाते हैं. भारतीय दुनिया को सबसे अधिक ईंधन कर का भुगतान कर रहे हैं. ऐसे में पीएम केयर का पैसा कहां जा रहा है?

शाहिद अजिज लिखते हैं: भारत में खून बह रहा है, पीएम सो रहे हैं. पूरे देश के साथ गंदा राजनीतिक खेल मत खेलो.

 

 

राधिका मीना नाम की यूजर लिखती हैः यह तस्वीर मिली और बस याद आया कि कैसे मेरे देश के पीएम ने कहा “पाखंड के बारे में लगता है”

अनिरुद्ध साहने नाम के यूजर ने लिखा हैः जहां कांग्रेस लोगों के बीच राहत बांटने में व्यस्त है, वहीं बीजेपी अपने पीएम-CARES फंड को बड़ी रकम के साथ भर रही है. बिना किसी पारदर्शिता के. पैसा कहां जा रहा है?  क्योंकि यह निश्चित रूप से सही लोगों तक नहीं पहुंच रहा है.

सौम्य रंजन बेहेरा (ओड़िसा) लिखता हैः ऐसे में सरकार पीएम के फंड का इस्तेमाल कर रही है. है ना ?

 

प्रतीक नाम के यूजर ने एक अजब सी तस्वीर को साझा करते हुए लिखा हैः इस ट्रेंड को देखने के बाद प्रधानमंत्री मोदी.

 

 

 

 

रिया शर्मा नामक यूजर ने कमाल ही कर दिया है. उन्होंने लिखा हैः

मोदी मोदी

हां पप्पा

गरीबों की मदद करना

हां पप्पा

झूठ बोलना

नहीं पप्पा

अपना #PMCaresFunds खोलें

हा हा हा..

शांति नाम की महिला एक फोटो को शेयर करती हुई लिखती हैं :  भारत के लोगों द्वारा दान किया गया धन कहां खर्च किया जा रहा है? निश्चित रुप से यह सही कारण के लिए नहीं खर्च हो रहा.

डिस्क्लेमरः यह खबर सिर्फ ट्विटर ट्रेंड पर आधारित है. इसमें जो सामग्री इस्तेमाल किये गये हैं, उसका मकसद किसी भी वर्ग, समूह, धर्म या राजनीतिक विचारधारा वाले को तकलीफ पहुंचाना नहीं है.

 

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