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अलर्टः रास्पबेरी पाइ डिवाइस और हीरोफिन क्रॉप एप के जरिये साइबर अपराधी साफ कर दे रहे हैं आपका अकाउंट

Ranchi : साइबर अपराधी नयी तकनीक के माध्यम से साइबर आपारधिक घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं. नयी तकनीक में रास्पबेरी पाइ डिवाइस और हीरोफिन क्रॉप एप शामिल हैं. साइबर पुलिस को जानकारी मिली है कि अपराधी रास्पबेरी पाइ डिवाइस के जरिये एटीएम और बैंक के सर्वर को हैक कर घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं. नये डिवाइस के जरिए बिना ओटीपी हासिल किये हुए पैसे का ट्रांजैक्शन कर ले रहे हैं.

साइबर डीएसपी यशोधरा ने कहा कि नयी तकनीक के सहारे साइबर अपराधी आसानी से सर्वर को हैक कर ले रहे हैं और साइबर फ्रॉड की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं. रास्पबेरी पाइ डिवाइस और हीरोफिन क्रॉप एप का प्रयोग साइबर अपराधी ज्यादा कर रहे हैं.

रांची जिला में साइबर ठगी के अब तक कुल 57 मामले दर्ज किये जा चुके हैं. ताज्जुब की बात तो यह है कि 57 मामले में अब तक सिर्फ एक की गिरफ्तारी हो हुई है. साइबर अपराधियों का गढ़ माने जानेवाले जामताड़ा में 39 केस दर्ज किये गये और 93 को गिरफ्तार किया गया. धनबाद में 26 केस हुए, जिसमें 13 आरोपी पकड़े गये. जमशेदपुर में 23 केस दर्ज किये गये, जिसमें चार आरोपी पकड़े गये. आंकड़ों पर गौर करें, तो छह जिले रामगढ़, कोडरमा, चतरा, पलामू, पाकुड़ व गुमला ऐसे हैं, जहां साइबर अपराध तो हुए, लेकिन एक भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई.

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भारत के कई बैंक आज भी पुराने सिस्टम पर चल रहे हैं

भारत के कई बैंक आज भी पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम पर चल रहे हैं. ऐसे में साइबर ठग नयी तकनीक के जरिए बैंक के सर्वर तक पहुंच रहे हैं. बैंकों को भी अपने सर्वर को अपग्रेड करना चाहिए. अगर सिस्टम अपडेट होता तो ठगी की संभावना कम ही रहती.

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रास्पबेरी पाइ डेविस इस प्रकार करता है काम

1. सर्वर को हैक करनेवाला रास्पबेरी-पाइ एक छोटा कम्प्यूटर ही होता है. ये छोटे मदरबोर्ड जैसा होता है. इसे किसी भी तरह का कमांड देने के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है. इससे सर्वर तक हैक हो सकता है.
2. रास्पबेरी-पाइ का उपयोग मशीन लर्निंग व ऑटोमेशन में होता है. एक मशीन को रास्पबेरी-पाइ से जोड़ कर उससे तय कमांड से रोबोट की तरह काम करवाया जा सकता है.

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3. रास्पबेरी-पाइ की बाजार में कीमत 3 हजार रुपये से शुरु होती है. इसे अलग-अलग पार्ट्स जैसे वाइफाइ, फैन, कैमरा आदि से जोड़ा जा सकता है. मॉनिटर जोड़ कर इसको पूरा कंप्यूटर भी बनाया जा सकता है.
4. ठगी के लिए रास्पबेरी-पाइ डिवाइस को कोड करके एटीएम में लगा कर बैंक के मुख्य सर्वर से हटा दिया जाता है. वाइफाइ से कनेक्ट करके एटीएम के लिए लोकल सर्वर बना दिया जाता है.

5. लोकल सर्वर बनाने के बाद मशीन बदमाशों द्वारा दिये गये कमांड पर ही काम करती है. इसके बाद एटीएम में कोई भी कार्ड डालने पर रास्पबेरी-पाइ के जरिए कमांड देकर रुपये निकाल लिये जा सकते हैं. सर्वर हैक होने के कारण बैंक तक अलर्ट भी नहीं पहुंचता है.

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