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नोटबंदी के 3 साल में ही करेंसी सर्कुलेशन में हुआ 8 लाख करोड़ रुपये का इजाफा

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Girish Malviya

वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने कल सदन में बताया कि देश में मार्च, 2019 तक करेंसी सर्कुलेशन 21 लाख करोड़ को पार कर गया है. जबकि मार्च 2016 में इकोनॉमी में करेंसी सर्कुलेशन करीब 16.41 लाख करोड़ था. इसका मतलब ये हुआ कि नोटबंदी के 3 साल के भीतर करेंसी सर्कुलेशन में 8 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हो गया है.

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ध्यान दीजिए कि यह आंकड़ा मार्च 2019 का है, रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट में भी यही आंकड़े हैं, जिस हिसाब से यह बढ़ रही है, मोटे अनुमान से यह माना जा सकता है कि मार्च से अब तक मार्केट में आसानी से 2 लाख करोड़ की मनी और सर्कुलेट हो गयी होगी. यानी आज की तारीख में 23 लाख करोड़ रूपये मार्केट में हैं.

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नोटबंदी के बाद बड़े-बड़े तर्क दिए गए कि हमने नोटबंदी क्यों की थी! ऐसा ही एक तर्क था कि देश में ‘कैश बब्बल’ हो गया है. सरकार के पिट्ठू बने अर्थशास्त्री यह बता रहे थे कि नोटबंदी के पहले बड़ी संख्या में करेंसी सर्कुलेशन में आ गयी थी, जिसे रोका जाना जरूरी था. देश में कैश का ढ़ेर इकठ्ठा हो गया था, लेकिन उस वक़्त तो 16.41 लाख करोड़ की मुद्रा प्रचलन में थी, आज तो 21 लाख करोड़ के ऊपर हो गयी है तो आज कैश बब्बल नहीं है?

27 नवंबर, 2016 को नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी को ‘कैशलेस इकॉनमी’ के लिए ज़रूरी क़दम बताया था. आज अगर कैश इतना अधिक बढ़ा है तो कहा गया आपकी कैशलेस इकनॉमी?

कैश बब्बल वाली बात हमें इसलिए समझायी गयी, ताकि हम मोदी सरकार के झूठे वादों पर यकीन करें, जो उन्होंने नोटबंदी के बाद किये. बहुत बाद में यह खुलासा हुआ कि रिजर्व बैंक का बोर्ड इस करेंसी के ज्यादा सर्कुलेशन हो जाने की थ्योरी से सहमत नहीं था.

RBI बोर्ड का मानना था कि 500 और 1000 रुपये के नोट 76% और 109% की दर से बढ़ रहे थे, जबकि अर्थव्यवस्था इससे ज्यादा तेजी से बढ़ रही थी. RBI बोर्ड का मानना था कि मुद्रास्फीति को ध्यान में रखते हुए बहुत मामूली अंतर है.

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नोटबंदी का बड़ा उद्देश्य काला धन पकड़ना, डिजिटल भुगतानों को बढ़ावा देना और नकदी के इस्तेमाल में कमी लाना बताया गया.

नोटबंदी के दौरान बंद हुए 99.30 फीसदी 500 और 1000 के पुराने नोट बैंक में वापस आ गए. जब सारा पैसा वापस बैंकों में लौट गया, तो ऐसे में सवाल उठता है कि कालेधन को पकड़ने में सरकार कैसे कामयाब रही? कितना काला धन पकड़ाया. क्या कोई स्पष्ट आंकड़ा सरकारी तौर पर हमें कभी दिया गया?

सबसे बड़ी बात तो यह है कि आज भी विशेषज्ञों ने दावा किया है कि मार्केट में सर्कुलेशन में पर्याप्त करेंसी नहीं है. यानी आज भी अमीर तबका कैश की होल्ड कर रहा है. और कैश को होल्ड करने के कारण असंगठित क्षेत्र से जुड़ा हर आदमी आज परेशान हैं.

कैश फ्लो में लगातार पैदा हो रही अड़चनों ने लाखों लोगों की आर्थिक सुरक्षा को ध्वस्त कर दिया है. इसकी वजह से औद्योगिक विकास की रफ्तार भी सुस्त हुई है. जीडीपी विकास की दर नीचे ही गिरती जा रही है, इसके लिए साफ साफ नोटबंदी ही जिम्मेदार है.

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