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कच्चा तेल 63 डॉलर प्रति बैरल से नीचे, और गिर सकते हैं पेट्रोल, डीजल के भाव

कच्चा तेल अक्टूबर में 86 डॉलर प्रति बैरल के साथ चार साल के उच्चतम स्तर पर चला गया था. जानकारों के अनुसार भाव में नरमी ग्लोबल इकनॉमिक ग्रोथ कमजोर होने के डर और क्रूड सप्लाई बढ़ने के कारण आयी है.

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NewDelhi : कच्चे तेल का भाव 63 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ जाने से देश में पेट्रोल, डीजल के दामों में और कमी आ सकती है. बता दें कि कच्चा तेल अक्टूबर में 86 डॉलर प्रति बैरल के साथ चार साल के उच्चतम स्तर पर चला गया था. जानकारों के अनुसार भाव में नरमी ग्लोबल इकनॉमिक ग्रोथ कमजोर होने के डर और क्रूड सप्लाई बढ़ने के कारण आयी है. सप्लाई बढ़ने के डर और मांग कमजोर होने की संभावना के कारण क्रूड ऑइल फिसल रहा है.  अमेरिका, रूस और सऊदी अरब से सप्लाई बढ़ी है. इसे देखकर ओपेक (OPEC) सदस्यों और उनके सहयोगियों ने उत्पादन घटाने पर फिर बातचीत शुरू कर दी है.  हालांकि दाम कम रखने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के जोर देने से हो सकता है कि ओपेक का लीडर सऊदी अरब उत्पादन न घटाये. भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम में कमी का दौर 17 अक्टूबर को शुरू हुआ था.  अब तक पेट्रोल 6.45 रुपये और डीजल 4.42 रुपये प्रति लीटर सस्ते हो चुके हैं. कहा जा रहा है कि यदि सरकारी कंपनियों ने तेल नरमी का पूरा फायदा आम जन को दिया तो दाम और कम हो सकते हैं.

डॉलर के मुकाबले रुपया 71.46 पर बंद हुआ

सैद्धांतिक रूप से पेट्रोल-डीजल के लोकल रेट्स क्रूड के पिछले 15 दिनों के इंटरनैशनल प्राइसेज के एवरेज और एक्सचेंज रेट को ध्यान में रखकर तय किये जाते हैं.  हालांकि देश में इनका दाम हमेशा अंतरराष्ट्रीय रुझान के अनुसार नहीं रहता क्योंकि प्राइसिंग का ढका-छिपा तरीका सरकारी कंपनियों को भाव में जरूरत से ज्यादा घट-बढ़ करने का मौका दे देता है.  कभी-कभी ऐसा सरकार के इशारे पर भी किया जाता है. इस महीने कच्चे तेल में 17 पर्सेंट की गिरावट के बाद विदेशी निवेशकों की भी भारत में दिलचस्पी बढ़ रही है.  उन्हें लग रहा है कि तेल के सस्ता होने से भारत का चालू खाता घाटा बेकाबू नहीं होगा.  सितंबर क्वॉर्टर में भारतीय कंपनियों के अच्छे रिजल्ट का भी उन पर पॉजिटिव असर हुआ है.  स्टैंडर्ड चार्टर्ड में साउथ एशिया के फॉरन एक्सचेंज, रेट्स और क्रेडिट हेड गोपीकृष्णन एमएस ने बताया, कच्चे तेल के दाम में गिरावट अच्छी खबर है क्योंकि इससे भारतीय एसेट्स में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ेगी.

ट्रेड डेफिसिट में कमी आने की उम्मीद के चलते अब रुपये में मजबूती शुरू हो गई है. लंबे समय तक कमजोरी के बाद अब रुपये में मजबूती का ट्रेंड शुरू हुआ है.  नवंबर में इमर्जिंग मार्केट्स की करंसी में रुपये का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा.  इसमें डॉलर की तुलना में 2.79 पर्सेंट की मजबूती आयी.  इस टेबल में अब भारतीय करंसी चिली की पेसो और इंडोनेशिया के रुपिया के बाद तीसरे नंबर पर है.  भारतीय करंसी रुपया मंगलवार को डॉलर के मुकाबले 71.46 पर बंद हुआ था.

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