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छठ यात्रियों की उमड़ी भीड़, स्पेशल ट्रेनों के बदले रूट

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Dhanbad : लोक आस्था का महापर्व छठ की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है. देश के दूर इलाके से लोग अपने-अपने घर छठ पर्व मनाने आ रहे हैं. जिसके कारण रेलवे स्‍टेशन और बस पड़ाव में भीड़ देखी जा सकती है. धनबाद रेलवे प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और लापरवाही का खमियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है. जिस तरीके से पूर्वी भारत के लिए एक के बाद एक ट्रेन धनबाद से बंद होती चली गयी है. उसका असर साफ तौर पर धनबाद स्टेशन में देखने को मिल रहा है. यहां ट्रेनों की कमी के कारण जेनरल में सफर करने वाले यात्रियों को ट्रेन में सवार होने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है. ट्रेन में सवार होने के लिए आपातकालीन खिड़कियों से प्रवेश करना पड़ रहा है. सीट मिलना तो दूर की बात खड़े रहने तक की जगह नहीं है.

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छठ यात्रियों की बढ़ी परेशानी

छठ पूजा के लिए चलने वाली स्पेशल ट्रेन की रूट भी शनिवार को अचानक से बदल दी गयी. ट्रेन की रूट बोकारो और गोमो की जगह बदल कर रांची से बरकाकाना होते हुए कोडरमा के बीच बिछी नयी लाइन से कर दिया गया है. वापस भी पटना से रांची जानेवाली ट्रेन का परिचालन भी इसी रूट से होगा. इसकी वजह से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. आरक्षित सीटों के भाड़े में भी हुई वृद्धि भी लोगों को अखर रही है.

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गंगा-दामोदर एक्‍स. में चार दिनों के लिये जोड़े गये हैं  2 अतिरिक्त कोच

ट्रेन में बढ़ती भीड़ और लंबी वेटिंग लिस्ट को देखते हुए धनबाद रेल मंडल ने गंगा-दामोदर एक्सप्रेस में आठ नवंबर से 11 नवंबर तक दो अतिरिक्त कोच जोड़े गये हैं. इसमें एक स्लीपर और एक थर्ड एसी कोच है. इसके अलावा किसी अन्य ट्रेन में अतिरिक्त कोच नहीं जुड़ा गया है.

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धनबाद से बिहार जाने वाली 5 प्रमुख ट्रेनों में आरक्षण नहीं है उपलब्ध

धनबाद-पटना इंटरसिटी, धनबाद-सीतामढ़ी, गंगा-दामोदर एक्सप्रेस, मौर्य एक्सप्रेस और लुधियाना धनबाद से बिहार जाने वाली प्रमुख ट्रेनें हैं. लुधियाना और धनबाद- पटना इंटरसिटी में वेटिंग 170 के पार है. रांची से धनबाद के रास्ते गोरखपुर जानेवाली मौर्य एक्सप्रेस पिछले दो माह से फुल चल रही है. गंगा-दामोदर एक्सप्रेस का भी हाल कुछ ऐसा ही है. इन ट्रेनों में जनरल बोगियों में यात्रियों को खड़े होने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है.

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बदहाली और यात्रियों की परेशानी का जिम्मेदार कौन ?

देश का दूसरा सबसे कमाऊ रेलवे स्टेशन होने के साथ राज्य का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन होने के बावजूद धनबाद ट्रेनों के लिए तरस रहा है. एक एक करके धनबाद से कई ट्रेन छीनती और बंद हो गई. जिसका खामियाजा धनबाद के के लोग भुगत रहे हैं. गौरतलब है कि राज्य और केंद्र में भी भाजपा की सरकार है. भाजपा के 2 सांसद और 5 विधायक भी इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं. फिर वे धनबाद से लाख कोशिश के बावजूद भी ट्रेनें छीनने या बंद होने से नहीं रोक पाये. इसलिये धनबाद स्टेशन से 26 जोड़े ट्रेनें बंद हुई. डीसी रेल लाइन बंदी के मामले में स्थानीय सांसद अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर भी असफल रहे. बिहार और अन्य क्षेत्रों के लिये धनबाद से ट्रेनें कम हो गई, यात्री धक्का- मुक्की कर यात्रा करने को मजबूर हैं.

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