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विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने की बजट की आलोचना

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Ranchi:  अंतरिम बजट पेश होते ही विपक्षियों नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी. अधिकतर की नजर में ये बजट वोटरों को बहलाने वाला है. जनहित की बातों को भुलाकर महज चुनावी स्टंट की तरह इस बजट को देखा जा रहा है. यहां पेश है विभिन्न दलों के राजनीतिज्ञों की राय में बजट के परिणाम और इसके उद्देश्य.

भाजपा का चुनावी घोषणा पत्र और जुमला है बजट: हेमंत सोरेन

झामुमो नेता हेमंत सोरेन ने बजट पर कहा कि केंद्र सरकार का अंतरिम बजट भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र का जुमला है. चार साल तक घड़ियाली आंसू बहाने और किसानों की आय दोगुनी करने बाद इन्होंने मात्र 500 रुपया देने की बात की. बजट सिर्फ छलावा है. इसके अतिरिक्त कुछ नहीं.

झूठ का इतिहास रचा सरकार ने

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार ने कहा कि बजट में मोदी सरकार ने झूठ का इतिहास रच दिया. भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों का भरोसा खो चुके हैं. किसानों की आमदनी 2022 तक दोगुनी करने का वायदा सरकार ने किया है. बजट में कृषि का विकास 12 प्रतिषत करने का बात है. जबकि साल 2017-18 में कृषि में वृद्धि 2 प्रतिशत हुई थी. उन्होंने कहा कि कृषि बजट के जो आंकड़े सरकार ने पेश किये हैं, वो भी झूठे हैं.

किसानों को छह हजार मदद चुनावी लॉलीपॉप: योगेंद्र प्रताप

झाविमो के केन्द्रीय प्रवक्ता योगेंद्र प्रताप ने कहा है कि केन्द्र सरकार द्वारा पेश किये गये बजट में सच को छोड़कर लगभग सबकुछ है. इसमें केवल चुनावी दांव की झड़ी लगी हुई है. मध्यम वर्ग के लिए आयकर की सीमा 5 लाख तक कर उन्हें चुनावी मौसम में रिझाने का दांव खेला गया है. पौने पांच साल तक किसानों की याद नहीं आयी, अब दो हेक्टेयर से कम भूमि वाले छोटे किसानों को 6000 रूपये सालाना मदद की बात चुनावी लॉलीपॉप नहीं तो और क्या है. अगले 5 साल में 1 लाख डिजिटल गांव बनाने का झूठा वादा करने वाली सरकार को पहले आदर्श सांसद ग्राम व स्मार्ट सिटी की क्या हालत है,  इस पर जमीनी रिपोर्ट कार्ड पेश करनी चाहिए. 5 साल में 50 गुणा मोबाइल  डाटा बढ़ाने का दंभ भरने वाली सरकार को पहले यह बताना चाहिए कि उन्होंने कितनों को रोजगार दिया जो अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए आटा-चावल की व्यवस्था कर सकते हों. बजट में रोजगार संबंधी कोई ठोस बात नहीं है. एनएसएसओ की रिपोर्ट बता रही है कि नोटबंदी के बाद देश में 45 साल बाद वित्त वर्ष 2017-18 का बेरोजगारी दर सबसे अधिक है.

बजट निराशाजनक और मध्यम वर्ग के साथ मजाक : मनोज पांडे

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SMILE

अंतरिम बजट 2019 लोकसभा में पेश होने पर प्रदेश राजद के प्रदेश महासचिव सह प्रवक्ता मनोज कुमार पांडे ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि गरीब और अमीर की दूरी को और बढ़ाने का प्रयास इस बजट में किया गया है. एक तरफ 800000 आमदनी वाले मध्यमवर्ग लोगों को सरकार गरीब मानती है दूसरी ओर 500000 आमदनी वाले टैक्स दाता को इनकम टैक्स में रिवेट देती है. इससे ऐसा लगता है कि सरकार गरीब और अमीर में भेदभाव रखती है. शिक्षा और स्वास्थ्य में कुछ विशेष नहीं दिया गया. देश में 70 फीसद किसान जिनके पास एक हेक्टेयर से भी कम जमीन है, आय से कम होने पर आत्महत्या कर रहे है. दूसरी ओर इस बजट में जो 2 एकड़ जमीन वाले किसानों को 6000 देने का चुनावी वादा किया गया है. यह आम बजट गरीबों के लिए नहीं बल्कि कारोबारी घरानों एवं आमिर को खुश करने वाला है.

अल्पसंख्यकों को इस बजट से कुछ नहीं मिला : एस अली

अल्पसंख्यकों के उत्थान की बात करने वाली सरकार ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि इस सरकार के रहते अल्पसंख्यकों का भला नहीं हो सकता. इस बजट में सरकार ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय का कुल बजट 4700 करोड़ प्रस्तावित किया है. उक्त बातें सामाजिक कार्यकर्ता एस अली ने बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही. कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष में भी इस मंत्रालय का बजट 4700 करोड़ ही था. जबकि आकलन किया गया तो पता चला कि इस बार केन्द्र सरकार ने अल्पसंख्यकों के कई महत्वपूर्ण योजना के बजट को खत्म या फिर पहले से कम भी कर दिया है.  प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप का प्रस्तावित बजट इस बार कम होता नजर आ रहा है. पिछले वित्तीय साल यानी 2018-19 में इस योजना के लिए 1269 करोड़ का बजट रखा गया था. लेकिन इस साल इसके लिए प्रस्तावित बजट को घटाकर 1100 करोड़ कर दिया गया है. नेशनल माइनॉरिटी डेवलपमेंट एंड फाइनेंस कारपोरेशन का बजट भी इस वित्तीय साल में कम कर दिया गया है. पिछले वित्तीय साल यानी 2018-19 में इसके लिए 165 करोड़ का बजट था. लेकिन इस साल इसके लिए प्रस्तावित बजट सिर्फ 60 करोड़ रखा गया है. मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन का बजट भी सरकार ने इस बार कम कर दिया है. पिछले साल इसके लिए 123.76 करोड़ का बजट था. लेकिन इस साल इसके लिए प्रस्तावित बजट सिर्फ 70 करोड़ रखा गया है. उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय के बजट में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय स्कीमों को भी शामिल दिखाया गया है, जबकि सच्चाई यह है कि इन स्कीमों और उनके लिए तय बजट को दोनों ही जगह दिखाया गया है. और इस बजट की रकम भी कोई मामूली नहीं है. बल्कि पूरे 1573.25 करोड़ रूपये का बजट है.

अंतरिम बजट चुनाव से पहले धोखाधड़ी करने वाला : सीटू

भाजपा सरकार का कार्यकाल समाप्त होने से पहले ऐसा बजट पेश किया गया. ताकि छल और कपट से वोट लिया जा सके. क्योंकि भाजपा संसदीय चुनावी हार से डर रही है. उक्त बातें सीटू की ओर से प्रेस बयान जारी कर अंतरिम बजट पर कही गयी. कहा कि अंतरिम बजट में लोगों को राहत देने के नाम पर भ्रम फैलाया जा रहा है. वास्तव में यह नव उदारवादी एजेंडा से बिलकुल भी अछुता नहीं है. पिछले कुछ महीनों में मजदूरों, किसानों और गरीबों को परेशान किया गया. अपने पांच साल के कार्यकाल में सरकार ने धान पैदा करने वालों को भुला दिया. अब अचानक उन्हें इनकी याद आयी. जब ये किसान भूखे मर रहे थे तब सरकार कहां थी. बयान में कहा गया कि सार्वजनिक निवेश, रोजगार सृजन और लोगों की क्रय शक्ति में सुधार किया जाना चाहिए.

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