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आठ सालों में पथ निर्माण विभाग के 73 इंजीनियर्स पर भ्रष्‍टाचार के गंभीर आरोप, कार्रवाई के बाद सिर्फ एक हुआ बर्खास्‍त

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Ranchi : पिछले आठ सालों में झारखंड सरकार के पथ निर्माण विभाग के 73 इंजीनियर्स पर भ्रष्‍टाचार और अनियमितता के आरोप हैं. इन सभी पर लंबे समय से विभागीय जांच चल रही है और कईयों के मामले लंबित भी हैं. इनमें से कुछ ऐसे इंजीनियर भी हैं, जो दंडात्‍मक कार्रवाई के बिना ही रिटायर हो गये. इन सभी इंजीनियर्स पर झारखंड में बीते आठ सालों में पथ निर्माण विभाग द्वारा संचालित सड़क निर्माण कार्य से जुड़ी योजनाओं को धरातल पर उतारने की जिम्‍मेदारी थी. इन सभी इंजीनियर्स ने झारखंड के रांची, खूंटी, लोहरदगा,  जमशेदपुर समेत सभी जिलों में योजनाओं को धरातल पर उतारने में वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के आरोप हैं. इनमें से कईयों के खिलाफ विभागीय कार्यवाई, तो कईयों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी.

सजा की जगह मिली पदोन्नति

सभी 73 ऐसे इंजीनियर्स, जिनपर भ्रष्‍टाचार के मामले हैं और उनके खिलाफ सालों से विभागीय कार्रवाई हो रही है, उनमें ज्‍यादातर के मामले 2008 से 2016 के बीच के हैं. ज्‍यादातर मामलों में विभागीय कार्यवाई शुरू तो हुई, पर वह कभी पूरी नहीं हुई. यह कार्रवाई सालों से लंबित है. पथ निर्माण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इन सभी में सिर्फ एक अभियंता के खिलाफ कार्रवाई हुई, जिसके बाद उसे बर्खास्‍त कर दिया गया. वहीं, दूसरी ओर बाकी के इंजीनियर्स को सरकार की विभागीय कार्रवाई के तहत सजा मिलने की बजाय उन्‍हें पदोन्‍नति और दूसरी सुविधाओं का लाभ मिलता रहा है.

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आइये जानते हैं इन इंजीनियर्स के बारे में

  • हरेंद्र सिन्‍हा एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, हजारीबाग में 12 दिसंबर 2002 को निगरानी धावादल द्वारा रंगेहाथ चार हजार रुपये मिथिलेश तिवारी से रिश्‍वत लेते गिरफ्तार हुए थे. इनके खिलाफ 6 साल बाद 3 जून 2008 को संकल्‍प संख्‍या 4062 के तहत कार्यवाही आरंभ की गयी.
  • बिपिन बिहारी सिंह कन्हैया जनता प्रतापपुर प्रखंड में घूस लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किये गये थे. उनके खिलाफ 24 जून 2008 को विभागीय कार्यवाही आरंभ की गयी.
  • शिव नारायण झा प्रभारी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को निगरानी धावा दल ने घूस लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया था. इनके खिलाफ संकल्प संख्या 6520 के तहत 21 दिसंबर 2009 और 16 अगस्त 2012 को विभागीय कार्यवाही शुरू की गयी.
  • असिस्टेंट इंजीनियर पारस कुमार पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में 27 अगसत 2009 को विभागीय कार्यवाही शुरू की गयी.
  • कमलेश कुमार असिस्टेंट इंजीनियर सह प्रभारी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ग्रामीण विकास विभाग, पलामू के खिलाफ नरेगा कार्य में अनियमितता मामले में पकड़े गये और उनके खिलाफ 25 जून 2010 को विभागीय कार्यवाही शुरू की गयी.
  • अरुण कुमार सिंह तत्‍कालीन जूनियर इंजीनियर, पथ प्रमंडल चाईबासा द्वारा बिटुमिन प्राप्ति से संबंधित चालान जांच किये बगैर ठेकेदार को भुगतान किया गया. इनके खिलाफ आठ नवंबर 2010 को कार्यवाही शुरू की गयी.
  • पथ निर्माण प्रमंडल हजारीबाग के जूनियर इंजीनियर श्‍याम सुंदर प्रसाद पर भी बिटुमिन प्राप्ति से संबंधित चालान की जांच किये बगैर ठेकेदार को पेमेंट करने का आरोप लगा. इनके खिलाफ 20 नवंबर 2010 को कार्यवाही शुरू की गयी.
  • पथ अंचल डालटनगंज के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर जय प्रकाश अवैध नियुक्ति के मामले में बर्खास्‍त हैं. इनके खिलाफ 15 अप्रैल 2011 को कार्यवाही शुरू की गयी थी.
  • पथ प्रमंडल के तत्‍कालीन जूनियर इंजीनियर दीपक कुंडू पर जनसंघ कोल बिटुमिन प्रकरण आरसी-02(ए)/2010(आर) में संलिप्‍त होने का आरोप है. इनके खिलाफ दो मार्च 2012 से कार्यवाही चल रही है.
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यह है सूची 

आठ साल में पथ निर्माण विभाग के 73 इंजीनियर्स पर भ्रष्टा चार के गंभीर मामले, कार्रवाई के बाद सिर्फ एक हुआ बर्खास्तम

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