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राजधानी में बढ़ा क्राईम, 7 महीना -110 मर्डर, 106 रेप और 22 रंगदारी के मामले

पुलिस अबतक सिर्फ छापेमारी ही कर रही है.

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Ranchi: सरकार यह दावा कर रही है कि राज्य में अपराधिक घटनाओं में कमी आयी है. लेकिन आंकड़ों को देखें तो सिर्फ राजधानी रांची में ही सात महीने में 110 मर्डर,106 रेप सहित 22 रंगदारी जैसी घटनाएं घटी है. पुलिस अपराधियों पर शिकंजा नहीं कस पा रही है. इस वर्ष जनवरी से लेकर जुलाई तक 110  हत्याएं हो चुकी है. वहीं सिर्फ सात महीने में रांची में 106 दुष्कर्म और रंगदारी के 22 मामले विभिन्न थानों में दर्ज हुए है. वहीं 24 अगस्त  से लेकर 12 सितंबर  तक रांची में 30 हत्याएं हुई हैं, जिनमें  पुलिस अभी भी तीनों मामलों में अपराधियों तक नहीं पहुंच सकी है. पुलिस अबतक सिर्फ छापेमारी ही कर रही है.

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रंगदारी, अवैध संबंध और जमीन बन रही है हत्याओं की वजह 

कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए तो रंगदारी, औरत और जमीन मर्डर का कारण बन रही है. केवल पिछले एक महीने की बात करें तो  गुजरे 17 दिनों में 3 बड़ी वारदातों ने सबको झकझोर कर रख दिया है. दिनदहाड़े किसी को भी बीच सड़क पर गोलियों से भून देना यह बता रही है कि अपराधियों में पुलिस का कोई डर नहीं रहा. सच्चाई तो यह है कि थानेदार को अपने इलाके के रंगदार या दागदार के बारे में पुख्ता जानकारी तक नहीं है.

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 वीवीआईपी मूवमेंट में उलझी रहती है पुलिस

राजधानी की पुलिस हर दिन धरना, जुलूस, प्रदर्शन और वीवीआईपी मूवमेंट में ही दिन भर उलझी रहती है. पुलिस अपराधियों को रोकने तथा राजधानी में अपराध की घटनाओं के रोकथम के लिए कोई गंभीर और ठोस पहल नहीं कर रही है. पहले अपराधियों से निपटने के लिए टास्क फोर्स काम करती थी, लेकिन अब कोई बड़ी वारदात के बाद टास्क फोर्स का गठन किया जाता है.

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काम के बोझ तले दबे हैं थानेदार 

वर्तमान समय में एसआईटी भी उतनी सक्रिय नजर नहीं आती है. वर्तमान समय में प्रशासन के पास संसाधन की कोई कमी नहीं है. राजधानी के ज्यादातर थानेदार 40 की उम्र पार कर चुके है. नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ थानेदारों ने बताया कि काम का प्रेशर इतना है कि वह चाहकर भी कुछ अलग नहीं कर पाते है.

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क्या कमजोर है रांची पुलिस का सूचना तंत्र ?

कई मामलों में रांची पुलिस से चूक हुई है. इससे यह साबित होता है कि रांची पुलिस का सूचना तंत्र बेहद कमजोर है. ज्यादातर थानेदार 1989 और 1994 बैच के हैं. इस बैच के जो तेज तर्रार अफसर समझे जाते थे, वह वर्तमान में सीआईडी, स्पेशल ब्रांच या फिर एसीबी में तैनात हैं. कुछ एसटीएफ में हैं.

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रंगदारी नहीं देने पर कर दी जाती है हत्या

राजधानी में नौ ऐसे अपराधी और उग्रवादी संगठन सक्रिय है, जो केवल रंगदारी और लेवी नहीं मिलने पर हत्या कर देते हैं. जेल में बंद अपराधी के इशारे पर बड़े व्यवसायी, इंजीनियर, बिल्डर की हत्या की जा रही है. इंजीनियर अमरेंद्र प्रसाद से बतौर रंगदारी एक करोड़ रुपये मांगी गई, नहीं देने पर उन्हें गोली मारकर जख्मी कर दिया गया. जेल में बंद कई अन्य अपराधी के नाम से रंगदारी वसूली जा रही है.

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आकंड़ों को देखें तो घटनाएं कम हुई हैं : पुलिस प्रवक्ता

आईजी (अभियान) सह पुलिस प्रवक्ता आशीष बत्रा ने कहा कि 2015 में हत्या की 207 घटनाएं हुई, वहीं 2016 में यह घटकर 197 पर पहुंच गई और 2017 में 177 घटनाएं हत्या की हुईं. बत्रा ने इस क्रम में कहा कि रांची में सात  महीनों में हत्या की 110 घटनाएं हुई हैं. इन आंकड़ों को देखा जाए तो हत्या की घटनाओं में कमी आई है. लगभग सभी  हत्या की घटनाएं मोटिवेटेड है. पुलिस अपराधियों को पकड़ने  में गंभीरता से लगी हुई है.

 

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