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धनबाद में पुलिस की हिरासत से अपराधी हुआ फरार, इस वर्ष 14 अपराधी पुलिस की हिरासत से हो चुके हैं फरार

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Dhanbad: पीएमसीएच के सर्जरी वार्ड से मंगलवार को दोपहर राजा निषाद नाम का अपराधी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया.

अपराधी के फरार होने के बाद उसकी सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों ने काफी देर तक उसकी खोजबीन की. जब कैदी का कोई सुराग नहीं मिला तब अपराधी के भागे जाने की सूचना स्थानीय सरायढेला थाना को दी गयी.

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पुलिस के द्वारा अपराधी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है. बता दें कि इस वर्ष अब तक पुलिस की हिरासत से 14 अपराधियों के भागने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं.

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क्या है मामला

23 दिसंबर की शाम 6 बजे जयरामपुर के रहनेवाले 18 वर्षीय राजा निषाद को चोट लगने के बाद पीएमसीएच सर्जरी वार्ड की यूनिट 3 में भर्ती कराया गया था.

उसकी सुरक्षा में एएसआइ आशीष कुमार यादव के नेतृत्व में पुलिसकर्मी तैनात थे. उसे एक मामले में जयराम पुलिस ने पकड़ा था. चोट के कारण इलाज के लिए पीएमसीएच में भर्ती कराया गया था.

मंगलवार दोपहर को पुलिस के जवान लघुशंका करने गये. इसका फायदा उठा कर अपराधी फरार हो गया.

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पुलिस की लापरवाही का लाभ उठा रहे हैं अपराधी

झारखंड में पुलिस की लापरवाही का अपराधी लाभ उठा रहे हैं. हर महीने पुलिस की हिरासत से एक अपराधी फरार हो रहा है. पिछले 12 महीने की बात करें तो झारखंड के अलग-अलग जिले से पुलिस की हिरासत से 14 अपराधियों के भागने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं.

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पुलिसकर्मियों की लापरवाही के चलते कोर्ट परिसर, पुलिस थानों और अस्पतालों के जेल वार्डों से अपराधी फरार हो रहे हैं. पिछले 12 महीने की बात करें तो राज्य के रांची, गुमला, पलामू, गढ़वा, सिमडेगा, दुमका, धनबाद और सराइकेला जिले से 14 अपराधियों के पुलिस की हिरासत से फरार होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं.

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सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा रहा

पुलिस अपनी करनी से खुद अपना मजाक बना रही है. पिछले 12 माह में पुलिस की गिरफ्त से 14 अपराधियों के भागने से आम लोग दंग हैं और सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा रहे हैं.

सवाल उठा रहे हैं कि आखिर पुलिस इतनी गैर जिम्मेदार कैसे हो सकती है. पुलिस की कार्यशैली देख कर तो यही लगता है कि राज्य में चोर-सिपाही का खेल चल रहा है.

पुलिस पहले अपराधी को पकड़ती है और फिर लापरवाही से भागने का मौका देती है. इसके बाद दोबारा पूरा पुलिस महकमा जाल बिछाने में लग जाता है, जिसके बाद फरार कैदी को पकड़ा जाता है.

कोर्ट परिसर, पुलिस थानों और अस्पतालों के जेल वार्डों से अपराधियों की फरारी जहां संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्रचिन्ह लगाती है वहीं पुलिस हिरासत से अपराधियों का फरार होना सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा भी है. ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस को सतर्क रहना होगा. पुलिस के हिरासत से अपराधियों के भागने की जितनी भी घटना हुई है उनमें से अधिकतर मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आयी है. जिसका फायदा उठा कर पुलिस की हिरासत से अपराधी भागने में सफल रहते हैं.

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