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झारखंड में महिलाओं के खिलाफ नहीं थम रहा अपराध, आठ महीनों में दहेज के लिए 210 महिलाओं की हत्या

Ranchi: झारखंड में महिलाओं के खिलाफ अपराध के आंकड़ें चिंताजनक है. महिलाओं के साथ दुष्कर्म, छेडछाड़, अपहरण, दहेज के लिए हत्या एवं प्रताड़ना के मामलों में वृद्धि देखी गई है. इस वर्ष अगस्त महीने तक दहेज के लिए 210 महिलाओं की हत्या कर दी गई.

Jharkhand Rai

यानी औसतन लगभग एक महिला रोजाना दहेजलोभियों का शिकार हुई तो दूसरी ओर दुष्कर्म की चार से ज्यादा घटनाएं हुईं.  इसके अलावा अपहरण के मामले भी दर्ज किए गए है. राज्य में औसतन हर दिन एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है. झारखंड पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष जनवरी से लेकर अगस्त तक 210 महिला की हत्या दहेज के लिए की गई.

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गिरिडीह जिले में हुई सबसे अधिक हत्याएं

दहेज के लालच में राज्य में विवाहित महिलाओं की हत्या रुकने का नाम नहीं ले रही है. खूंटी और सरायकेला जिले को छोड़ दिया जाए तो बाकी जिले में दहेज हत्या के काफी मामले सामने आये हैं.

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झारखंड पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017 की तुलना में वर्ष 2018 में दहेज के लिए अधिक महिला हत्या हुई है. 2016 में जहां 285, 2017 में 266 और वर्ष 2018 में 283 हत्याएं दहेज के लिए हुईं. वहीं वर्ष 2019 में दहेज के लिए अगस्त महीने तक 210 हत्याओं के मामले सामने आये हैं. झारखंड के गिरिडीह जिले में सबसे अधिक 38 हत्याएं 2019 में हुई हैं.

जानिए दहेज हत्या को लेकर जिलावार आंकड़ा

जिला दहेज हत्या के मामले
बोकारो 19
धनबाद 23
गढ़वा 16
गुमला 3
लोहरदगा 1
रामगढ़ 8
सरायकेला 0
चतरा 8
दुमका 4
गिरिडीह 38
हजारीबाग 17
कोडरमा 6
रांची 9
सिमडेगा 2
देवघर 14
जमशेदपुर 5
गोड्डा 5
जामताड़ा 9
लातेहार 5
पलामू 9
साहिबगंज 3
चाईबासा 3

 

इसके साथ ही रेल धनबाद 1 और रेल जमशेदपुर 0 में हत्याएं हुई हैं. 2018 में खूंटी और सराइकेला जिले में दहेज के लिए एक भी हत्या नहीं हुई. 2018 में खूंटी और सराइकेला जिले में दहेज के लिए एक भी हत्या नहीं हुई.

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दहेज उत्पीड़न मामले में ये है सजा का प्रावधान

आइपीसी की धारा 498-ए दहेज के लिए उत्पीड़न से जुड़ी है. इसमें महिला के पति और उसके रिश्तेदारों की ओर से दहेज की मांग पर सजा का प्रावधान है. ऐसे मामलों में 3 साल की कैद और जुर्माना हो सकता है. इसके अलावा आइपीसी की धारा 406 के तहत अगर महिला का पति या उसके ससुराल के लोग उसके मायके से मिला पैसा या सामान उसे सौंपने से मना करते हैं तो इस मामले में भी तीन साल की कैद और जुर्माना हो सकता है.

दहेज हत्या पर उम्रकैद की सजा

आइपीसी की धारा 304 बी में यह प्रावधान है कि दहेज के लिए हत्या का मामला साबित होने पर कम से कम सात साल की सजा से लेकर उम्रकैद तक दी जा सकती है. कानून के मुताबिक, यदि शादी के सात साल के भीतर असामान्य परिस्थितियों में लड़की की मौत होती है और मौत से पहले दहेज प्रताड़ना का आरोप साबित हो जाता है तो महिला के पति और रिश्तेदारों को ये सजा हो सकती है.

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