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भविष्य को बनाना है सुरक्षित तो सीखें ई-वेस्ट प्रबंधन

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फेंके सही जगह

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Ranchi : तकनीकि विकास ने मानव जीवन के हर कार्य को सरल बनाया. अब हम ऐसे समय में हैं जहां बटन दबाते ही हमारे सारे काम हो जाते हैं. लेकिन इस आधुनिकता ने जहां हमारे सारे काम आसान किये हैं वहीं भविष्य के लिये खतरा भी पैदा कर दिया है. गैजेट्स का प्रयोग हर इंसान करना चाहता है, लेकिन इन गैजट्स के प्रबंधन की जानकारी शायद ही किसी में हो. आमूमन लोग अपने घरों में खराब होने वाले कंप्यूटर, कीबोर्ड, माउस, मोबाइल फोन, टाइपराइटर, प्रिंटर आदि को कबाड़ में बेच देते हैं. और कबाड़ वाले बिना कुछ सोचे समझे उसके कलपुर्जे निकाल कर बाकि पार्ट को डपिंग यार्ड में फेंक देते हैं. जहां इन मशीनरी सामानों को जला दिया जाता है. जिससे कई तरह के हानिकारक रसायन वातावरण में घुल जाते हैं. जो ना सिर्फ प्रकृति को बल्कि मानव जीवन को भी विनाश की ओर ले जा रही है. आज कल कोई भी ऐसा घर या ऑफिस नहीं है जहां इन मशीनों का प्रयोग नहीं होता है. फिर भी इसके रिसाइकल की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता है. झारखंड जैसे राज्य में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के रिसाइकल के लिये कोई भी डीलर कार्यरत नहीं है. कुछ गैर सरकारी संस्थान हैं जो इस क्षेत्र में लोगों को जागरूक कर रहे हैं.

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क्या है इसके दुष्परिणाम

इन मशीनरी उपकरणों को इधर-उधर फेंकने या जलाने से प्रकृति का काफी नुकसान पहुंचता है. इन उपकरणों में निकेल, क्रोमियम, बेरियम, पारा जैसे रसायनों का प्रयोग किया जाता है. इन्हें जलाने से टॉक्सिन पदार्थ जैसे सल्फ्यूरिक एसिड आदि निकलता है, जो ना सिर्फ वायु प्रदूषण फैलाती है, बल्कि इसके धुंए से मानव शरीर को भी नुकसान पहुंचता है.

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मानव जीवन के लिये है घातक

इन मशीनों के ना सिर्फ जलने से बल्कि सामान्य रूप से इसके उपयोग से भी लगातार रेडिएशन निकलते रहते हैं. इन मशीनों को जलाने से जो हानिकारक धुंआ निकलता है उससे सांस संबंधित बीमारी जैसे अस्थमा आदि तो होती ही है. वहीं यदि इन्हें लंबे समय तक कचड़े के साथ जमीन में पड़े रहने दिया जाए तो इसके रसायन भूमिगत जल से जा मिलते हैं. जिससे किडनी बीमारी, यकृत संबंधित रोग, ब्लड कैंसर आदि हो सकते हैं.

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शहर में काम कर रही संस्था

रांची शहर में इसके लिये भारतीय लोक कल्याण सेवा समिति कार्यरत है. जो पिछले एक साल से इस क्षेत्र में काम कर रही है. इसके सचिव चंद्रदेव सिंह ने बताया कि हर क्षेत्र में मशीनरी उपकरणों का प्रयोग किया जाता है, लेकिन फिर भी सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है. उन्होंने बताया कि इनकी संस्था एक साल से स्कूलों, कॉलेजो, चौराहों आदि सार्वजनिक स्थानों में नुक्कड़ नाटक, सेमिनार आदि आयोजित कर लोगों को जागरूक कर रही है. हाल के दिनों में इनकी संस्था की ओर से झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से ई-वेस्ट पर जागरूकता बढ़ाने की मांग की गयी है.

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नहीं है कोई डीलर

राज्य में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के खराब होने पर दुकानदार भी इसे वापस नहीं लेते. जब तक कि उपकरण की वारंटी अवधि हो, तभी तक दुकानदार इन उपकरणों को लेते हैं. उसके बाद इसके खराब होने पर लोग इसे कबाड़ में बेच देते हैं.

कैसे करें ई-वेस्ट प्रबंधन

इसकी जानकारी देते हुए चंद्रदेव सिंह ने बताया कि ई-वेस्ट की समस्या को नई नहीं है. जब से उपकरणों के प्रयोग में तेजी आयी है, तब से ही इसकी आवश्यकता है. राज्य में एक तो उचित व्यवस्था नहीं है, लेकिन फिर भी लोग अपने विवके से प्रबंधन कर सकते हैं. लोगों को चाहिये की अगर राज्य में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है तो आवश्यकतानुसार उपकरणों का प्रयोग करें. थोड़ी सी खराबी में मरम्मती करायें और यदि भविष्य में ऐसे कोई डीलर होते हैं तो उन्हें ही खराब उपरकरण बेचे जाने चाहिये.

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