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सीपी सिंह ने माना, अटल वेंडर मार्केट के दुकान आवंटन में गडबड़ियां हुई, कहा, पुख्ता प्रमाण मिलने पर होगी कार्रवाई

निगम के एक बड़े अधिकारी के रिश्तेदार की संलिप्तता पर नगर विकास मंत्री ने कहा, लोगों से कहा है कि वे सबूत दें. पुख्ता प्रमाण मिलने पर होगी कार्रवाई

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Ranchi : कचहरी रोड स्थित अटल वेंडर मार्केट में दुकान आवंटन में हुई गड़बड़ी की बात नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने स्वीकारी है. उन्होंने कहा है कि मामले में पूरी निष्पक्षता से जांच करनी चाहिए. जो भी इसके पीछे दोषी है, उसपर कार्रवाई की जानी चाहिए. जहां तक उनके द्वारा जांच की बात है, तो उन्होंने लोगों से कहा है कि वे उन्हें दोषियों के खिलाफ सबूत दें, तो कार्रवाई की जायेगी.

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अटल वेंडर मार्केट का उद्घाटन गत वर्ष 16 नवंबर को  मुख्यमंत्री रघुवर दास ने किया था. सात माह बीतने को हैं, लेकिन अभी तक फुटपाथ दुकानदार मार्केट में दुकान नहीं शुरू कर पाये हैं. मार्च माह में निगम ने लॉटरी के द्वारा दुकानदारों को दुकानें आवंटित की थी. लेकिन वेंडिंग कमिटी के सदस्यों का आरोप है कि आवंटन में गडबड़ियां हुई है.

वैसे दुकानदार जिन्होंने कभी दुकानें फुटपाथ पर नहीं लगायी थी, उन्हें भी गलत तरीके से दुकानें आवंटित हुई हैं. हालांकि नगर आयुक्त मनोज कुमार ने इसपर संझान लेते हुए करीब 15 से अधिक दुकानदारों को चयनित कर आवंटित लिस्ट से बाहर करने का निर्देश दिया था, लेकिन इन्हें दुकानें कैसे आवंटित हुई, उसकी जांच कराना उन्होंने उचित नहीं समझा. इन सभी मुद्दों पर न्यूज विंग संवाददाता ने नगर विकास मंत्री सीपी सिंह पर बात की.  मंत्री पूछे गये सवाल और उनके जवाब यहां दिये जा रहे हैं.

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सवाल :  मार्केट के उद्घाटन को करीब सात माह बीतने को हैं, लेकिन अभी तक दुकानदारों को यहां बसाया नहीं जा सका है. ऐसा क्यो ?

जवाब : अटल मार्केट बनाने का एक मात्र उद्देश्य फुटपाथ दुकानदारों को व्यवस्थित रूप से यहां बसाना था. बसाने के पहले इन दुकानदारों का एक सर्वेक्षण हुआ था. लेकिन जब सर्वेक्षण लिस्ट में गलत तरीके से दुकानदारों के नाम शामिल करने की बात सामने आयी, तो लोगों ने इसका विरोध किया. दुकानदारों का सर्वेक्षण करने वालों ने इसमें कहीं न कहीं जरूर गड़बड़ी की है.

अवैध तरीके से लिस्ट में लोगों को घुसाने का काम किया है. जैसे ही यह बात उनके संझान में आयी, तो उन्होंने सख्त निर्देश दिया कि जो दुकानदार सही हैं, उन्हें ही दुकान मिलनी चाहिए. सात माह की अवधि कम नहीं होती है. नगर निगम से वे इस बारे में भी पूछेंगे कि आखिरकार देरी क्यों हो रही है.

सवाल : आप कहते हैं कि दुकान आवंटन में  गड़बड़ी हुई है. वहीं वर्तमान में वेंडर मार्केट का काम देख रहे एक अधिकारी के रिश्तेदार की भी इसमें संलिप्तता पायी गयी है. आप नगर विकास मंत्री है. आपने इसपर क्यों नहीं कोई एक्शन लिया ?

जवाब : जबतक उनके हाथ में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कोई सबूत नहीं हाथ आता है ,तबतक विभाग कोई कार्रवाई कैसे कर सकता है. सवाल यह है कि वे अभी सबूत जुटा रहे है. कई लोगों को कहा है कि वे उन्हें सबूत दें. इसके पीछे यदि मार्केट का काम देख रहे किसी अधिकारी के रिश्तेदार या सिटी मिशन मैनेजर या सिटी मैनेजर का हाथ है ? तो जैसे ही कोई सबूत उन्हें मिलता है, वे कार्रवाई करेंगे.

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आरोप लगा देने से कार्रवाई नहीं की जा सकती है. अगर थोड़ी देर के लिए मान लिया जाये कि संबंधित व्यक्ति ने गड़बड़ी की है, तो उसके खिलाफ पुख्ता प्रमाण भी होना चाहिए.

सवाल :  आप स्टेशन रोड में दुकान लगाने वाले फुटपाथ दुकानदारों के पक्ष में खड़े होते है. लेकिन  वेंडर मार्केट में दुकानदारों को केवल तीन वर्ष तक दुकान देने की बात निगम ने की है. जिसका वेंडिंग कमिटी से जुड़े लोगों ने विरोध किया है. आपका इसपर क्या कहना है?

जवाब : सवाल केवल तीन या तीस साल का नहीं है. बल्कि यह है कि जिन्हें दुकानें दी जायेंगी, अगर वे मार्केट में कोई गलत कार्य करने लगे, तो इसका क्या उपाय होगा. कल वही दुकानदार कहने लगेंगे कि उन्हें जीवनभर के लिए दुकानें दी गयी हैं. इन्हीं सब मुद्दों पर उऩ्होंने निगम के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इसपर सुधार करें. जिन दुकानदारों को यहां बसाना है और जो वेंडिंग कमिटी के सदस्य है,

उनके साथ बैठक करें. अधिकारी उनसे कहें कि मार्केट में अवैध तरीके से व्यापार न हो. अगर कोई दुकानदार ऐसा   करता है, तो न केवल उनके आवंटन को रद्द किया जायेगा, बल्कि उनपर कानूनी कार्रवाई की जायेगी.

सवाल :  मार्केट के उपरी तल्ले में स्थित दुकानों (जिनकी संख्या 111 या 113 के आसपास है) का बेस प्राइस रेट करीब 90 रुपए प्रति वर्गफुट निर्धारित है. अगर टेंडर में कोई ज्यादा  बोली लगाता है, तो जीएसटी और सिक्युरिटी मनी को मिलाकर यह रेट काफी अधिक बैठता है. क्या एक सामान्य व्यक्ति ऐसे में दुकान ले पायेगा?

जवाब : नगर निगम या सरकार के पास भी अपनी कमाई का स्त्रोत होना चाहिए. अगर निगम पहले ही रेट कम कर दें, तो दुकान की स्थिति क्या होगी. यह सभी जानते हैं. जहां तक बेस रेट तय करने की बात है, तो जिनको दुकान लेनी होगी, वो ले लेंगे. उनका केवल यही मानना है कि रेट कुछ भी हो, लेकिन दुकान आवंटन में पूरी पारदर्शिता बरती जाये.

सीपी सिंह ने कहा कि मार्केट के  दुकानदाकों को बसाने के कई तरीके हो सकते है. या तो इन्हें भाड़े पर देना चाहिए, या इसकी नीलामी करनी चाहिए. या इसे लॉटरी से देना चाहिए. अगर ऐसा होता है  तो मीडिया या बाहर के लोग ही इसपर सवाल खड़ा करने लगेंगे.

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