Corona_UpdatesJamshedpurJharkhandKhas-KhabarNationalNEWSTRENDINGWorld

Study : दुनिया भर में बढ़ रहे कोरोना के मामले डरानेवाले, इसे सामान्य सर्दी-खांसी मानने की भूल भारी पड़ सकती है

News Wing Desk

दुनिया के कई देशों सहित भारत में तेजी से बढ़ता कोविड-19 का प्रकोप चिंताजनक है. देश में 24 घंटे में कोविड-19 के 2,483 नये मामले सामने आये हैं.  केरल में मौत के 47 मामले सामने आने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 5,23,622 हो गयी है. हालिया अध्ययनों में वैज्ञानिकों ने कोरोना के नये वैरिएंट्स की प्रकृति और संक्रामकता को लेकर अलर्ट किया है, वह निश्चित ही डराने वाला है. अध्ययनों में एक्सई जैसे वैरिएंट्स को अब तक सबसे संक्रामक माने जा रहे ओमिक्रॉन बीए 2 (स्टील्थ ओमिक्रॉन) से भी 10 फीसदी अधिक संक्रामकता वाला बताया जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से वैश्विक स्तर पर कोरोना संक्रमण के केस में उछाल देखने को मिल रही है, उससे साबित होता है कि ये दोनों अति संक्रामक वैरिएंट्स हैं, जिनसे बचाव के लिए विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है. विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि कोरोना संक्रमण को किसी भी स्थिति में हल्के में लेने की गलती न करें, विशेषकर इसे इन्फ्लूएंजा या सामान्य सर्दी-खांसी मानकर चलना काफी गंभीर हो सकता है. यह इन्फ्लूएंजा से कहीं ज्यादा घातक है.

इन्फ्लूएंजा से अधिक घातक है कोरोना

Chanakya IAS
Catalyst IAS
SIP abacus

स्पेन में किये गये एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया है कि कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती वयस्कों में इन्फ्लूएंजा से पीड़ितों की तुलना में जटिलताओं और मृत्यु का खतरा काफी अधिक था. 23-26 अप्रैल तक पुर्तगाल के लिस्बन में हो रहे क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी एंड इंफेक्शियस डिजिज की इस साल की यूरोपीय कांग्रेस में प्रस्तुत की जा रही खोज यह बताती है कि इन्फ्लूएंजा की तुलना में कोविड-19 के कारण अस्पताल में लंबे समय तक भर्ती रहने और इंटेंसिव केयर की जरूरत दोगुनी अधिक हो सकती है.स्पेन स्थित डेल मार हॉस्पिटल के प्रमुख और अध्ययन के लेखक इनमैकुलाडा लोपेज मोंटेसिनो बताते हैं- हमारे निष्कर्ष से पता चलता है कि कोविड-19, इन्फ्लूएंजा से कहीं अधिक घातक है. कुछ रिपोर्ट्स दावा कर रहे हैं कि समय के साथ कोरोना वायरस भी इन्फ्लूएंजा की तरह कम प्रभावी होता जा रहा है, फिलहाल इस अध्ययन में इसका बिल्कुल उल्टा देखने को मिला है. कोविड से बचाव को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है, इसके साथ सभी लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज जरूर लगवानी चाहिए.

The Royal’s
Sanjeevani
MDLM

वैक्सीनेशन से ही मिलेगी कोरोना से सुरक्षा

अध्ययनों में वैक्सीनेशन को कोरोना की गंभीर बीमारी और मृत्यु के जोखिम से बचाने के लिए सबसे आवश्यक बताया जा रहा है. इसी संबंध में जॉन्स हॉपकिन्स की वैज्ञानिक अमिता गुप्ता का कहना है कि भारत में वैक्सीन असमानता एक बड़ा मुद्दा  है. संक्रामक रोग विभाग के प्रमुख और जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में मेडिसिन के प्रोफेसर अमिता गुप्ता कहती हैं, जब तक दुनिया में हर कोई वैक्सीनेटेड नहीं हो जाता, तब तक कोई भी कोविड से सुरक्षित नहीं है.

इसे भी पढ़ें – कैबिनेट में बिजली का मुद्दा उठा, 21 प्रस्ताव की मंजूरी, डीवीसी-एनटीपीसी को 1690 करोड़ की टैरिफ सब्सिडी, होल्डिंग टैक्स में वृद्धि

 

Related Articles

Back to top button