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COVID-19 : दक्षिण अफ्रीका में मिला कोरोना का नया वैरिएंट, भारत सरकार ने सभी राज्यों को किया अलर्ट

New Delhi : दक्षिण अफ्रीका में कोरोना वायरस के नये वैरिएंट मिलने से दुनिया एक बार फिर अलर्ट हो गई. इसकी वजह से पूरे देश 100 से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं. हालांकि अभी तक यह नहीं पता चल पाया है कि यह कितना खतरनाक है. इधर भारत सरकार भी कोरोना के नये वैरिएंट को लेकर सतर्क हो गई है. पीटीआई के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक केन्द्र सरकार ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर सजग किया है. केंद्र ने राज्‍यों से दक्षिण अफ्रीका, हांगकांग और बोत्सवाना से आने या जाने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की जांच और परीक्षण करने के निर्देश दिए हैं. वहीं विशेषज्ञ इसे कोरोना से सबसे बदतर रूप बता रहे हैं.

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण के द्वारा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लिखे पत्र में कहा गया है कि दक्षिण अफ्रीका, हांगकांग और बोत्सवाना से आने वाले या इन देशों के रास्ते आने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की कड़ी स्क्रीनिंग और जांच की जाए क्‍योंकि इन देशों में कोविड-19 के गंभीर प्रभावों वाले नए वैरिएंट के सामने आने की जानकारी मिली है. साथ ही उन्होंने कहा कि संक्रमित पाए गए यात्रियों के नमूने तुरंत निर्दिष्ट जीनोम अनुक्रमण प्रयोगशालाओं को भेजे जाएं.

भूषण ने कहा है कि कोरोना के इस वैरिएंट में बड़ी संख्या में म्‍यूटेशन हुए हैं. चूंकि हाल ही में वीजा पाबंदियों में ढील के चलते इसका देश के जनस्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है इसलिए जोखिम वाले देशों से आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की अनिवार्य रूप से कड़ी स्क्रीनिंग की जाए. यही नहीं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुरूप इन अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के संपर्क में आए लोगों पर भी नजर रखी जानी चाहिए.

हाल ही में दक्षिण अफ्रीकी वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के एक नए वैरिएंट का पता लगाया है. नेशनल इंस्टीट्यूट फार कम्युनिकेबल डिजीज (NICD) ने गुरुवार को बताया कि वैज्ञानिक दक्षिण अफ्रीका में पाए गए इस नए कोरोना वैरिएंट के संभावित प्रभावों को समझने के लिए काम कर रहे हैं. NICD ने बताया कि इस नए कोरोना वायरस वैरिएंट का नाम है B.1.1.529. दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने NGS-SA के सदस्य सरकारी प्रयोगशालाओं और निजी प्रयोगशालाओं को तत्काल जीनोम सिक्वेंसिंग करने की सलाह दी है. ताकि यह पता चल सके कि यह वैरिएंट कितना संक्रामक, कितना खतरनाक और दुष्प्रभावी है.

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