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जहां सरकार नहीं पहुंचा सकी है मदद वहां से COVID-19 हेल्पलाइन टीम को मिल रही गालियां

Pravin Kumar

Ranchi: लॉकडाउन के कारण विभिन्न राज्यों में फंसे झारखंड के श्रमिक को मदद पहुंचाने के मकसद से राज्य सरकार ने COVID-19 हेल्पलाइन सेवा शुरू की है. जिसमें अब तक 20 हजार 88 मजदूरों ने मदद के लिये संपर्क किया है.

वहीं राज्य सरकार ने 7 लाख 23 हजार मजदूरों का डेटाबेस तैयार कर बाहर फंसे श्रमिक को मदद पहुंचाने में इसका उपयोग कर रही है. इस पूरी प्रक्रिया में फिया फाउंडेशन की ओर से राज्य सरकार को वॉलेंट्री सहयोग किया जा रहा है. कैसे काम कर रही है झारखंड सरकार की कोविड-19 रिस्पांस टीम.

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COVID-19 हेल्पलाइन टीम में क्या काम हो रहा है, इसे लेकर फिया फाउंडेशन के स्टेट हेड जॉनसन तोपनो से न्यूजविंग ने बात की, देखिये बातचीत का मुख्य अंश-


जॉनसन तोपनो कहते है, राज्य सरकार ने सिविल सोसायटी के सहयोग से कोविड-19 रिस्पांस टीम का गठन किया है. विभिन्न राज्य में फंसे हुए झारखंड के श्रमिक, जो लोग बीमारियों का इलाज करवाने के लिए दूसरे राज्य गये हैं वैसे सभी लोग सरकार के द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं.

सरकार के द्वारा हर संभव मदद का प्रयास किया भी किया जा रहा है. सरकार के द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर और रिस्पांस टीम बाहर फंसे मजदूरों में असुरक्षा अनिश्चितता की भावना दूर करने का काम कर रही है.

किस तरह के कॉल आ रहे हैं सेंटर में

कोविड-19 फोन कॉल सेंटर में मुख्य चार तरह से परेशान लोग फोन कर रहे हैं. एक वैसे लोग जो राज्य से बाहर इलाज कराने गये और वहां फंस गये, लेकिन इनकी सख्यां कम है.

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जबकि वैसे लोगों की संख्या सबसे अधिक है जो राज्य से बाहर काम की तलाश में गये हैं. उनके बीच असुरक्षा की भावना, रहने की समस्या, राशन और पैसे खत्म हो जाने के साथ-साथ घर लौटने की बेबसी भी दिख रही है. जो झारखंड के प्रवासी मजदूर है वह अधिकांश गरीब तबके के हैं.

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प्रवासी मजदूरों में है भय का माहौल जिसे सरकार दूर करने का कर रही प्रयास

जॉनसन कहते हैं कि राज्य सरकार ने काफी सराहनीय कार्य किया है. मजदूरों में भय का माहौल बना हुआ है जिसे इस सेंटर के माध्यम से दूर करने की कोशिश हो रही है. मजदूरों की मनोवैज्ञानिक रूप से काउंसिलिंग भी की जा रही है. जहां किन्ही कारणों से अब तक राहत नहीं पहुंच पायी है वहां लोग अपनी नाराजगी भी जाहिर कर रहे हैं.

पिछले दो दिनों में रिपीट कॉल अधिकांश आ रहे हैं. वैसे जगह से यह कॉल आ रहे हैं जहां पर राहत नहीं पहुंच सकी है. ऐसे कॉल की संख्या रोजाना डेढ़ सौ से दो सौ के करीब है. ऑपरेटरों को गालियां भी दी जा रही है. लेकिन बड़ी विनम्रता से ऑपरेटर बातचीत कर उन्हें मदद पहुंचाने के लिए डाटा बेस तैयार कर सरकार को दे रहे हैं.

Covid-19 फोन कॉल सेंटर के माध्यम से पहुंच रही सरकार तक बात

जॉनसान कहते है, झारखड़ से बाहर फंसे लोगों की बात सरकार तक पहुंच रही है. सरकार के प्रयास से बाहर फंसे मजदूरों में आत्मविश्वास भी बढ़ा है कि इस संकट के समय वो अकेले नहीं हैं. राज्य सरकार ने अपनी मंशा जाहिर कर दी है कि वह मजदूरों के साथ खड़ी है. और समस्या का मिलजुलकर समाधान करने का प्रयास किया जा रहा है.

कॉल डाटा से किस तरह राहत कार्य पहुंचाने में मिलती है मदद

जॉनसान ने बताया कि लॉकडाउन में बाहर फंसे लोगों को मदद पहुंचाने के लिए हर दिन का डाटा तैयार कर उसका विश्लेषण किया जाता है. इसके बाद मुख्यमंत्री सचिवालय भेजा जाता है. वहां से राज्य सरकार के वरीय अधिकारी उन राज्यों (जहां झारखंड के लोग फंसे हुए हैं) के अधिकारियों से बात कर हर संभव मदद करने का प्रयास करते हैं.

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हाल के दिनों में कॉल रेट कम होने की वजह

जॉनसन कहते है हाल के दिनों में कॉल रेट कम होने की वजह यह है कि राज्य सरकार ने जहां मजदूर संकट में फंसे हुए हैं वहां तक मदद पहुंचायी है. और जहां मदद नहीं पहुंच पायी है अब वहां से कॉल आ रहे हैं इनकी संख्या दिनोंदिन कम होती जा रही है.

इसे और बेहतर कैसे किया जा सकता है

कोरोना की इस वैश्विक महामारी से लड़ने के लिए सिविल सोसाइटी की भी मदद सरकार को लेनी चाहिए. उनके माध्यम से इस मदद पहुंचाने के कार्य को और बेहतर ढंग से करने में सहयोग मिल सकता है.

बाहर फंसे लोगों से अपील

जॉनसन तोपनो ने न्यूजविंग के माघ्यम से अपील की है कि प्रवासी मजदूर जहां फंसे हुए हैं वह अपने स्थान को ना छोड़े. सरकार के पास उनका डेटाबेस है और जहां अब तक मदद नहीं पहुंची है, वहां जल्द ही मदद पहुंचाने का प्रयास सरकार की ओर से किया जा रहा है .

झारखंड के प्रवासी मजदूर श्रम, रोजगार और प्रशक्षिण विभाग झारखंड सरकार के इन टोल फ्री नंबरों पर सहयोग के लिए फोन कर सकते हैं-

0651-2490037
0651-2490052
0651-2490055
0651-2490058
0651-2490083
0651-2490092
0651-2490104
0651-2490125
0651-2490127
0651-2490128

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