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जजों की आलोचना कर फंसे वकील, SC का केरल बाढ़ पीड़ितों को दान देने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यों वाली बेंच ने जजों की आलोचना पर तल्ख तेवर अपनाते हुए कहा कि ...

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NewDelhi : सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यों वाली बेंच ने जजों की आलोचना पर तल्ख तेवर अपनाते हुए कहा कि  जजों की आलोचना का एक नया ट्रेंड बन गया है. इस प्रवृति को हमें रोकना होगा. हमें कठोरता दिखानी ही होगी.  बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में अवमानना के दोषी पाये गये वकील को सजा के रूप में केरल बाढ़ पीड़ितों के लिए सहायता राशि दान करने का निर्देश दिया है. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी. कोर्ट को अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने भारतीय मतदाता संगठन के महासचिव और वकील विमल वाधवन के खिलाफ लिखित प्रमाण दिये थे.

इस प्रमाण के आधार पर बेंच ने विमल वाधवन को अवमानना का दोषी पाया.  कोर्ट ने कहा कि यह अपमानजनक है.  खबरों के अनुसार इसके बाद अवमानना के आरोपी वकील वाधवन ने कोर्ट से नरम रुख अपनाने की अपील करते हुए हाथ जोड़कर माफी मांगी.  इस क्रम में बेंच ने वकील से पूछा कि आपने केरल बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास के लिए क्या किया है?

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जजों की आलोचना का एक ट्रेंड बन गया है, इस प्रवृति को बढ़ावा नहीं दे सकते

अवमानना के दोषी पाये वकील के खिलाफ जवाबदेही तय करने को लेकर सीनियर वकील शेखर नापहाड़े ने कहा कि इन दिनों जजों की आलोचना का ट्रेंड देखने में आ रहा है. कहा कि ऑन रेकॉर्ड  सुप्रीम कोर्ट के वकील कई बार कुछ ऐसी टिप्पणी कर देते हैं, जिनके बारे में उन्हें भी नहीं पता होता है कि यह अवमानना के दायरे में आता है.
अवमानना के दोषी वकील ने जब कोर्ट से माफी की गुहार लगाई तो बेंच ने कहा, अटॉर्नी जनरल ने केरल बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए एक करोड़ की राशि दान की है. आपने क्या किया है? उसके बाद वाधवन ने कहा कि वह 50 हजार  दान करना चाहते हैं, लेकिन एजी ने इसे पांच लाख करने की मांग कर डाली.

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इस क्रम में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, अवमानना का दोषी करार देते हुए हमें खुशी नहीं हो रही, लेकिन इन दिनों जजों की आलोचना का यह एक ट्रेंड बन गया है.  हम इस प्रवृति को बढ़ावा नहीं दे सकते हैं. बता दें कि वाधवान ने सुनवाई से पूर्व ही बिना शर्त माफी मांगी और कहा कि उन्हें गलती का अहसास हो रहा है.

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