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सबरीमाला पर न्यायालय का फैसला ऐतिहासिक : रामविलास पासवान

जब महिलाएं अंतरिक्ष और सेना में जा रही हैं. तब उनके साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए. 

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Patna : भाजपा की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख रामविलास पासवान ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की इजाजत देने वाले उच्चतम न्यायालय के फैसले को ऐतिहासिक बताया और इसकी सराहना भी की. उन्होंने कहा कि ऐसे समय जब महिलाएं अंतरिक्ष और सेना में जा रही हैं. तब उनके साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए.

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केंद्रीय मंत्री पासवान ने शनिवार को कहा कि देश को अगर आगे ले जाना है और इसे दुनिया के अग्रणी राष्ट्रों में शुमार करना है तो समाज में किसी तरह के भेदभाव की कोई जगह नहीं होनी चाहिए.

भगवान के लिये सब समान

उन्होंने कहा, ऐसे वक्त जब महिलाएं सेना में शामिल हो रही हैं और अंतरिक्ष में जा रही हैं तब उन्हें मंदिर में प्रवेश से रोकना गलत है. उनसे कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए. हमारी पार्टी उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करती है. यह एक ऐतिहासिक फैसला है.

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लोजपा अध्यक्ष ने कहा कि भगवान के लिये सब समान हैं. भारतीय जनता पार्टी ने इस फैसले को लेकर अभी कोई टिप्पणी नहीं की है. पार्टी ने कल कहा था कि वह अभी फैसले का अध्ययन कर रही है.

शुक्रवार को आया था ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ऐतिहासिक सुनाते हुए केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर लगी रोक को खत्म कर दिया है.  सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने 4-1 (पक्ष-विपक्ष) के हिसाब से महिलाओं के पक्ष में फैसला सुनाया.

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मंदिर प्रवेश में लगी रोक को हटाने का फैसला पढ़ते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि आस्था के नाम पर लिंगभेद नहीं किया जा सकता है. कानून और समाज की नजर में सभी बराबर हैं. महिलाओं के साथ भेदभाव उनके सम्मान को कम करता है. ज्ञात हो कि पांच जजों की बेंच में CJI दीपक मिश्रा, जस्टिस चंद्रचूड़, जस्टिस नरीमन, जस्टिस खानविलकर ने महिलाओं के पक्ष में एक मत से फैसला सुनाया. जबकि जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने सबरीमाला मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया.

प्रवेश पर क्यों थी रोक ?

केरल के पत्थनमथिट्टा जिले के पश्चिमी घाट की पहाड़ी पर सबरीमाला मंदिर स्थित है. सबरीमाला मंदिर प्रबंधन की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि 10 से 50 वर्ष आयु तक की महिलाओं के प्रवेश पर इसलिए रोक लगायी गयी है क्योंकि मासिक धर्म के समय वे शुद्धता बनाए नहीं रख सकतीं.

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