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प्रधानमंत्री से बेखौफ होकर तर्क करने वाले नेतृत्व की देश को जरुरत है- #Murli_Manohar_Joshi

New Delhi: बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी का मानना है कि देश को एक ऐसे नेतृत्व की जररुरत है, जो निडर होकर प्रधानमंत्री के साथ सैद्धांतिक मुद्दों पर बहस कर सके, बगैर ये सोचे की पीएम नाराज होंगे या खुश.

मुरली मनोहर जोशी ने ये भी कहा है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के अहम मुद्दों पर लगभग सभी राजनीतिक पार्टियों में दलगत राजनीति से परे होकर गंभीर विचार विमर्श की परंपरा लगभग खत्म हो गयी है और इस परंपरा को फिर से कायम करने की जरूरत है.

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पूर्व केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता एस जयपाल रेड्डी की याद में मंगलवार को आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुये जोशी ने अपने विचार रखें.

‘पीएम के साथ बेखौफ तर्क करनेवाले नेता की जरुरत’

दिवंगत नेता रेड्डी को याद करते हुए मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि आज देश को ऐसे नेता की जरुरत है, जो निडर होकर सिद्धातों पर प्रधानमंत्री से बात कर सके. और बगैर किसी चिंता के विचार व्यक्त कर सकें.

बीजेपी नेता ने कहा, ‘मैं ऐसा समझता हूं कि आजकल ऐसी नेतृत्व की बहुत आवश्यकता है जो सिद्धांतों के साथ बेबाकी के साथ और बिना कुछ इस बात की चिंता किए हुए प्रधानमंत्री नाराज होंगे या खुश होंगे, अपनी बात साफ साफ कहते हैं, उनसे बहस करते हैं.’

‘अहम मसलों पर विचार-विमर्श का सिलसिला टूटा’

90 के दशक की शुरुआत में रेड्डी से अपने जुड़ाव को मुरली मनोहर जोशी ने याद करते हुए बताया कि दोनों ही सांसद एक फोरम के सदस्य थे.

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उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकार (आइपीआर) जैसे अहम मुद्दों पर रेड्डी एवं वामदल सहित अन्य दलों के नेताओं की मौजूदगी वाले विभिन्न नेताओं के समूहों (फोरम) का जिक्र करते हुये कहा कि इन समूहों में दलगत विचारधारा से हटकर विचार विमर्श होता था.

आगे कहा कि दलगत राजनीति से परे हटकर देशहित से जुड़े अहम मुद्दों पर विचार विमर्श कर एकराय बनाने की कोशिशें थम गयी हैं.

जोशी ने कहा, ‘‘कुछ मामलों में माकपा के नेता सीताराम येचुरी अपने नाम के अनुरूप ‘सीताराम’ का ध्यान रखकर हमारा (भाजपा) साथ देते थे, और कभी-कभी हम भी उनका (वामपंथी विचारधारा) साथ देते थे.’’

उन्होंने कहा कि ‘‘ये जो एक फोरम था जिसमें एक समझ बनी थी कि विभिन्न पार्टियों के लोग कुछ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मसलों पर एकराय बनाने की कोशिश करते थे, ये कोशिशें भी कम हो गयी हैं, लगभग खत्म हो गयी हैं, उन्हें जागृत करने की जरूरत है.’’

‘दलगत राजनीति से ऊपर है देश’

वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, ‘‘कुछ ऐसे प्रश्न हैं जो देश और कुछ मामलों में विश्व के लिये महत्वपूर्ण हैं. इन पर विचार विमर्श होना, न सिर्फ जनतंत्र के लिये महत्वपूर्ण है बल्कि देश के भविष्य के लिये भी महत्वपूर्ण है. उस तरफ ध्यान देने की जरूरत है. यही रेड्डी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी.’’

उन्होंने कहा कि इस तरह के विचार विमर्श, जिसे दलगत राजनीति से हटकर अपनी पार्टी से संबंधों को कुछ समय के लिये परे रखकर देश की समस्याओं पर गहराई के साथ विचार करने की कोशिश पुन: शुरु होनी चाहिये.

रेड्डी की याद में आयोजित संस्मरण सभा में उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी, भाकपा के डी राजा, वरिष्ठ समाजवादी नेता शरद यादव और कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने शिरकत की.

गौरतलब है कि कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी का निधन 28 जुलाई को हैदराबाद में हो गया था.

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