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कितने नाम गिनाएं हम, जो मारे गए, लेकिन क्या उन्हें कभी इंसाफ मिलेगा?

सीनियर क्राइम जर्नलिस्ट अखिलेश कुमार सिंह के ब्लॉग पोस्ट से साभार.

ब्रह्मदेव सिंह, मोती लाल बास्के, रोशन होरो…. नाम कई हैं, जो इस दुनिया में नहीं हैं. भाकपा माओवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में ग्रामीण खासकर युवा शिकार होते रहे हैं. ये चंद नाम हैं, मगर ऐसे नामों की फेरहिस्त लंबी है. सिलसिला शायद ही आगे भी रुके. कभी फर्जी सूचनाओं पर तो कभी ग्रामीणों को स्वत: ही नक्सली मानकर सुरक्षाबल जजमेंटल होते रहे हैं. शनिवार यानि 12 जून 2021 को भी कुछ ऐसा ही हुआ. लातेहार पुलिस को सूचना मिली थी कि छोटू खेरवार का दस्ता गारू इलाके में मूवमेंट कर रहा. अभियान शुरू हुआ. लेकिन पीरी जंगल में अभियान में शामिल सुरक्षबलों ने माओवादियों के बजाय शिकार करने निकले युवकों की टोली को शिकार बना लिया. पुलिस फायरिंग में ब्रह्मदेव सिंह नाम के युवक की मौत हो गई. पुलिस रिकार्ड में ब्रह्मदेव का नाम किसी नक्सली रिकार्ड या अपराधिक कृत्य में दर्ज नहीं है.

 

याद ही होगा रोशन, पुलिस ने माफी मांगी थी, लेकिन दोषी को सजा मिलने का इंतजार

20 मार्च 2020 पीएलएफआई उग्रवादियों की सूचना पर पुलिस मुरहू के इलाके में अभियान चला रही थी. पुलिसिया अभियान से बेफ्रिक रोशन होरो अपनी बाइक से ढ़ोल बनवाने के लिए चमड़ा लेकर बाजार जा रहा था. रास्ते में सीआरपीएफ के जवान ने रोशन को गोली मार दी. मौके पर ही रोशन की मौत हो गई. खूंटी पुलिस ने ही नहीं बल्कि तत्कालीन डीजीपी एमवी राव तक ने घटना को लेकर माफी मांगी. रटी- रटायी थ्योरी दुहराई गई कि सुरक्षाबलों ने रोशन को रुकने को कहा था, लेकिन रुकने के बजाय वह भागने लगा. जिसके बाद मजबूरन सुरक्षाबलों ने फायरिंग की, जिसमें रोशन की मौत हो गई. लेकिन सच्चाई इससे इतर थी.सीआईडी ने जब केस का अनुसंधान शुरू किया तो तथ्य सामने आया कि रोशन को दूर से नहीं, बल्कि सिर में सटाकर गोली मारी गई थी. बहरहाल, 24 जून 2020 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रोशन के परिजनों से मिले थे, परिवार को दस लाख का मुआवजा पर नौकरी के वादे किए गए थे. हालांकि, दोषी जवान को सजा मिलेगी या नहीं यह भविष्य की ही गर्भ में है.

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मोतीलाल को मारने का आरोप असिस्टेंट कमांडेंट पर

चाईबासा के घोर माओवाद प्रभाव वाला इलाका है बलिबा. 28 जून 2011 को गांव के मंगल होनहागा खेत से काम करके लौटे. मंगल की पत्नी के बयान के मुताबिक, गांव में दोपहर में सीआरपीएफ और पुलिस की टुकड़ी आयी. सुरक्षाबलों ने 20-22 ग्रामीणों के हाथ पीछे बांध दिए. पूरी रात खुले आसमान के नीचे सभी को रखा गया. 29 जून को सुरक्षाबल के सभी लोगों को पैदल जंगल के रास्ते ले गए. एक जुलाई को बाहदा जंगल में मंगल होनहागा को गोली मार दी गई, जिससे मंगल की मौत हो गई. हत्याकांड के बाद ग्रामीण सीआरपीएफ पर हत्या का आरोप लगाते थे, जबकि हत्याकांड के बाद 30 जून 2011 को सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट शंभु कुमार विश्वास ने छोटानागरा थाने में एक एफआईआर दर्ज करवायी थी. एफआईआर में मंगल होनहागा की हत्या का आरोप 100 अज्ञात माओवादियों पर लगाया गया था. लेकिन जांच में सीआईडी ने पाया कि शंभु कुमार विश्वास की गोली से ही मंगल की मौत हुई थी. सीआईडी ने शंभु विश्वास का वारंट भी लिया. कार्रवाई के लिए सीआरपीएफ मुख्यालय से पत्राचार किया गया, लेकिन अबतक मामले में कार्रवाई नहीं हो पायी है.

 

टीपीसी का सहयोगी बता सलमान को मारी गई थी गोली

चतरा के टंडवा में पुलिस ने मो सलमान नाम के युवक को गोली मार दी थी. पुलिस पर आरोप था कि स्थानीय पुलिस जबरन वसूली के लिए मो सलमान पर दबाव डाल रही थी. पुलिस की बात नहीं मानने पर घर से ही निकालकर सलमान की हत्या कर दी गई थी. हत्याकांड को बाद में सीबीआइ ने टेकओवर किया था, स्थानीय थानेदार समेत अन्य पुलिसकर्मियों पर सीबीआई ने चार्जशीट दायर की थी.

 

घटनाओं पर विराम नहीं

-चाईबासा के छोटानागरा थाना क्षेत्र में 2011 में पुलिस की गोली से सोमा गुड़िया की मौत हुई थी.

 

-2014 में गुमला के गुड़दड़ी क्षेत्र में पुलिस की गोली से दो मजदूर मारे गये थे.

 

– सितंबर 2014 को पुलिस ने गुमला बिशुनपुर के बेती स्कूल के पास नक्सली समझ कर मजदूरों को ले जा रहे बॉक्साइट ट्रक पर फायरिंग कर दी थी. इस घटना में छह मजदूरों को गोली लगी थी.इसमें चालक हीरालाल उरांव (24), एक मजदूर नीलेश उरांव (30) की मौके पर ही मौत हो गई थी .जबकि चार मजदूर घायल हो गए थे.इनमें से गंभीर रूप से घायल दो मजदूरों सुनेश्वर उरांव और अशोक उरांव को गंभीर स्थिति में हेलिकॉप्टर से अपोलो लाया गया था.

 

– पलामू में सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया गांव में 8 जून 2015 की देर रात करीब तीन घंटे तक कथित पुलिस और नक्सली मुठभेड़ चली थी. जिसमें पुलिस ने 12 माओवादी को मार गिराने का दावा किया था . ये भी बताया गया था की इस मुठभेड़ की शुरुआत नक्सलियों की तरफ से हुई थी. जिसका जवाब पुलिस की ओर से दिया गया. घटनास्थल से पुलिस ने एक क्षतिग्रस्त स्कॉर्पियो कार और 8 रायफल सहित 250 कारतूस बरामद किेए थे. मामले में सीबीआई जांच चल रही है, इस मुठभेड़ में कथित तौर पर पांच नाबालिगों की भी मौत हुई थी.

 

– गिरिडीह जिले के ढोलकट्टा के निकट 9 जून 2017 को माओवादियों से हुए कथित पुलिस मुठभेड़ में मोतीलाल बास्के मारे गये गए थे.इसको लेकर बास्के के परिजनों ने घटना के बाद तत्कालीन नेता-प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन से बात की थी. इसके बाद हेमंत ने मीडिया से बात की और तत्कालीन सरकार पर ग्रामीण इलाकों में निर्दोष आदिवासियों की हत्या करने का आरोप लगाया था. हत्याकांड को लेकर 17 जून 2017 को गिरिडीह व मुधबन बंद बुलाया गया था. इसके साथ ही चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा बनायी गयी थी. इस मामले में माओवादी संगठन ने भी एक प्रेसबयान जारी कर कहा था कि मोतीलाल बास्के उसके संगठन से जुड़े नहीं थे और पुलिस ने निर्दोष की हत्या की है.

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