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अमरलता की तरह झारखंड में पनप रहा करप्शन, सिस्टम पर सरकार का कंट्रोल ही नहीं

कर्ज से उबरने के लिये अब तक नहीं किया बजट में प्रावधान, इंफ्रास्ट्रक्चर पर जो खर्च किया उससे भी नहीं मिल रहा रेवेन्यू

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RK Gadodiya

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झारखंड में करप्शन अमरलता की तरह पनप रहा है. जिस तरह अमरलता पेड़ से लिपट कर बढ़ती जाती है, और अंत में पेड़ को ही नष्ट कर देती है, ठीक ऐसा ही हाल झारखंड का है. झारखंड में भी अमरलता की तरह करप्शन बढ़ते ही जा रहा है.

यह कहना है राज्य के वरिष्ठ सीए (चार्टर्ड एकाउंटेंट) सह झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व सचिव आरके गाड़ोदिया का. उन्होंने राज्य के वित्तीय हालात पर अपनी बात रखते हुए कहा कि आज जो बजट के आकार के बराबर कर्ज (85234 करोड़) हो गया है, उसके पीछे सरकार की ही खामियां रही हैं. कभी भी सरकार ने कर्ज चुकता के लिये बजट में कोई प्रावधान नहीं किया. सिस्टम पर कोई कंट्रोल ही नहीं है.

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इंफ्रास्ट्रक्चर पर जो खर्च हुआ उससे भी नहीं मिल रहा रेवेन्यू

वरिष्ठ सीए ने कहा कि राज्य सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर बेतहाशा खर्च करती जा रही है. समय पर प्रोजेक्ट भी पूरा नहीं हो पा रहा है, जिससे प्रोजेक्ट कॉस्ट भी बढ़ गया. होना यह चाहिये था कि समय पर प्रोजेक्ट पूरा हो और उससे रेवेन्यू भी सरकार को मिले.

इसका ताजातरीन उदाहरण राजधानी में ही दिख रहा है. सरकार ने अटल वेंडर मार्केट तो बना लिया. छह-सात महीने पहले ही यह तैयार हो गया. अगर छह-सात महीने इस पर किराया भी लग जाता तो सरकार के खजाने में करोड़ रुपये से अधिक की राशि आती, लेकिन उल्टे सरकार को इसके मेंटेनेंस का भी खर्च वहन करना पड़ रहा है.

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सेंट्रल गवर्नमेंट का भी होना चाहिये कंट्रोल

राज्य पर सेंट्रल गवर्नमेंट का भी कंट्रोल होना चाहिये. अगर सेंट्रल गवर्नमेंट हिसाब मांगे तो काफी हद तक खर्च पर अंकुश लग सकता है. वर्तमान परिस्थिति में ऐसा कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा है. राज्य सरकार के लिये कर्ज चुकाना बड़ी चुनौती बन गई है. इसके पीछे वजह यह है कि राज्य सरकार के पास आमदनी के स्त्रोत काफी कम है. कई विभागों के टैक्स कलेक्शन में भी नुकसान ही हो रहा है.

जीएसटी से भी फायदा नहीं हो रहा

राज्य सरकार को जीएसची (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) से भी उतना फायदा नहीं हो पा रहा है. इसके पीछे वजह यह है कि वर्तमान 70 फीसदी पक्का और 30 फीसदी कच्चा काम हो रहा है.

हालांकि इनकम टैक्स एक्ट से इस मसले को कंट्रोल किया जा रहा है कि 10 हजार से अधिक का कैश पेमेंट नहीं कर सकते. इस क्षेत्र में भी एकाउंटेबिलिटी होनी चाहिये. मोटर पार्ट्स इंडस्ट्रीज के बंद होनो से भी जीएसटी में काफी नुकसान हो रहा है.

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टैक्स कलेक्शन में भी वृद्धि नहीं

राज्य सरकार के प्रयासों के बावजूद टैक्स कलेक्शन में भी वृद्धि नहीं हो पाई है. जिस क्षेत्र से जितना राजस्व आना चाहिये, उससे भी राजस्व नहीं मिल पा रहा है. वाणिज्य कर विभाग, राजस्व विभाग, निबंधन और उत्पाद विभाग भी राजस्व वूसली में पीछे रह गये हैं. सरकार को नुकसान ही हो रहा है. संभावना यह भी है कि कर्ज चुकता करने के लिये सरकार फिर कोई नया कर जनता पर थोप दे.

(लेखक झारखंड के वरिष्ठ सीए हैं, ये उनके निजी विचार हैं)

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