न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

अमरलता की तरह झारखंड में पनप रहा करप्शन, सिस्टम पर सरकार का कंट्रोल ही नहीं

कर्ज से उबरने के लिये अब तक नहीं किया बजट में प्रावधान, इंफ्रास्ट्रक्चर पर जो खर्च किया उससे भी नहीं मिल रहा रेवेन्यू

773

RK Gadodiya

झारखंड में करप्शन अमरलता की तरह पनप रहा है. जिस तरह अमरलता पेड़ से लिपट कर बढ़ती जाती है, और अंत में पेड़ को ही नष्ट कर देती है, ठीक ऐसा ही हाल झारखंड का है. झारखंड में भी अमरलता की तरह करप्शन बढ़ते ही जा रहा है.

यह कहना है राज्य के वरिष्ठ सीए (चार्टर्ड एकाउंटेंट) सह झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व सचिव आरके गाड़ोदिया का. उन्होंने राज्य के वित्तीय हालात पर अपनी बात रखते हुए कहा कि आज जो बजट के आकार के बराबर कर्ज (85234 करोड़) हो गया है, उसके पीछे सरकार की ही खामियां रही हैं. कभी भी सरकार ने कर्ज चुकता के लिये बजट में कोई प्रावधान नहीं किया. सिस्टम पर कोई कंट्रोल ही नहीं है.

इसे भी पढ़ें – सीएनटी ही नहीं आर्मी की जमीन पर भी माफिया ने कर लिया कब्जा और देखता रहा प्रशासन-1

इंफ्रास्ट्रक्चर पर जो खर्च हुआ उससे भी नहीं मिल रहा रेवेन्यू

वरिष्ठ सीए ने कहा कि राज्य सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर बेतहाशा खर्च करती जा रही है. समय पर प्रोजेक्ट भी पूरा नहीं हो पा रहा है, जिससे प्रोजेक्ट कॉस्ट भी बढ़ गया. होना यह चाहिये था कि समय पर प्रोजेक्ट पूरा हो और उससे रेवेन्यू भी सरकार को मिले.

इसका ताजातरीन उदाहरण राजधानी में ही दिख रहा है. सरकार ने अटल वेंडर मार्केट तो बना लिया. छह-सात महीने पहले ही यह तैयार हो गया. अगर छह-सात महीने इस पर किराया भी लग जाता तो सरकार के खजाने में करोड़ रुपये से अधिक की राशि आती, लेकिन उल्टे सरकार को इसके मेंटेनेंस का भी खर्च वहन करना पड़ रहा है.

इसे भी पढ़ें – डीजीपी की पत्नी ने ली जमीन तो खुल गया टीओपी और ट्रैफिक पोस्ट, हो रहा पुलिस के नाम व साइन बोर्ड का इस्तेमाल

सेंट्रल गवर्नमेंट का भी होना चाहिये कंट्रोल

राज्य पर सेंट्रल गवर्नमेंट का भी कंट्रोल होना चाहिये. अगर सेंट्रल गवर्नमेंट हिसाब मांगे तो काफी हद तक खर्च पर अंकुश लग सकता है. वर्तमान परिस्थिति में ऐसा कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा है. राज्य सरकार के लिये कर्ज चुकाना बड़ी चुनौती बन गई है. इसके पीछे वजह यह है कि राज्य सरकार के पास आमदनी के स्त्रोत काफी कम है. कई विभागों के टैक्स कलेक्शन में भी नुकसान ही हो रहा है.

जीएसटी से भी फायदा नहीं हो रहा

राज्य सरकार को जीएसची (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) से भी उतना फायदा नहीं हो पा रहा है. इसके पीछे वजह यह है कि वर्तमान 70 फीसदी पक्का और 30 फीसदी कच्चा काम हो रहा है.

हालांकि इनकम टैक्स एक्ट से इस मसले को कंट्रोल किया जा रहा है कि 10 हजार से अधिक का कैश पेमेंट नहीं कर सकते. इस क्षेत्र में भी एकाउंटेबिलिटी होनी चाहिये. मोटर पार्ट्स इंडस्ट्रीज के बंद होनो से भी जीएसटी में काफी नुकसान हो रहा है.

इसे भी पढ़ें – जमीन दलाल की फॉर्चूनर, पूर्व ट्रैफिक SP संजय रंजन, सिमडेगा SP और पूर्व DGP डीके पांडेय का क्या है कनेक्शन !

टैक्स कलेक्शन में भी वृद्धि नहीं

राज्य सरकार के प्रयासों के बावजूद टैक्स कलेक्शन में भी वृद्धि नहीं हो पाई है. जिस क्षेत्र से जितना राजस्व आना चाहिये, उससे भी राजस्व नहीं मिल पा रहा है. वाणिज्य कर विभाग, राजस्व विभाग, निबंधन और उत्पाद विभाग भी राजस्व वूसली में पीछे रह गये हैं. सरकार को नुकसान ही हो रहा है. संभावना यह भी है कि कर्ज चुकता करने के लिये सरकार फिर कोई नया कर जनता पर थोप दे.

(लेखक झारखंड के वरिष्ठ सीए हैं, ये उनके निजी विचार हैं)

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
क्लर्क नियुक्ति के लिए फॉर्म की फीस 1000 रुपये, कितना जायज ? हमें लिखें..
झारखंड में नौकरी देने वाली हर प्रतियोगिता परीक्षा विवादों में घिरी होती है.
अब JSSC की ओर से क्लर्क की नियुक्ति के लिये विज्ञापन निकाला है.
जिसके फॉर्म की फीस 1000 रुपये है. यह फीस UPSC के जरिये IAS बनने वाली परीक्षा से
10 गुणा ज्यादा है. झारखंड में साहेब बनानेवाली JPSC  परीक्षा की फीस से 400 रुपये अधिक. 
क्या आपको लगता है कि JSSC  द्वारा तय फीस की रकम जायज है.
इस बारे में आप क्या सोंचते हैं. हमें लिखें या वीडियो मैसेज वाट्सएप करें.
हम उसे newswing.com पर  प्रकाशित करेंगे. ताकि आपकी बात सरकार तक पहुंचे. 
अपने विचार लिखने व वीडियो भेजने के लिये यहां क्लिक करें.

you're currently offline

%d bloggers like this: