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जीरो टॉलरेंस की सरकार में भी भ्रष्टाचार के 220 इंजीनियरों पर नहीं हो रही कार्रवाई

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Ranchi :  सीएम रघुवर दास कहते हैं कि सरकार जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है. लेकिन धरातल पर ऐसा कहीं नहीं दिख रहा है. झारखंड सरकार के कई विभागों में काम करने वाले 220 इंजीनियर दागी हैं. इन इंजीनियरों पर भ्रष्‍टाचार के कई मामले चल रहे हैं. इसकी शिकायत भी सरकार से की जा चुकी है. लेकिन भ्रष्‍टाचार के कई मामले चलने के बावजूद इनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. वहीं, अब तो सरकार इनकी पोस्टिंग मलादार जगहों पर कर रही है. इस बात का खुलासा आरटीआई से मांगी गई जानकारी से हुआ है.

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किसी पर नहीं हो रही है कार्रवाई

आरटीआई कार्यकर्ता विजय शंकर नायक ने बताया कि खुलासे के बाद दागी इंजीनियरों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई थीलेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल लीपापोती कर इन्हीं इंजीनियरों को मलाईदार विभाग बांटा जा रहा है. इन इंजीनियरों पर कई गंभीर आरोप लगे हैं. किसी पर वित्तीय अनियमितता का आरोप हैतो कोई एसीबी व सीबीआई केस में फंसा है. इसके अलावा सरकार के कई ऐसे विभाग हैंजिनमें कार्यरत कई इंजीनियर दागदार हैं. मगर इन सबके बावजूद सरकारी सिस्टम कहीं न कहीं ऐसे इंजीनियरों पर कार्रवाई करने में लापरवाही बरत रहा है.

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विकास कार्यों के टेंडर में खेल

झारखंड में जितने में विकास का काम हो रहा है. उसमें कमीशन का खेल चल रहा है. इन इंजीनियरों की इसमें शामिल भ्रष्‍टाचार के मामलों में बडी भूमिका है. जिन 220 इंजीनिरों का नाम सामने आया है. उनमें जल संसाधन विभाग के 92ग्रामीण विकास के 55 और पथ निर्माण विभाग के 73 इंजीनियर शामिल हैं.

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जानकारी के अनुसार,  इन विभागों के शिकायतों का अंबार लगा हुआ है. इन विभागों में होने वाले  कार्यों पर खर्च होने वाली राशि का इस्टीमेट करीब 20 प्रतिशत बढ़ाकर बनाया जा रहा है. इसके बदले ठेकेदार या एजेंसी से प्रॉसेसिंग चार्ज(पीसी) के रूप में ली जाने वाली घूस की रकम को बढ़ाकर10 प्रतिशत तक कर दिया गया है.

सरकार के वादों और इरादों से स्पष्ट प्रावधान है कि इन दागी इंजीनियरों पर 105 दिनों के भीतर कार्रवाई की जाय. लेकिन लंबे समय से इन्हें प्रोन्नति देकर उपकृत किया जा रहा है. झारखंडी सूचना अधिकार मंच के विजय शंकर नायक ने सरकार से दागी इंजीनियरों पर कार्रवाई करने की मांग कई बार की है. सारे दस्तावेज मुहैया कराये हैंलेकिन नतीजा सिफर रहा है.

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सीएम और राज्‍यपाल को भी लिखी है चिट्ठीनहीं हुई कार्रवाई

आरटीआई एक्टिविस्ट विजय शंकर नायक ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति से लेकर स्टेट के सीएम और गवर्नर तक को पत्र लिखा हैलेकिन सरकार के स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की गई.

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