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राज्य निशक्तता कार्यालय और एनसीटीई के बीच दिव्यांग बच्चों की शिक्षा को लेकर पत्राचार, समस्या जस की तस

एनसीटीई और भारतीय पुनर्वास परिषद् को  स्पेशल शिक्षकों की मान्यता और दिव्यांग शिक्षा पर लिखा गया था पत्र

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Ranchi : पिछले दिनों राज्य निशक्तता आयुक्त की ओर से राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् एनसीटीई और भारतीय पुनर्वास परिषद् को पत्र लिखा गया. इस पत्र में राज्य निशक्तता आयुक्त ने स्पेशल शिक्षकों को कक्षा एक से आठ तक ही मान्य करने और दिव्यांग जनों को कक्षा आठ के बाद शिक्षा में होने वाली समस्या के संबध में बात की. राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् एनसीटीई और भारतीय पुनर्वास परिषद से इस संबध में पंद्रह दिनों के भीतर जवाब भी मांगा गया था.

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एनसीटीई के जवाब से निशक्तता आयुक्त कार्यालय में असमंजस की स्थिति

18 फरवरी को एनसीटीई ने राज्य निशक्तता आयुक्त को इस संबध में जवाब दिया. जिसमें लिखा गया है कि 1997 के स्पेशल बीएड और डीएड करने वाले शिक्षक दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने के लिए मान्य होंगे. ऐसे में निशक्तता आयुक्त कार्यालय असमंजस में है. एनसीटीई की ओर से इस संबध में उचित जवाब नहीं दिया गया.

साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि 1997 के बाद से स्पेशल बीएड और डीएड करने वाले शिक्षक छात्रों को पढ़ा सकते है या सिर्फ 1997 के शिक्षक ही मान्य है. इस संबध में फिर से पत्र एनसीटीई को लिखा गया है. वहीं भारतीय पुनर्वास परिषद् की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं दिया गया है.

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क्या लिखा था पत्र में

राज्य निशक्तता आयुक्त की ओर से इस पत्र में बताया गया कि एनसीटीई और भारतीय पुनर्वास परिषद की ओर से स्पेशल शिक्षकों को सिर्फ कक्षा एक से आठ तक ही पढ़ाने की मान्यता दी गयी है. जो उचित प्रतीत नहीं होता. जबकि भारतीय पुनर्वास परिषद् की प्रस्तावना में दिव्यांग बच्चों के समावेशी विकास की बात की गयी है. परिषद् की ओर से ही दिव्यांग जनों के शिक्षण प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की गयी है. वहीं साल 2015 में एनसीटीई और भारतीय पुर्नावास परिषद् ने संयुक्त रूप से हस्ताक्षर किये. जिसके तहत सामान्य बच्चों को स्पेशल शिक्षक पढ़ा सकते हैं.

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सभी डीएसई और डीईओ को पत्र लिखा गया 

लेकिन दिव्यांग बच्चों को सामान्य शिक्षकों के नहीं पढ़ाने का प्रावधान किया गया. सवाल खड़े करते हुए इस पत्र में लिखा गया कि क्या दिव्यांग बच्चे सिर्फ कक्षा एक से आठ तक ही पढ़ सकते हैं. ऐसे में मुख्य धारा से इन्हें कैसे जोड़ा जा सकता है.

वहीं योग्यता रखने वाले स्पेशल शिक्षक भी इन नियमों के कारण बच्चों को नहीं पढ़ा पाते और बच्चे भी वंचित हो रहे हैं. राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् एनसीटीई और भारतीय पुनर्वास परिषद् के साथ माध्यमिक स्कूली शिक्षा साक्षरता विभाग झारखंड, सभी डीएसई और डीईओ को भी पत्र लिख कर दिव्यांग जनों की शैक्षणिक समस्या से अवगत कराया गया है.

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