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निगम का फॉगिंग रोस्टर दिखावे का, नतीजा: बढ़ी मलेरिया मरीजों की तादाद

पार्षदों का आरोप, फॉगिंग को लेकर निगम का बना रोस्टर अब दबा है सरकारी फाइलों में 

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Ranchi: कुछ माह पहले रांची नगर क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में डेंगू और चिकनगुनिया बीमारी के फैलने के बाद निगम के तरफ से एक रोस्टर बनायी गयी थी. जो कि अब केवल दिखावे का बनता जा रहा है. रोस्टर के तहत निगम के निर्धारित वार्ड में प्रत्येक सप्ताह फॉगिंग करने की बात कही गयी थी. इस रोस्टर के तहत एक मशीन से आठ वार्डों में फॉगिंग किया जाना था. विभिन्न वार्ड के मोहल्लों में फॉगिंग कराने की जिम्मेवारी संबंधित वार्ड के पार्षदों पर तय की गयी थी. लेकिन अब निगम के अधिकारी उसी रोस्टर का पालन करते नहीं दिख रहे हैं. यूं कहें कि निगम के अधिकारियों का ध्यान भी इस ओर नहीं है, तो गलत नहीं है. इतना ही नहीं, फांगिग नहीं होने का असर शहर के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में भी दिखने को मिल रहा है. सूचना, के मुताबिक रिम्स में गत दो माह के दौरान मच्छर काटने से मलेरिया और डेंगू से पीड़ित मरीजों की तादाद काफी बढ़ी है. सूत्रों के मुताबिक फांगिग करने वाले 11 में से 5 फॉगिंग मशीन भी खराब हो चुकी है. इसकी मरम्मती की ओर निगम के अधिकारियों का तनिक भी ध्यान नहीं है. दूसरी ओर निगम के अधिकारी महज पांच फॉगिंग मशीन से ही शहर में नियमित फॉगिंग का भी दावा कर रहे हैं.

दो माह में रिम्स में बढ़ी है मलेरिया मरीजों की संख्या

इस मामले पर राजधानी के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स के डेंगू यूनिट से मलेरिया और डेंगू से पीड़ित मरीजों की जानकारी ली गयी. पता चला कि गत दो महिनों ( 20 सितम्बर से 20 नवंबर) के दौरान रिम्स में करीब 225 ऐसे मरीजों अस्पताल में भर्ती हुए हैं. हालांकि अस्पताल प्रबंधन की तरफ से ऐसे मरीजों के लिए हर संभव इलाज किया जा रहा है. ऐसे मरीजों के लिए अस्पताल प्रबंधकों की तरफ से मच्छरदानी की व्यवस्था की गयी है. हालांकि मरीजों की बढ़ती तादाद को देख कहा जा सकता है कि आज भी शहर के विभिन्न वार्डो में नियमित फॉगिंग का कार्य नहीं किया जा रहा है.

फोन करने से भी नहीं मिलता सकारात्मक जवाब

फॉगिंग के संबंध में विभिन्न वार्डो में रहने वाले लोगों का कहना है कि शहर के मुख्य चौक-चौराहों और मोहल्ले में नियमित कचरे का उठाव नहीं होने के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है. इसकी शिकायत के लिए कई बार निगम के आला अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से फोन पर की जाती है. लेकिन उनकी तरफ से किसी तरह का कोई सकारात्मक पहल देखने को नहीं मिलती है. मालूम हो कि रोस्टर बनाने के बाद निगम की तरफ से कहा गया था कि विभिन्न वार्डों में अगर फॉगिंग मशीन नहीं पहुंचती है तो निगम के सिटी मैनेजर मृत्युंजय कुमार के मोबाइल नंबर 9431104428 पर इसकी जानकारी दी जाये.

परेशानी है, फिर भी नियमानुसार हो रही है फॉगिंग

वार्डों में नियमित फांगिग नहीं होने के सवाल पर उक्त सिटी मैनेजर का कहना है कि रोस्टर बनाने के वक्त निगम के पास कुल 11 फॉगिंग वाहन उपलब्ध थे. उसमें से करीब 6 वाहन बरसात के मौसम के दौरान खराब हो चूके हैं, जिसकी मरम्मत का कार्य अभी चल रहा है. वहीं बचे 5 वाहनों से वार्डों में फॉगिंग कार्य किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि दिक्कत यह है कि राजधानी होने के नाते शहर में कई तरह के सरकारी कार्यक्रम होते रहते हैं, जिसके कारण ऐसे आयोजनों में 2 वाहनों को फॉगिंग कार्य में लगाना पड़ता है. ऐसे में 3 फॉगिंग वाहनों से वार्डों में फॉगिंग का काम नियमित रूप से हो रहा है. हालांकि, नियमानुसार 15-15 दिनों में फॉगिंग करने का प्रावधान है. इसी के अनुसार भी फॉगिंग का नियमित रूप से होता रहा है.

फेल है निगम का फॉगिंग रोस्टर प्लान: नाजिमा रजा

वार्डों में फॉगिंग नहीं होने की बात पर वार्ड 16 की पार्षद नाजिमा रजा का कहना है कि फॉगिंग करने के लिए निगम का बनाया रोस्टर पूरी तरह से फेल है. उनके वार्ड में पिछले दो माह से फॉगिंग कार्य नहीं हुआ है. निगम बोर्ड की प्रतिमाह होने वाली बैठक के एक दिन पहले एंजेडा में ऐसे रोस्टर को तो बना दिया जाता है, लेकिन इसका कोई भी सकारात्मक हल नहीं दिखता है.

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दो माह बाद मंगलवार को किया गया फॉगिंग: अरूण झा

वार्ड 26 के पार्षद अरूण झा का कहना है कि उनके वार्ड में मंगलवार को फॉगिंग किया गया था. लेकिन यह फॉगिंग दो माह के बाद हुआ है. हो सकता है कि बीच में पर्व त्योहारों को लेकर कुछ अड़चन आयी हो. लेकिन देखना यह है कि रोस्टर के अनुरूप फॉगिंग होती है कि नहीं.

वीवीआईपी इलाकों में ही निगम चला रहा फॉगिंग वाहन : मो. एहतेशाम

फॉगिंग नहीं होने की बात करते हुए वार्ड 21 के पार्षद मो. एहतेशाम का कहना है कि दो दिन पहले उनके वार्ड में फॉगिंग कार्य हुआ था. लेकिन अगर रोस्टर की बात करें, तो तीन-चार माह से बड़ा तालाब, कुम्हार टोली समेत वार्ड 21 में के इलाकों में फॉगिंग बंद है. सिटी मैनेजर बेबुनियाद बातें कर रहे हैं. देखा जाये, तो निगम केवल अशोक नगर, अशोक बिहार, कांके जैसे वीवीआईपी इलाकों में ही फॉगिंग कार्य कर रहा है.

अधिकारियों को दी गयी है निर्देश, जल्द ठीक करें खराब मशीनें: संजीव विजयवर्गीय

फॉगिंग नहीं होने की जानकारी स्वीकार करते हुए डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय ने भी नाराजगी जतायी है. उन्होंने बताया है कि मशीन खराब होने की जानकारी उन्हें भी है, जिस कारण फॉगिंग रोस्टर का पालन सही तरीके से नहीं हो पा रहा है. निगम के अधिकारियों को इसकी हिदायत दी गयी है कि जल्द ही खराब पड़े मशीनों को बनाया जाएगा, ताकि शहर के लोगों को मच्छरों से निजात मिले.

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