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#CoronavirusOubreak : बंद हुए स्कूलों के बच्चों को MDM का कुकिंग कॉस्ट साढ़े 51 करोड़ आवंटित

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Ranchi: राज्य सरकार की ओर से कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए सभी स्कूलों को बंद किया गया है. इस दौरान राज्य के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को मध्यान भोजन का कुकिंग कॉस्ट देने का प्रस्ताव तैयार किया गया था.

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से कुकिंग कॉस्ट की राशि सभी जिला को आवंटित कर दी गयी है. मध्याह्न भोजन प्राधिकरण निदेशक आदित्य कुमार आनंद ने सभी जिला के उपायुक्त व जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र लिखकर मध्यान भोजन का कुकिंग कॉस्ट बच्चों को देने का निर्देश जारी किया है.

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30 अप्रैल तक की कुकिंग कॉस्ट

यह कुकिंग कॉस्ट 17 मार्च से 30 अप्रैल 2020 तक का है. मध्याह्न भोजन प्राधिकरण की ओर से जारी पत्र में सभी बच्चों को राशि देने संबंधी गाइडलाइन भी दिया गया है.

इस गाइडलाइन के मुताबिक 17 मार्च से 30 अप्रैल तक कुल 33 प्रस्तावित शैक्षणिक कार्य दिवस की राशि देनी है. इन 33 प्रस्तावित कार्य दिवस के अनुसार प्राथमिक कक्षा के बच्चों के लिए 4.48 रु एवं उच्च माध्यमिक कक्षा के लिए 6.71 रु आवंटित किये गये हैं.

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कुल आवंटित राशि 515452667 रुपये है. इसमें केंद्र की ओर से तीस करोड़ पचानवे लाख चौंतीस हज़ार पांच सौ बाइस रुपये और राज्य की ओर से 205918145 रुपये दिये गये हैं.

यह राशि शैक्षणिक सत्र 2019 20 के किसी भी माह में विद्यार्थियों की अधिकतम औसत उपस्थिति के आधार पर दी गयी है. सभी विद्यालय छात्रों को यह राशि संबंधित छात्र के खाते या उसके अभिभावक के बैंक खाते में देगी.

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जिनका खाता नहीं उन्हें प्रधानाध्यापक करेंगे भुगतान

राज्य के दुर्गम क्षेत्रों में अवस्थित विद्यालय जहां बैंक सुविधा नहीं है या छात्रों का बैंक अकाउंट नहीं है वैसे छात्रों के राशि का भुगतान संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक करेंगे.

इसके अतिरिक्त मध्याह्न भोजन प्राधिकरण निदेशक ने यह भी कहा है कि वित्तीय वर्ष 2019 विश्व में सूखाग्रस्त जिलों को 25 दिनों का अतिरिक्त मध्यान भोजन खाद्यान्न और कुकिंग कॉस्ट उपलब्ध कराया गया था.

सूखाग्रस्त के तहत 18 जिलों को राशि आवंटित की गयी थी. इस राशि का इस्तेमाल उक्त 18 जिलों ने नहीं किया है जो गलत है.

प्राधिकरण के अनुसार कुकिंग कॉस्ट के साथ बच्चों को उक्त अवधि का चावल भी देना है. ऐसे चावल का उठाव राज्य खाद्य गोदाम से करना है.

इसके लिए सभी स्कूलों को 42.50 रु प्रति क्विंटल की दर से राशि आवंटित की गयी है. स्कूलों के प्रधानाध्यापक को यह कहा गया है कि उक्त चावल का वितरण गांव टोला में जाकर करेंगे.

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