Corona_Updates

#Coronavirus : इधर आप खास धर्म के खिलाफ जहर उगल रहे हैं, उधर अरब देश की आपत्ति पर सफाई देनी पड़ रही विदेश मंत्रालय को

  • भारतीय राजदूत ने ट्वीट कर कहा- भेदभाव हमारी भावना के खिलाफ

New Delhi: भारत और यूएई गैर-भेदभाव के मूल्यों पर साझा रुख करते हैं. भेदभाव हमारे नैतिक ताने-बाने और कानून के खिलाफ है. यूएई में भारतीय नागरिकों को हमेशा यह याद रखना चाहिए. यह ट्वीट है यूएई में भारतीय राजदूत पवन कपूर का.

यह ट्वीट उस वक्त आया है जब कोरोना वायरस महामारी को लेकर भारत में मुसलमानों को निशाना बनाये जाने की खबरों को लेकर अरब जगत में नाराजगी बढ़ रही है.

उन्होंने प्रधानमंत्री के एक ट्वीट का हवाला दिया है जिसमें कहा गया है- कोविड-19 का वायरस किसी जाति, धर्म, रंग, पंथ, भाषा या सीमा को देख कर हमला नहीं करता है. इससे लड़ने में हमें एकता और भाईचारे को प्रधानता प्रदान करनी चाहिए. हम सभी इसमें एक साथ हैं.

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भारतीय मुसलमानों को टारगेट करने पर नाराजगी

ये ट्वीट उस वक्त आये हैं जब अरब देशों में जिसमें यूएई और कुवैत शामिल हैं, में भारत में मुसलिमों को टारगेट करने की खबरों पर गुस्सा जाहिर किया गया है.


इस्लामिक कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन के ह्यूमन राइट्स संस्था आइपीएचआरसी, जिसमें 57 इस्लामिक देश शामिल हैं ने रविवार को एक ट्वीट किया- अरब देशों के लोगों जिनमें यूएई के राज परिवार के सदस्य भी शामिल हैं, ने इस बात पर नाराजगी जतायी है कि भारत में तबलीगी जमात को भारत में कोरोना वायरस फैलाने के लिए सबसे बड़े जिम्मेदार के तौर पर माना जा रहा है.

भारत के प्रधानमंत्री ने भी रविवार को कहा कि इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए, कोविड-19 किसी जाति, धर्म, संप्रदाय या देश को देख कर हमला नहीं करता है.

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भारत सरकार ने जारी थी एडवाइजरी

प्रधानमंत्री का ट्वीट उस वक्त आया जब उत्तर प्रदेश के एक अस्पताल के खिलाफ पुलिस में एक शिकायत दरर्ज करायी गयी. उस अस्पताल ने अखबारों में विज्ञापन दिया था कि वह मुसलिम मरीजों को तभी एडमिट करेगा जब उसका कोरोना टेस्ट निगेटिव आयेगा.

पिछले दिनों भारत सरकार ने कोविड-19 से जुड़े सोशल मीडिया के पोस्ट पर एक एजवाइजरी भा जारी की थी.  उसमें लोगों से कहा गया था कि सोशल मीडिया में संक्रमित या क्वारंटाइन किये गये लोगों के नाम, उनकी पहचान या पता की जानकारी नहीं देनी है. साथ ही यह भी कहा गया था कि किसी तरह के भय या पैनिक को बढ़ावा न दें.

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