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कोरोना ने छीना था घर का इकलौता चिराग, डॉटर्स डे पर जन्मी बेटी ने लौटायी परिवार में खुशियां

Hazaribag: आज डॉटर्स डे है. इस मौके पर हुए बेटी के जन्म ने करीब एक माह से मायूसी और गम में जी रहे एक परिवार में खुशियां भर दी हैं. धनबाद जिले के कतरास, नवागढ़ स्थित मधुबन बस्ती में रहने वाला यह परिवार खुशी से फूले नहीं समा रहा है.

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कोविड-19 की दूसरी लहर ने विगत 12 मई को इस परिवार के इकलौते चिराग संदीप चौधरी को सदैव के लिए छीन लिया. उसके बाद घर के तीन सदस्य समेत उनकी गर्भवती पत्नी गम और मायूसी में जी रही थीं. लेकिन उस इकलौते चिराग की गर्भवती पत्नी ने डॉटर्स के दिन धनबाद जिले के कतरासगढ़ अवस्थित निचितपुर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में बेटी रूपी लक्ष्मी को जन्म दिया. तंदुरुस्त और दिवंगत पिता की झलक दिखने वाली इस परी बेटी को देख महीनों से मायूस इस परिवार के एक-एक सदस्य के चेहरे पर खुशियों और रौनक लौट आयीं.
परिवार के इकलौते चिराग संदीप चौधरी गिरिडीह जिले के शिवम आयरन स्टील लिमिटेड में बतौर फोरमैन प्राइवेट नौकरी करते थे.

वहीं वे कोरोना संक्रमित हुए थे और हजारीबाग स्थित एचजेडबी आरोग्यम मल्टिस्पेशेलिटी हॉस्पिटल में 10 दिनों तक जीवन और मौत से लड़ते हुए उन्होंने अंतिम सांस ली थी. वह अपने घर के एकलौते भाई और कमाऊ व्यक्ति थे. उनके निधन के बाद उन पर निर्भर करने वाले उनके वृद्ध माता-पिता, दादी, बहन और गर्भवती पत्नी काफी पीड़ा और दर्द के साथ मायूसी से जीने को मजबूर थे.

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यह जानकारी देते हुए हजारीबाग सदर विधायक मीडिया प्रभारी रंजन चौधरी ने बताया कि उनकी शादी धनबाद जिले के टुंडी में हुई थी. संदीप उनके इकलौते साले थे. परिवार में बेटी के जन्म होने से एक बार फिर खुशियां लौट आयी हैं और गम की जगह खुशियों ने ले लिया है.

स्व. संदीप चौधरी की बहन बीएड की छात्रा इंदु कुमारी ने बताया कि इकलौते भाई का साथ छूट जाने का गम तो हमेशा खलेगा. लेकिन हमेशा के लिए बुझ गई उनकी याद की चिराग इस बेटी के जन्म से आशा की लौ के रूप में हमारे बीच खुशियां लेकर आयी है. हमारे परिवार को ऐसा लग रहा है जैसे ईश्वर ने हमारे सूने घर में इस बेटी के रूप में भाइयों को पुनर्जन्म दिया है.

इंदु कुमारी ने परिवार की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधि और सरकार से मदद की गुहार भी लगाई है.

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