Opinion

कोरोना ने दुनियाभर की आत्ममुग्ध सरकारों को अपनी गलत नीतियों को छिपाने का मौका दे दिया है

विज्ञापन

FAISAL ANURAG

कोरोना वायरस संकट के इस दौर में विश्व सहयोग की उम्मीद करने वाले देशों को भारी निराशा का सामना करना पड़ रहा है. वैसे तो यह पहला संकट नहीं हैं जब लगभग सभी देशों को इससे लड़ने के लिए अपनी ही ताकतों का सहारा लेना पड़ रहा है. खास कर दुनिया की बड़ी ताकतों के रुख निराशाजनक हैं. और मुसीबत को भी आर्थिक व राजनीतिक लाभ-हानि के नजरिए से ही देखा जा रहा है.

अमरीका, चीन और रूस उन देशों में हैं जिनका विश्व पर अपना प्रभाव है. और दुनिया के अनेक ऐसे देश हैं जिनकी निर्भरता इन्हीं देशों पर है. अभी छोटे देशों के संकट की ज्यादा चर्चा नहीं हो रही है. इसलिए उनके संकटों की गंभीरता भी विमर्श में नहीं है.

advt

इसे भी पढ़ेंः #CoronaVirus : चीन में कोरोना वायरस से एक और की मौत, विदेश से लौटे 48 लोगों में संक्रमण की पुष्टि

वैसे भी दुनिया मुसीबतों में शायद ही किसी अन्य के मुसीबत को गंभीरता से ले. खास कर उन देशों के संकटों की भी चर्चा किये जाने की जरूरत है जो इस दौर में भी वैश्विक प्रतिबंधों के अमानवीयता के शिकार हैं.

पहले से ही ये देश भारी संकट का सामना कर रहे हैं. और अब तो कुछ ज्यादा ही उनका संकट गहन हुआ है. ईरान और वेनुजुएला का उदाहरण सामने है. इस वायरस के आक्रमण का संकट प्रभावी देशों की तुलना में कम ही है. लेकिन जो अनुमान लगाए गये. हैं वे तो भयावह तस्वीर की ओर संकेत कर रहे हैं. हालांकि प्लेग पैडेनेमिक की तुलना में इस वायरस से मौतों की संख्या कम ही है.

प्लेग पूंजीवाद की शुरुआत में तबाही का कारण बन उभरा था और लगभग 200 सालों तक उसका आतंक रहा है. प्लेग पर जीत विज्ञान के बड़े चमत्कार के रूप में है. भूमंडलीकरण का संकट के बीच कोरोना वायरस बन कर तबाही पैदा कर रहा है. इसमें भी कम ही संख्या में लेकिन मौतें हो रही हैं. लेकिन उसने बड़ी आर्थिक तबाही का भी मंजर पैदा कर दिया है.

adv

इस आर्थिक तबाही का असर क्या होगा इस पर अभी अनुमान ही लगाया जा सकता है. दुनियाभर के बाजार की तबाही बता रही है कि यह बहुआयामी है और राजनीतिक नेतृत्व के लिए इसे सुलझा पाना आसान नहीं है.

इसे भी पढ़ेंः #Seva4Society: भारती एंटरप्राइजेज ने 100 करोड़ रुपये की मदद का किया वादा, जेएसपीएल देगा 25 करोड़

वैसे कोरोना वायरस ने उन देशों के शासकों को राहत भी दी है जो आर्थिक अस्थिरता को संभाल नहीं पा रहे थे. उनकी गलत नीतियों को छुपाने का बड़ा अवसर इस बीमारी ने दे दिया है. आर्थिक विमर्श के तमाम संकटों से तात्कालिक राहत भी उनको दे दी है.

भारत समेत दुनिया की तमाम बड़ी इकोनामी कोरोना वायरस के प्रभाव के पहले से ही आर्थिक संकट का समाना कर रही थी. विश्व के स्तर पर यह बहस तेज हो गयी थी कि पिछली सदी के अंतिम डेढ दशकों में जिन नीतियों को ग्लोबल स्तर पर अपनाया गया था, वह विफल साबित हो रही हैं. और पूंजीवाद का संकट गहरा रहा है.

अमरीकी और यूरोपियन यूनियन का संकट इसी की और इशारा कर रहा था. भारत समेत अधिकांश देश मिनिमम गवर्नेंस के अपने ही विचारों से पीछा छुड़ाने लगे थे. अमरीका में बर्नी सैंडर्स और ब्रिटेन में जर्मी कोर्बिन तो खुलेआम समाजवाद की पैरवी करते देखो गये तो ट्रंप इस के खिलाफ खुल कर सामने आ गये.

रूस इस विवाद से अलग नहीं था. लेकिन उसने अपने देश के विवाद को बाहर नहीं जाने दिया. चीन जैसी आर्थिक ताकत का विकास दर जिस तरह कम हुआ उसे भी गहरायी से समझने की जरूरत आ पड़ी.

लातिनी अमीरीकी देशों में जरूर कुछ वैकल्पिक प्रयोग किये गये. लेकिन अमरीका के नेतृत्व में उसे खत्म करने के दुश्चक्र तेज कर दिये गये. कोरोना वायरस की तुलना प्लेग से कहीं ज्यादा गहरे असर के रूप में की जा रही है.

पहले और दूसरे युद्ध के बाद वैश्विक आर्डर बदला तो क्या कोरोना का प्रभाव भी वेश्विक आर्थिक आर्डर को प्रभावित करेगा. इस सवाल का जबाव अभी से ढूंढा जाने लगा है.

कोरोना वायरस का प्रभाव जिस तरह श्रमिकों पर पड़ा है वह भारत जैसे देशों में बड़ी चुनौती है. ऐसे देशों ने एक तरफ जनकल्याण से पीछा छुड़ा सा लिया है. इस भ्रम के साथ कि वे गरीबों के हितों की सरकार हैं. भारत में लाकडाउन के दौर में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों में जो बेचैनी है, वह सामान्य नहीं है. सरकारों की समस्या का हल निकालने का तरीका तो बेहद निराशाजनक है.

24 मजदूरों की जान इस दौरान जिस तरह गयी है वह स्थिति को ज्यादा गंभीर बना रहा है. कोरोना वायरस से 30 मार्च तक 34 लागों की मृत्यु हुई है. जब कि इस तबके के 24 लोग पिछले दिनों घर जाने के दौर में मरे हैं. यह बताता है कि सुचिंतित नीति का अभाव है.

इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि तमाम दावों के बावजूद इन मजदूरों को अपना और अपने परिवारों की चिंता है. इस संकट से परे गोदी मीडिया और भक्तगण अपने प्रिय विश्व हिंदू-मुस्लिम डिबेट पर लौट आये हैं.

इसे भी पढ़ेंः #Ranchi: हटाये गये हिंदपीढ़ी थाना प्रभारी, युवक की पिटाई के मामले में कार्रवाई

advt
Advertisement

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button