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#Corona: शहर में सबकुछ अलर्ट मोड पर, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में न पर्याप्त जानकारी न पूरी सतर्कता

  • शहर काम करने आने वाले मजदूरों ने कहा, गांव में इतनी सर्तकता बरतना मुश्किल
  • स्वास्थ्य उपकेंद्रों की ओर अब तक सहिया बहनें ग्रामीणों को सजग करने नहीं पहुंची
  • महिलाओं ने कहा- बच्चों को इमली, बेर और धूल से कैसे बचायें?

Rahul/Chhaya

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Ranchi: कोरोना वायरस को लेकर देश-दुनिया में सर्तकता बरतने संबधी सूचनाएं दी जा रही है. डब्ल्यूएचओ ने इसे वैश्विक महामारी घोषित की जिसके बाद भारत में भी केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से सुरक्षा संबधी प्रचार शुरू हुए.

22 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस को लेकर जनता कर्फ्यू की घोषणा की. राज्य सरकार की ओर से भी सरकारी कार्यालयों में अनावश्यक प्रवेश पर रोक लगा दी गयी.

इन सबके बीच न्यूज विंग ने यह जानने की कोशिश की कि रांची से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना वायरस को लेकर क्या स्थिति है. न्यूज विंग की टीम ने नामकुम प्रखंड के कई गांवों का दौरा किया.

ग्रामीणों से बात की कि वो कोरोना वायरस से कितने सजग है और क्या एहतियात बरत रहे हैं.

बातचीत से यही जानकारी हुई कि ग्रामीणों को जो भी जानकारी है, वो सोशल मीडिया से हुई है. कुछ ऐसे भी लोग मिले जिन्हें बीमारी की अब तक जानकारी नहीं है.

स्वास्थ्य उपकेंद्रों और आगंनबाड़ी केंद्रों की ओर से ग्रामीणों को जागरूक नहीं किया जा रहा. कुछ स्वास्थ्य उपकेंद्रों की पड़ताल भी इस दौरान टीम ने की. पेश है न्यूज विंग की खास रिपोर्ट.

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कुछ नहीं पता, नहीं जानते कैसे होगा

#Corona: शहर में सबकुछ अलर्ट मोड पर, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में न पर्याप्त जानकारी न पूरी सतर्कता ग्रामीण ईश्वर दास ने कहा कि उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं है. क्या है कोरोना, कैसे हैं लक्षण ये नहीं पता. पहले तो सहिया ऐसी कोई भी जानकारी देने गांव आती थी. लेकिन इस बीमारी के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गयी. मनरेगा के तहत मजदूरी किया करते थे. लेकिन अब तो लकवा होने के बाद से काम पर नहीं जा रहे. ऐसे में कोई जानकारी नहीं है. बच्चे बात करते हैं.

सरहुल की जानकारी देते हुए उलहातु गांव के लोगों ने बताया कि गांव से सरहुल जुलूस नहीं निकाला जाता है. गांव वाले आपस में ही एकजुट होकर आयोजन करते हैं. लेकिन किसी बीमारी के कारण आयोजन नहीं करने की अब तक गांव में कोई बात नहीं हुई है.

सुमन ने कहा कि वो शहर जा कर मजदूरी करती है. इस बीमारी के बारे में कुछ नहीं पता. तीन दिन पहले एएनएम जीएनएम आयी थीं जिन्होंने कुछ दवाइयां दीं. लेकिन क्या दवाई थी ये नहीं पता.

बीमारी के बारे में कुछ नहीं बताया गया. काम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा की कितनी भी कोई बीमारी हो मजदूरी करना नहीं छोड़ सकते क्योंकि इसी से घर चलता है.

लोग बताते हैं बीमारी फैली है

नामकुम प्रखंड के उलहातु गांव की फूलमणी लकड़ा ने कहा कि बहुत जानकारी तो नहीं है लोग बताते हैं कि बीमारी फैली है. लेकिन क्या है और कैसी बचा जाये, इसके बारे में अधिक नहीं पता.

बच्चों ने फोन में दिखाया, साफ सफाई से रहने की जानकारी दी. फूलमणी ने कहा कि डर तो लगता है लेकिन एएनएम जीएनएम कोई अभी बताने नहीं आये हैं.

इसी गांव की रेणु लकड़ा ने बताया कि वो उन्हें पिछले पंद्रह दिनों से इस बीमारी की जानकारी है. जानकारी सहिया या आंगनबाड़ी बहन की ओर से नहीं बल्कि सोशल मीडिया में देखने से हुई.

रेणु ने बताया कि वो मजदूरी करती हैं. लोग बात करते हैं, तो कुछ जानकारी हुई. वहीं बच्चों ने सोशल मीडिया पर भी दिखाया. सोशल मीडिया से ही साफ सफाई और सर्तकता की बात समझ आयी.

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बैर, इमली और धूल से बच्चों को कैसे बचायें

बातचीत के दौरान आशा तिर्की ने कहा कि जानकारी तो पिछले कुछ दिनों से है. लेकिन गांव में इतना कौन समझे. डर लगता है लेकिन उतनी जानकारी भी नहीं है. हाथ धोने और साफ सफाई के अलावा कुछ पता नहीं है.

जो भी जानकारी हुई बच्चों ने फोन में ही दिखाया. अब तक उप स्वास्थ्य केंद्र से कोई सहिया नहीं आयी है.

इन्होंने कहा की पीएम की ओर से जनता कर्फ्यू की बात की गयी है. गांव में क्या होगा उसी दिन पता चलेगा. चर्चा तेज है.

जुमपिन तिर्की ने कहा कि छींकना, खांसी बुखार से कोई बीमारी फैल रही है ये पता है. लेकिन और कुछ नहीं. पति शहर कमाने जाते हैं वो ही बहुत कुछ बताये तो जानकारी हुई.

गांव में इतना कोई नहीं मानता. बैर, इमली तो लोग खाते ही हैं. बच्चों को बार बार धूल में खेलने से भी नहीं रोका जा सकता.

स्वास्थ्य उपकेंद्र ने कहा -दे रहे जानकारी, महिलाओं ने कहा -नहीं है जानकारी

न्यूज विंग की टीम ने इस दौरान सरवल गांव के स्वास्थ्य उपकेंद्र में एएनएम उषा रानी से बात की. इन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह के गुरुवार को आंगनबाड़ी केंद्र में महिलाओं और बच्चों को इसकी जानकारी दी गयी.

टीम ने जब सरवल गांव के टाईटोला के लोगों से बात की तो जानकारी हुई की साफ-सफाई के बारे में तो बताया गया, लेकिन बीमारी की कोई जानकारी नहीं दी गयी.

पिंकी ने बताया कि लोगों को अधिक जानकारी नहीं है कि क्या बीमारी है. कुछ बातें बीमारी की पता हैं, लेकिन ठीक से नहीं.

एतवारी ने बताया कि सरवल गांव की एतवारी ने बताया कि पिछले गुरुवार को आंगनबाड़ी केंद्र में बैठक हुई. जिसमें गांव की महिलाएं शामिल थीं. लेकिन एक घंटे की बैठक में बीमारी के बारे में नहीं बताया गया. साफ सफाई से रहने की बात की गयी.

महिलाओं ने बताया की मास्क आदि की जानकारी नहीं है. वहीं स्वास्थ्य उपकेंद्र की एएनएम उषा रानी ने कहा कि आने वाले दिनों में मास्क और सैनेटाइजर बांटा जायेगा. अभी सीएचसी से नहीं मिला है.

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