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CORONA EFFECT : मधुपुर उपचुनाव में विजयी कैंडिडेट सिर्फ दो लोगों के साथ ही लेंगे जीत का सर्टिफिकेट, रैली, जुलूस पर पूर्ण रूप से रोक

Ranchi : राज्य में तेजी से पांव पसारते कोरोना वायरस के संकट के बीच देवघर जिला प्रशासन ने मधुपुर उपचुनाव के संबंध में कुछ निर्देश जारी किये हैं. जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह डीसी नैंसी सहाय ने कहा है कि बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा कुछ जरूरी निर्देश जारी किये गये हैं. मधुपुर उपचुनाव की मतगणना और चुनाव परिणामवाले दिन इसका अनुपालन होगा. 2 मई को मतगणना होनी है. इस दिन चुनाव के नतीजे घोषित किये जाने के बाद किसी तरह की रैली, विजय जुलूस या जश्न पर पूरी तरह से बैन लगा दिया गया है. साथ ही नतीजों के बाद जीतनेवाला प्रत्याशी सिर्फ दो लोगों के साथ ही अपनी जीत का सर्टिफिकेट लेने जा सकता है. इसके अलावा मतगणना स्थल परसिर्फ उन्हें ही जाने की इजाजत होगी जिनके पास कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट होगी.

सभी दलों से प्रशासन ने मांगा सहयोग

जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हुए कहा है कि वर्तमान में कोविड नियमों का शत प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करना जरूरी है. इस संबंध में सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश का पालन करें, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके.

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ज्ञात हो कि चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और नेता पार्टी कार्यालयों में विजय जुलूस और जश्न मनाते हैं. लेकिन देश में लगातार बढ़ रहे कोरोना मामलों को देखते हुए चुनाव आयोग ने किसी तरह का जुलूस कार्यक्रम नहीं करने का निर्देश जारी किया है.

हफीजुल और गंगा नारायण की किस्मत का होना है फैसला

गौरतलब है कि पूर्व मंत्री हाजी हुसैन के असामयिक निधन से मधुपुर उपचुनाव कराना पड़ा है. इसमें उनके पुत्र और मंत्री हफीजुल हसन चुनावी मैदान में हैं जबकि भाजपा ने गंगा नारायण सिंह को खड़ा किया था. इन दोनों के अलावा चार निर्दलीय कैंडिडेट भी मैदान में हैं. 17 अप्रैल को मतदान हुआ था. उम्मीद की जा रही है कि 2 मई को मतगणना के दिन गंगा या हफीजुल हसन में से ही कोई विजेता बन कर सामने आयेगा.

स्वास्थ्य विभाग की टीम रहेगी तैनात

मतगणना के दिन मतगणना स्थल पर सुबह 4 बजे से ही जिला प्रशासन की टीम हेल्थ डिपार्टमेंट के कर्मियों के साथ मौजूद रहेगी. जो भी कर्मी मतगणना कार्य में प्रतिनियुक्त किये गये हैं, उनकी जांच थर्मल स्कैनर और दूसरे माध्यम से की जायेगी. राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की संख्या सीमित रखी जायेगी. उनकी भी जांच स्वास्थ्य विभाग की टीम करेगी. किसी की भी रिपोर्ट संदिग्ध लगने पर उसे रोक दिया जायेगा.

 

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